पिछले पांच दशकों से कॉमरेड राजा बहुगुणा उत्तराखंड में वाम-जनवादी आंदोलन के एक प्रमुख चेहरा रहे. सत्तर के दशक में नैनीताल के डी एस बी कैम्पस में फीस की धांधली के खिलाफ आवाज उठाने से जो सिलसिला शुरू हुआ, उसे राजा बहुगुणा ने जीवन पर्यंत लाल परचम थाम कर बुलंद रखा. वे वनों के अवैध कटान के खिलाफ लड़ाई हो या नशे के विरुद्ध संघर्ष, उत्तराखंड राज्य की लड़ाई को जनवादी दिशा देना हो या मजदूरों, दलितों, अल्पसंख्यकों के हक में मजबूती से खड़े होना हो, कॉमरेड राजा बहुगुणा का स्वर कभी मद्धम नहीं पड़ा. उत्तराखंड में भाकपा(माले) के गठन के लिए वे न केवल शुरुआती व्यक्तियों में से थे बल्कि जनांदोलनों की वामपंथी दिशा हो, इसकी कोशिश वे हमेशा करते रहे. युवावस्था के उस दौर में अपनी पहचान वामपंथी के रूप में करवाने वालों के साथ क्रांतिकारी कम्युनिस्ट पार्टी के निर्माण के महत्व पर उन्होंने निरंतर बहस चलाई.
शालीन व्यवहार और दृढ़ विचार वाले वही कॉमरेड राजा बहुगुणा 28 नवंबर 2025 को लिवर कैंसर से जूझते हुए, जब दुनिया से रुखसत हुए तो एकाएक उत्तराखंड के वाम-जनवादी परिदृश्य में एक भारी खालीपन पैदा हो गया.
इस रिक्तता को उत्तराखंड के समूचे वाम-जनवादी मानस ने महसूस किया और इसलिए 29 नवंबर 2025 को बिन्दुखत्ता स्थित भाकपा(माले) राज्य कार्यालय में और रानीबाग स्थित विद्युत् शवदाह गृह में अपने इस प्रिय कॉमरेड को नारों और जनगीतों के साथ विदाई देने के लिए वाम-जनवादी आंदोलन के तमाम चेहरे और मेहनत कश जनता के विभिन्न हिस्सों से लोग उमड़ पड़े.
14 दिसंबर 2025 को हल्द्वानी के नगर निगम सभागार में जब कॉमरेड राजा बहुगुणा की स्मृति सभा आयोजित की गयी तो हॉल कॉमरेड राजा बहुगुणा के आन्दोलनों के साथियों और मेहनतकश जनता के विभिन्न हिस्सों की उपस्थिति से खचाच भर गया.
इस स्मृति सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कॉमरेड राजा बहुगुणा उत्तराखंड के जन आंदोलनों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी थे. वे अपने विचारों में अडिग और व्यवहार में अत्यंत विनम्र थे. उन्होंने न केवल कम्युनिस्ट धाराओं के बीच, बल्कि सभी जनपक्षधर विचारधाराओं के बीच एकता और समन्वय स्थापित करने का कार्य किया. वे जनवादी शक्तियों के बीच एक मजबूत “पुल” के रूप में सदैव याद किए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी कॉमरेड राजा लगातार देश के राजनीतिक और सामाजिक हालात पर नजर बनाए हुए थे और साथियों को मार्गदर्शन देते रहे. उत्तराखंड में नशा मुक्ति आंदोलन, चिपको वन आंदोलन तथा राज्य आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका रही.
कॉमरेड दीपंकर ने कहा कि आज जब फासीवादी ताकतों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, ऐसे कठिन समय में कॉमरेड राजा बहुगुणा का जाना आंदोलनकारी शक्तियों के लिए एक बड़ी क्षति है. उन्होंने यह भी कहा कि कॉमरेड राजा द्वारा देखे गए शोषणमुक्त समाज के सपने को साकार करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
राजा बहुगुणा की जीवन साथी रेखा ने उनके बारे में कहा कि उन्होंने मेरी जीवन के प्रति संपूर्ण नजरिए को बदलने का काम किया. हम उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का काम करेंगे.
उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने कहा कि राजा बहुगुणा ने सभी जनवादी ताकतों को एकजुट करने का आह्वान किया था जिस पर आज गंभीरता से विचार करने और अमल करने की जरूरत है. वहीं, भाकपा(माले) की केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड कृष्णा अधिकारी ने कहा कि राजा भाई के नेतृत्व में महतोष मोड़ कांड के खिलाफ चले आंदोलन में वे शामिल रहीं. उन्होंने महिलाओं को सम्मान और गरिमा से जीने के लिए लड़ना सिखाया.
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने ‘नशा नहीं रोजगार दो’ वन आंदोलन के दौरान उनके साथ के दौर को याद किया. साथ ही, आज के फासीवादी दौर में उनके विचारों को अहम बताया.
भाकपा के राज्य सचिव कॉमरेड जगदीश कुलियाल, माकपा के राज्य सचिव कॉमरेड राजेन्द्र पुरोहित, जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जहूर आलम, उत्तरा पत्रिका की संपादक प्रो. उमा भट्ट, जनकवि बल्ली सिंह चीमा, वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता कॉमरेड बहादुर सिंह जंगी, पोलित ब्यूरो सदस्य संजय शर्मा, इतिहासकार प्रो. अजय रावत, एआईपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक गिरिजा पाठक, हाईकोर्ट बार अध्यक्ष दुर्गा सिंह मेहता, अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा, समाजवादी लोकमंच के मुनीश कुमार, पत्रकार-कथाकार नवीन जोशी, साहित्यकार अशोक पांडेय समेत सैकड़ों लोगों ने इस स्मृति सभा में कॉमरेड राजा बहुगुणा को याद किया.
इस स्मृति सभा के अगले दिन भाकपा(माले) की राज्य कमेटी की बैठक पार्टी महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य की मौजूदगी में बिन्दुखत्ता स्थित पार्टी राज्य कार्यालय में हुई.
लेबर कोड्स के खिलाफ व्यापक अभियान की रणनीति पर बैठक में चर्चा हुई. भाजपा के सांप्रदायिक बुलडोजर राज के खिलाफ व्यापक आंदोलन विकसित करने तथा उजाड़े जाने के खिलाफ संघर्षरत तमाम लोगों को एकजुट करने के लिए भी ठोस प्रयास करने को लेकर चर्चा हुई.
इस बैठक में यह भी तय किया गया कि कॉमरेड राजा बहुगुणा स्मृति ग्रन्थ का प्रकाशन किया जाएगा तथा राज्य कार्यालय में कॉमरेड राजा बहुगुणा स्मृति सभागार एवं पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा.