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महाराष्ट्र के भगेरिया केमिकल प्लांट दुर्घटना : श्रमिकों की जान के साथ खिलवाड़ कौन कर रहा है

महाराष्ट्र के भगेरिया केमिकल प्लांट दुर्घटना : श्रमिकों की जान के साथ खिलवाड़ कौन कर रहा है

मार्च 2026 में महाराष्ट्र के बोईसर क्षेत्र में एक बड़ी गैस लीक की घटना हुई थी. यह घटना 2 मार्च 2026 को दोपहर करीब 2 बजे तारापुर एमआईडीसी प्लॉट नंबर डी-17 पर भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (पहले जेनिथ के नाम से जानी जाने वाली) केमिकल कंपनी में घटी.

भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक निबंधित पब्लिक कंपनी है. यह कंपनी मुख्य रूप से डाईज, डाई इंटरमीडिएट्स, केमिकल्स और सोलर उत्पादन से जुड़ी हुई है. इसका मुख्यालय मुंबई में है. भगेरिया केमिकल कंपनी के प्लांट गुजरात के वापी और महाराष्ट्र के तारापुर में स्थित हैं. कंपनी का लगभग 50% उत्पादन विश्व के विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है, जिसमें कोरिया, जापान, ताइवान, चीन, जर्मनी, अमेरिका, यूरोपीय देश और अफ्रीकी देश शामिल हैं. कंपनी सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी सक्रिय है, जिसमें अहमदनगर में 39 मेगावाट का सौर विद्युत संयंत्र और चेन्नई में 4.78 मेगावाट का सौर रूफटॉप संयंत्र शामिल हैं.

एमआईडीसी पालघर जिले में तारापुर-बोईसर क्षेत्र प्रमुख केमिकल और फार्मा इंडस्ट्रीज का हब है. पिछले 10 वर्षों में खासकर 2015 से 2026 तक में.

यहां मुख्य रूप से केमिकल रिएक्टर विस्फोट, गैस लीक (नाइट्रोजन, ओलियम, हाइड्रोक्लोरिक एसिड आदि), आग और विस्फोट की कई गंभीर औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं. इनसे श्रमिकों की जान गई और कई लोग घायल हुए. गुजरात सबसे अधिक दुर्घटना प्रभावित राज्य है. देश के 30-35% अति खौफनाक केमिकल यूनिट्स यहीं हैं. दहेज, अंकलेश्वर, वापी, पानोली और नंदेश्वरी जैसे बड़े केमिकल हब यहां मौजूद हैं.

साल 2020 से 2023 के तीन वर्षों में 587 दुर्घटनाओं में 700 से अधिक लोगों की मौत हुई. महत्वपूर्ण बात यह है कि हर साल दुर्घटनाओं में लगभग 17% की वृद्धि हुई.

आनंदनगर, अंबरनाथ एमआईडीसी (मुंबई से लगभग 60 किमी दूर) क्षेत्र में श्री गणेश केमिकल कंपनी में 9 मार्च 2026 को शाम करीब 5.45 से 6.15 बजे के बीच भीषण आग लगी. कंपनी में रखे रसायनों के ड्रमों के कारण लगातार कई धमाके हुए. इससे आसपास 2 किलोमीटर तक कंपन महसूस हुई और काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई दिया. आसपास के गांवों से लोगों को बाहर निकाला गया. कुछ लोग घायल हुए, लेकिन बड़ी जान-माल की हानि टल गई. अगस्त 2025 में एक फार्मा कंपनी में नाइट्रोजन गैस लीक से 4 श्रमिकों की मौत हो गई थी और 2 गंभीर रूप से घायल हुए थे.

अक्टूबर 2021 में एक केमिकल कंपनी से सल्फ्यूरिक एसिड गैस लीक होने के कारण 28 से 34 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था. पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में 25 से अधिक बड़ी आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं.

साल 2023 से 2024 में देश में अधिकांश गैस और केमिकल लीक की घटनाएं हुईं. 2024-2025 में दहेज और अंकलेश्वर में कई विस्फोट और लीक की घटनाओं में 10 से अधिक श्रमिकों की मौत हुई. दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है.

