उन्नाव बलात्कार कांड के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलना और बलात्कार मामले में मिली सजा के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा निलंबित किया जाना अप्रत्याशित है. सब जानते हैं कि उन्नाव बलात्कार कांड की सर्वाइवर के पिता की हत्या थाने में कर दी गई थी. चाचा अभी भी जेल में हैं. मुख्य गवाह की भी हत्या हुई थी और दो महिला रिश्तेदारों को रोड एक्सीडेंट के बहाने मार डाला गया. ऐसे मामले में सेंगर को जमानत देना लड़की और उसके परिवार के लिए खतरा है और उनके लिए इस मुकदमे को आगे लड़ना मुश्किल हो जाएगा.
राजनीतिक रूप से ताकतवर सेंगर को उत्तरप्रदेश के आगामी चुनावों से पहले मिली जमानत सरकार के रवैए को उजागर करने वाली है. यहां जनांदोलनों के कारण जेल में बंद नताशा को जमानत नहीं दी जा रही है लेकिन बलात्कारियों को जमानत देने में उदारता बरती जा रही है जो निराशाजनक है.
ऐपवा पीड़िता के साथ एकजुटता दिखाते हुए मांग करती है कि सेंगर की जमानत रद्द हो और सेंगर को मिली आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी जाए.
23 दिसंबर, कल रात जब पीड़िता की मां और उनके परिवार जन शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की मांग करते हुए, इंडिया गेट पर बैठे थे, तो दिल्ली पुलिस द्वारा पीडिता के परिवार के सदस्यों को घसीटते हुए, जबरन डिटेन किया गया. जो कि बेहद शर्मनाक है. ऐपवा इस मुश्किल घड़ी में पीड़िता के परिवार के साथ पूरी संवेदना व्यक्त करती है और दिल्ली पुलिस की इस हरकत की कड़ी निंदा करती है.
यह भाजपा के शासन काल की क्रूर सच्चाई है, जिसमें न ही महिलाएं सुरक्षित है और आजाद है. जहां बलात्कारियों को बेल मिलती है और न्याय की मांग करने वालों को जेल में डाला जाता है.