10 जनवरी को नीलांबर-पीतांबरपुर में शहीद नीलांबर-पीतांबर की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता कामरेड बृजनंदन मेहता ने की, जबकि संचालन कमेश सिंह चेरो ने किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाकपा(माले) के कार्यकर्ताओं के अलावा कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
वक्ताओं ने बताया कि शहीद नीलांबर-पीतांबर का जन्म 10 जनवरी 1823 को हुआ था. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के कारण उन्हें लेस्लीगंज में फांसी दी गई थी. बाद में उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में लेस्लीगंज का नाम नीलांबर-पीतांबरपुर रखा गया. लेकिन, आज भी फांसी स्थल अतिक्रमण मुक्त नहीं किया जा सका है, जो शहीदों के सम्मान के साथ अन्याय है.
कार्यक्रम में जन संग्राम मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष जुगलपाल चेरो और भयारी पंचायत के झारखंड प्रदेश संयोजक रामराज सिंह चेरो ने विशेष रूप से संबोधित किया. सभी वक्ताओं ने फांसी स्थल एवं समाधि स्थल दोनों जगह पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को नमन किया.
इसके अलावा ईश्वरी राम, अनुज पासवान, राजकुमार सिंह, नर्वदेश्वर सिंह, शिवनाथ महतो, श्यामलाल पासवान, शत्रुघ्न आजाद सहित कई वक्ताओं ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की गलत सोच और रवैये पर कड़ा प्रहार किया. वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार शहीद आदिवासियों के इतिहास से उनके नाम मिटाने की साजिश कर रही है.
वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह डाल्टेनगंज शहर का नाम बदलकर मेदिनीनगर किया गया, वहीं अब मेदिनी नगर की प्रतिमा हटाई जा रही है, जो बेहद निंदनीय है. उन्होंने शहीद नीलांबर-पीतांबर के संघर्ष और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदिवासी शहीदों के इतिहास और स्मृति स्थलों की रक्षा के लिए संगठित आंदोलन जरूरी है.
कार्यक्रम के अंत में फांसी स्थल और समाधि स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा उसके संरक्षण व सौंदर्यीकरण की मांग दोहराई गई, ताकि आने वाली पीढ़ियां शहीदों के बलिदान से प्रेरणा ले सकें.