वर्ष 35 / अंक - 29 / लोकतांत्रिक अधिकारों व संविधान पर बढ़ते हमलों के खि...

लोकतांत्रिक अधिकारों व संविधान पर बढ़ते हमलों के खिलाफ वामदलों द्वारा राज्यव्यापी प्रतिवाद

लोकतांत्रिक अधिकारों व संविधान पर बढ़ते हमलों के खिलाफ वामदलों द्वारा राज्यव्यापी प्रतिवाद

संयुक वामदलों के आह्वान पर 13 जुलाई को प्रदेशव्यापी प्रतिवाद किया गया. मिर्जापुर जिले में भाकपा (माले), माकपा, भाकपा कार्यकर्ताओं द्वारा कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए सभा करके राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया. सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता भाकपा (माले) राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि मोदी-योगी राज में संवैधानिक अधिकारों को सीमित करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला किया जा रहा है. मंत्रियों व प्रशासनिक अफसरों की जनता के प्रति जबाबदेही सुनिश्चित नहीं है. नीट पेपर लीक व परीक्षा पेपर लीक पर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक समेत छात्र-युवा जंतर-मंतर पर 16 दिन से अनशन कर रहे हैं किन्तु सरकार छात्रों से संवाद करने से भाग रही है. मेरठ में दलित छात्रा की हत्या पर न्याय मांगने वाले परिजनों व जनता को एसएसपी द्वारा अभिरक्षा में पीटा जा रहा है. पूरे प्रदेश में अल्पसंख्यकों व दलितों को केंद्र करके हमले हो रहे हैं. महिलाओं पर हमले बढ़ रहे हैं और अपराधियों का अभिनंदन किया जा रहा है. दलित आदिवासियों की बस्तियों व आबाद जमीनों पर गैर कानूनी बुलडोजर चलाया जा रहा है. मोदी सरकार के चौदह सालों में कोल-मुसहर, बियार, गोंड आदि जातियों को अनुसूचित जनजाति की पहचान व दर्जा नहीं मिला. सदियों से जिन जमीनों पर वह बसे हैं, वनाधिकार कानून से वंचित कर उन्हें बुल्डोजर से तबाह किया जा रहा है. मिर्जापुर के गरीब विकास व रोजगार से कोसों दूर स्वच्छ पानी व सरकारी इलाज को मोहताज हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल करने वाले, विरोधी विचार वाले विपक्षी नेताओं पर फर्जी मुकदमे कायम कर जेलों में डाल जा रहा है. न्यूनतम मजदूरी व हक की मांग करने वाले नोएडा के मजदूर आन्दोलन का बर्बर दमन करते हुए नेताओं को जेल में डाल दिया गया. किसी भी लोकतांत्रिक प्रतिवाद को रोकने के लिए नेताओं को घरों पर नजरबंद करना आम नियम बन गया है. राममंदिर के चढ़ावे में डकैती हुई, लेकिन संघ परिवार व मोदी मौन होकर गुनहगारों को बचाने में लगे हैं. उन्होंने आम जनता का आह्वान किया कि फासिस्ट भाजपा सरकार को हटाने के लिए जनांदोलन को तेज करें.

सभा के अंत में मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन के द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे, उत्तर प्रदेश में संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों को सुनिश्चित करने, मेरठ के एसएसपी को निलंबित करने, गैरकानूनी बुलडोजर पर सख्ती से रोक लगाने, यूपी में कोल, गोंड मुसहर बियार, वनवासी आदि जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल कर वनाधिकार कानून लागू करने, मिर्जापुर के पठारी क्षेत्र में रोजगार व स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था करने. दलितों व महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं के लिए डीएम व एसपी की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई.

मिर्जापुर के अलावा प्रतिवाद कार्यक्रम गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, बलिया, आजमगढ़, बस्ती, गाजीपुर, बनारस, भदोही, चंदौली, सोनभद्र, प्रयागराज, रायबरेली, लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, कानपुर, जालौन, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सहारनपुर, मथुरा आदि जिलों में आयोजित हुए. फारवर्ड ब्लाॅक भी कई जगहों पर शामिल हुई.

प्रतिवाद कार्यक्रम की मांगें:

1. मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम के हत्याकांड में न्याय की मांग करने वाले परिजनों व प्रदर्शनकारियों से बर्बर, मनुवादी, हिंसक व गैर-संवैधानिक बर्ताव करने वाले एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल निलंबित कर कड़ी सजा दी जाए.

2. करीब दो दर्जन छात्रों की जान लेने वाले नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय हो, जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी, आइसा सहित छात्र-युवा संगठनों के आंदोलन व भूख हड़ताल की मांगों को माना जाए; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दें और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए भंग हो.

3. अयोध्या चंदा चोरी मामले में लीपापोती बंद हो, विश्वसनीय जांच कराई जाए, जवाबदेही तय की जाए, चंपत राय सहित सभी दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और आरएसएस के नियंत्रण वाले मंदिर ट्रस्ट को भंग किया जाए.

4. प्रदेश में दलितों, गरीबों, आदिवासियों व अल्पसंख्यकों पर बुलडोजर चलाना बंद हो. गैरकानूनी बुलडोजर राज पर रोक लगे. बुलडोजर कार्रवाई से पीड़ित परिवारों का समुचित पुनर्वास किया जाए तथा मुआवजा दिया जाए. प्रदेश में सरकारी व वन विभाग की जमीनों पर आबाद भूमिहीनों, दलितों, आदिवासियों को उन जमीनों का मालिकाना हक दिया जाए.

5. नोएडा सहित अन्य जगहों पर हुए मजदूर आंदोलनों में गिरफ्तार सभी मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों को रिहा किया जाए और उनपर से फर्जी मुकदमे हटाये जाएं.

6. जन आंदोलनों से ठीक पहले नेताओं-कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट करने, नजरबंद करने और गैरकानूनी हिरासत में रखने की प्रदेश में चल रही शासकीय कार्रवाइयों पर कड़ाई से रोक लगाई जाए. शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार पर कोई भी पाबंदी अस्वीकार्य है.

7. सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा आदि जिलों में रह रहे कोल, मुसहर, बियार, गोंड आदि आदिवासी समुदायों को जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाए. इन जातियों को वनाधिकार कानून के दायरे में शामिल कर वनाधिकार कानून 2006 को लागू किया जाए.

इसी प्रकार, गाजीपुर, वाराणसी, भदोही, मऊ, कुशीनगर, आजमगढ़ आदि जिलों में मुसहर जाति को भी जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाए.

8. मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि जिलों के दूरदराज के इलाकों में पीने का पानी तत्काल उपलब्ध कराया जाए. इसके लिए खराब पड़े हैंडपंपो का रिबोर कराने, मरम्मत कराने, खराब पड़े सोलर पैनल एवं टंकियों को ठीक कराने, नल जल योजना के तहत बनी टंकी एवं बिछाये गये पाइपलाइनो को दुरुस्त कर पानी सप्लाई सुनिश्चित कराई जाए.

9. दलित उत्पीड़न की घटनाओं के लिए जिलाधिकारी (डीएम) व पुलिस अधीक्षक (एसपी) की सीधी जिम्मेदारी तय की जाए.

10. प्रदेश में महिला हिंसा व उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को विशेष कदम उठाने के लिए निर्देशित किया जाए. बलात्कारियों, अपराधियों को संरक्षण देने व सम्मानित करने पर कड़ाई से रोक लगाई जाए.


18 July, 2026