वर्ष 35 / अंक - 31 / बठिंडा में शहीद ऊधम सिंह का शहादत दिवस मनाया

बठिंडा में शहीद ऊधम सिंह का शहादत दिवस मनाया

बठिंडा में शहीद ऊधम सिंह का शहादत दिवस मनाया

31 जुलाई 2026 को शहीद भगत सिंह नौजवान सभा, इंकलाबी नौजवान सभा, पंजाब स्टूडेंट्स फेडरेशन और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने बठिंडा के टीचर्स होम में एक शानदार सम्मेलन आयोजित करके आजादी की लड़ाई के महान शहीद ऊधम सिंह सुनाम उर्फ मोहम्मद सिंह ‘आजाद’ का शहादत दिवस मनाया. ‘रोजगार दो, नशा नहीं’ के नारे के साथ बुलाए गए इस सम्मेलन को चर्चित छात्र नेता अंजलि ने मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित किया. उन्होंने जंतर-मंतर पर लड़े गए उस शानदार संघर्ष का विस्तार से जिक्र किया जो बिजली की गति से देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया था. साथ ही, उन्होंने सरकार के दमन और साजिशों, आरएसएस के संगठनों द्वारा पाले-पोसे गए गुंडों की बर्बरता और संघर्ष की सकारात्मक उपलब्धियों के बारे में भी बताया.

साथी अंजलि ने कहा कि इस आंदोलन का सबसे बड़ा सबक यह है कि देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए साझा मोर्चे बनाकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को कैंपस से, भाजपा को राजनीति से और संघ परिवार को समाज से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया जाए. इस मौके पर धर्मेंद्र सिंह मुकेरियन, हैप्पी मान, गगनदीप, सुखजीत रमनंदी और अरमान सिंह ने भी अपने विचार रखे. मंच का संचालन हरविंदर चोटियां ने किया.

वक्ताओं ने इस अनोखे शहीद की जन-हितैषी सोच, अपने विश्वास के प्रति अटूट समर्पण और त्याग से भरे जीवन के बारे में बात की और देशवासियों, खासकर युवाओं से अपील की कि वे उनकी सोच को अपनाएं और उनके दिखाए रास्ते पर चलें.

उन्होंने कहा कि शहीद ऊधम सिंह को हर धर्म के चरमपंथियों से कहीं ज्यादा नफरत उन साम्राज्यवादी हमलावरों और पूंजीवादी लुटेरों से थी जिन्होंने पूरी दुनिया को गुलाम बना रखा था. उन्होंने अपना नाम बदलकर मोहम्मद सिंह ‘आजाद’ रख लिया था क्योंकि वे काॅमनवेल्थ (राष्ट्रमंडल) के पक्षधर थे. जज के सामने उनका यह बयान कि वे ब्रिटिश राष्ट्र से नहीं, बल्कि सिर्फ साम्राज्यवादियों और पूंजीपतियों से नफरत करते थे, उनकी व्यापक सोच का स्पष्ट प्रमाण है. वक्ताओं ने कहा कि जिस साम्राज्य से मानवता की आजादी के लिए शहीद ने अपनी जान जोखिम में डाली थी, वही साम्राज्य – खासकर अमेरिका – आज दूसरे विश्व युद्ध से पहले की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक हो गया है.

उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में चल रहे युद्ध, तख्तापलट की साजिशें, खून-खराबा, गृह युद्ध या आतंकवाद के पीछे अमेरिकी साम्राज्य और उसके सहयोगी हैं. पूंजीवादी देशों के शासक अपने देशों या लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय साम्राज्य द्वारा निर्देशित नव-उदारवादी नीतियां लागू कर रहे हैं, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई, महंगाई-बेरोजगारी और अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और लोगों से शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा छीनी जा रही है. ये साम्राज्यवादी लोकतंत्र, संघवाद, भाईचारे और वर्ग-चेतना को अपने रास्ते में सबसे बड़ी बाधा मानते हैं. इसीलिए साम्राज्य के हाथों में कठपुतली बने शासक तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं. भारत की मोदी सरकार इस प्रवृत्ति का सबसे बुरा उदाहरण है. उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता (FTA) साम्राज्यवादियों का नया हथियार है, जिसके जरिए वे दुनिया के सभी देशों के व्यापार और नीतिगत ढांचे को अपने हितों के अनुसार ढालते हैं.

उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी मौजूदा विश्व व्यवस्था को बनाए रखने और मेहनतकश लोगों को सामाजिक बदलाव के लिए ‘जन-युद्ध’ का रास्ता अपनाने से रोकने के लिए दुनिया के हर कोने में दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादियों और चरमपंथियों का वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो नस्ल, धर्म आदि के नाम पर लोगों को एक-दूसरे का दुश्मन बनाते हैं. भारत में, भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार – जो सांप्रदायिक-फासीवादी, तानाशाही संगठन आरएसएस  की राजनीतिक शाखा है – साम्राज्यवादी गुलामी का सबसे बदतर रूप है. यह सरकार अपने नागपुरी आकाओं के आदेश पर न केवल ऐसी नीतियां लागू कर रही है जो देश और उसके नागरिकों को बर्बाद कर रही हैं, बल्कि देश के गरीबों के बीच धर्म के आधार पर गृह युद्ध भड़काने की कोशिश भी कर रही है. नेताओं ने कहा कि साम्राज्यवाद और सांप्रदायिक फासीवाद से आजादी पाए बिना भारतीय लोगों की बेहतरी के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. इस नव-औपनिवेशिक गुलामी की बेड़ियों से आजादी पाने के लिए, देशवासियों को साम्राज्यवाद और सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ एक और आजादी की लड़ाई लड़नी होगी. सम्मेलन में सर्वसम्मति से लगातार बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी और लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशों आदि के खिलाफ 28 सितंबर तक युवाओं में जागरूकता अभियान शुरू करने और पंजाब में संघर्ष करने वाले दलों पर हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ एक जन-आंदोलन खड़ा करने के फैसले लिए गए.



01 August, 2026