बोईसर एमआईडीसी और तारापुर में पिछले 10 वर्षों में हुई प्रमुख दुर्घटनाएं इस प्रकार है.
  1. नवंबर 2026 में तारापुर एमआईडीसी में एसिड कंटेनर खुलने से 10 लोग घायल.
  2. मार्च 1018 में बोईसर-तारापुर एमआईडीसी में केमिकल यूनिट के बॉयलरमें विस्फोट से 3 मौतें, 14 घायल, अन्य 4-6 यूनिट्स को नुकसान.
  3. जनवरी 2020 में अंक फार्मा की निर्माणाधीन यूनिट में केमिकल टेस्टिंग के दौरान बड़ा विस्फोट में 7 मौतें और कई घायल हुए.
  4. अप्रैल 2020 में सैनिटाइजर सर्फैक्टेंट यूनिट में विस्फोट में 2 मौतें, 1 घायल.
  5. अगस्त 2020 में ऑर्गेनिक केमिकल फैक्ट्री में विस्फोट; 1 मौत, 4 गंभीर घायल.
  6. अक्टूबर 2022 में गामा एसिड उत्पादक केमिकल फैक्ट्री में रिएक्टर विस्फोट; 3 मौतें, 12 घायल.
  7.  2024-2025 में कई बार ब्रोमीन, हाइड्रोक्लोरिक एसिड फ्यूम्स/गैस लीक की घटनाएं; स्थानीय लोगों को सांस लेने में तकलीफ, अन्य जगहों पर स्थानांतरित किया गया, बड़ी जान-माल हानि टली.
  8. 21 अगस्त 2025 को मेलडी फार्मास्यूटिकल्स लि. (बोईसर) में रिएक्शन टैंक से नाइट्रोजन गैस लीक; कल्पेश राउत, बंगाली ठाकुर, धीरज प्रजापति और कमलेश यादव सहित 4 श्रमिकों की मौत, 2 गंभीर घायल हुए जिन्हे अति दक्षता विभाग (आईसीयू) में भर्ती होना पड़ा.
  9. 2 मार्च 2026 को भगेरिया केमिकल में करीब 2,500 लीटर क्षमता के टैंक से ओलियम (टॉक्सिक गैस) लीक. ओलियम को फ्रयूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड भी कहा जाता है. यह अत्यंत खतरनाक, संक्षारक और जहरीला रसायन है. हवा के संपर्क में आने पर सफेद धुएं के बादल बनते हैं. हवा की दिशा के कारण यह धुआं लगभग 5 किमी त्रिज्या में फैल गया, जिससे बोईसर, खैरेपाडा, सरावली, कैमलिन नाका, टाकी नाका, सालवाड, पास्थल और बोईसर रेलवे स्टेशन क्षेत्र प्रभावित हुए. कुल 2600 लोग प्रभावित हुए, जिनमें लगभग 1600 तारापुर विद्यामंदिर और चिन्मय विद्यालय के छात्रा तथा 1000 श्रमिक शामिल थे. सभी को आंखों में जलन और सांस की तकलीफ हुई. खास बात यह कि उस यूनिट में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), अग्निशमन दल, स्थानीय प्रशासन और अन्य आपदा प्रबंधन टीमें मौके पर पहुंचीं. उन्होंने स्कूलों और आसपास के लोगों को तुरंत बाहर निकाला और सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. दो लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया. कुछ रिपोर्टों के अनुसार अधिक लोग अस्पताल गए, लेकिन कोई मौत या गंभीर चोट नहीं हुई. लगभग 4 घंटे के प्रयास के बाद शाम 6:45 बजे लीक पर नियंत्रण पाया गया. यह दुर्घटना औद्योगिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसका स्वतः संज्ञान लिया है और महाराष्ट्र सरकार से 2 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है.

बोईसर-तारापुर एमआईडीसी क्षेत्र महाराष्ट्र के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है, जहां मुख्य रूप से रासायनिक, फार्मास्युटिकल, स्टील, टेक्सटाइल और अन्य उद्योग हैं. यहां लगभग 1,000 से 1,500 कारखाने कार्यरत हैं और कुल श्रमिकों की संख्या करीब 1.5 से 2 लाख है, जिसमें 90% से अधिक ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) श्रमिक हैं. यहां स्थानक पालघर जिले के आदिवासी के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिक बड़ी संख्या में काम करते हैं.

इन ठेका श्रमिकों की भर्ती यहां के कुछ प्रभावशाली ट्रेड यूनियन नेता करते हैं. परिणामस्वरूप मालिक के खिलाफ शिकायत का निवारण नहीं होता, बल्कि स्थानीय कंपनी मालिकों की संगठन इन श्रमिकों को इस क्षेत्र में कहीं और नौकरी करने से रोक देते हैं.

बोइसर एमआईडीसी क्षेत्र उच्च जोखिम वाला क्षेत्र है, जहां कई छोटी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों की जोखिमपूर्ण यूनिट्स हैं. प्रशासन, पुलिस और उद्योग मालिकों के बीच सांठगांठ, अत्यधिक नौकरशाही, कागजी कार्रवाई की अधिकता, अनावश्यक प्रक्रिया में जान-बूझकर होने वाली देरी के कारण ऐसी घटना के बाद आंखें मूंद ली जाती हैं और दुर्घटनाएं बार-बार होती रहती हैं. सुरक्षा नियमों का खुलेआम उल्लंघन, तकनीकी खराबी, मानवीय भूल, अपर्याप्त प्रशिक्षण, प्रशासन और कंपनी की जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहने के कारण श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से अस्त-व्यस्त और अपर्याप्त है.

इस क्षेत्र में रोजाना ठेके पर काम करने वाले श्रमिकों का नाम कंपनी में प्रवेश पर हाजिरी रजिस्टर में दर्ज नहीं होता, बल्कि ड्यूटी खत्म होने के बाद दर्ज किया जाता है. परिणामस्वरूप दुर्घटना में मृत श्रमिकों की सही संख्या सामने नहीं आती. यहां तक कि छोटी दुर्घटनाओं के समय कंपनी उस यूनिट के मालिक दुर्घटनाग्रस्त श्रमिक की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर देता है क्योंकि उस कंपनी में उस श्रमिक का कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं होता. इससे यहां काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति दयनीय है.

कठोर श्रम नियम और सुरक्षा नियम लागू करने के बजाय प्रशासन और सत्ताधारी दल की लापरवाही इन दुर्घटनाओं को लगातार न्योता देती है. ठेका प्रथा के जरिए श्रमिकों का भयानक शोषण हो रहा है. नए श्रम संहिता श्रमिक वर्ग को बेड़ियां पहनाकर गुलामी की व्यवस्था में धकेलने वाले साबित होंगे. सिर्फ मुनाफे के लिए यह ठेका व्यवस्था और उसमें श्रमिकों का क्रूर शोषण का जिम्मेदार भाजपा की फासीवादी सरकार है. सरकार को श्रमिक वर्ग और आम जनता की जान की कोई परवाह नहीं है, वह कॉरपोरेट के सामने सिर झुकाए हुए है.

07 March, 2026