वर्ष 35 / अंक - 31 / मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को टूटने से बचाना होग...

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को टूटने से बचाना होगा

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को टूटने से बचाना होगा

रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने 15 जुलाई 2026 को नोटिस जारी कर मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को 15 दिनों के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया था. प्राधिकरण का आरोप है कि इन इमारतों का निर्माण उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत आवश्यक स्वीकृति के बिना किया गया है. इस आदेश के बाद से छात्रा और कई राजनीतिक-सामाजिक संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

कौन थे मौलाना अली जौहर

जानकारी हो कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर आजादी आंदोलन के मशहूर ‘अली बंधुओं’ में से एक थे. उनकी मां का नाम वैसे तो आबादी बानो बेगम था लेकिन उनको ‘बी अम्मा’ के नाम से सभी पहचानते थे. मोहम्मद अली जौहर पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. उन्होंने प्राइमरी शिक्षा रामपुर में ही हासिल की थी. मैट्रिक की पढ़ाई उन्होंने बरेली के हाईस्कूल में की थी और ग्रेजुएशन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से. बीए में यूनिवर्सिटी में पहला स्थान हासिल करने के बाद सन 1897 में वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे जहां लिंकन काॅलेज से उन्होंने सन 1898 में माॅर्डन हिस्ट्री में एमए की डिग्री हासिल की थी.

सिर्फ मौलाना मोहम्मद अली जौहर और उनके बड़े भाई मौलाना शौकत अली ही स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे बल्कि उनकी मां बी अम्मा भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रही थीं. प्रथम विश्व युद्ध के बाद सन 1919 में तुर्की के खलीफा के समर्थन में और ब्रिटिश सल्तनत के खिलाफ अली बंधुओं ने भारत में खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व किया था.

जनदबाव से बदला फैसला

22 जुलाई को भाकपा(माले) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी काॅमरेड अफरोज आलम और रामपुर के प्रभारी का. रोहिताश राजपूत दो सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पहुंच कर विश्वविद्यालय के भवनों को तोड़ने के आदेश के खिलाफ आन्दोलनरत छात्रों व रामपुर के नागरिकों को अपना समर्थन दिया.

भाकपा(माले) ने जिलाधिकारी, रामपुर के कार्यालय पर प्रदर्शन कर राज्यपाल महोदया को सम्बोधित ज्ञापन रामपुर जिलाधिकारी को दिया था जिसमें रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को तोड़ने के फैसले को तुरंत रद्द करने व विश्वविद्यालय में पढाई के बेहतर इंतजाम करने की मांग की गई है.

इस प्रदर्शन को संबोधित करते हुए काॅमरेड अफरोज आलम ने कहा था कि विश्वविद्यालय के भवनों को तोड़ने का फैसला सिर्फ जौहर विश्वविधालय नहीं, देश की शिक्षा व्यवस्था पर हमला है. भाजपा राज में शिक्षण संस्थानों को बनाने से ज्यादा तोड़ने की राजनीति चल रही है. योगी सरकार में बुलडोजर साम्प्रदायिक राजनीति के औजार के रूप में इस्तेमाल हो रहा है. जरूरत के हिसाब से उच्च शिक्षण संस्थान पहले से ही कम है. अन्य कानूनी विकल्प मौजूद होने के बावजूद उनको प्रयोग में न लाकर सीधे तोड़ने का आदेश देना – एक शिक्षण संस्थान पर नहीं बल्कि पूरे शिक्षा व्यवस्था पर हमला है. किसी संस्थान के साथ अगर किसी मुस्लिम का नाम जुड़ा हो तो उसे ध्वस्त करने की प्रदेश में होड़ मची है. इस आदेश में उस साम्प्रदायिक नजरिये का प्रभाव दिखता है. प्रशासनिक स्तर पर ऐसे नजरियों को जगह नहीं दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से लेकर देश भर में जब छात्रा-नौजवान बेहतर शिक्षा, पारदर्शी परीक्षा-रिजल्ट व रोजगार के लिए लड़ रहे हैं तो दिल्ली में यह तानाशाही सरकार उन पर लाठी चला रही है और रामपुर में छात्रों के विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर रही है. छात्र-युवा व देश की जनता जाग गई है. अगर योगी सरकार यह सोचती है कि रामपुर में विश्वविद्यालय से मुस्लिम नाम जुडाव है इसलिए जनता जौहर विश्वविद्यालय तोड़ने की छूट दे देगी, तो सरकार भूल कर रही है. साम्प्रदायिक एजेंडे और योगी सरकार के शिक्षा से वंचित करने के मंसूबे दोनों को जनता शिकस्त देगी. प्रदर्शन में पार्टी के रामपुर जिला प्रभारी एडवोकेट गिरीश कुमार, अफसर, मनीषा, नौशाद, सुलेमान, बिजरा, आरती, सूफियान भादि शामिल थे.

भारी जनदबाव के बाद रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है. यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी गई है. यह रोक मुरादाबाद मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने लगाई है, जो रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं.

जंतर मंतर आंदोलन के नेताओं का दौरा

इसी क्रम में छात्र नेताओं का एक डेलिगेशन ने जौहर यूनिवर्सिटी का दौरा किया. इसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति तथा महासचिव सुनील, आइसा उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) के साथ आइसा जेएनयू के नेता गुलाम वारिस शामिल रहे. इस डेलिगेशन में भाकपा(माले) के रामपुर जिला प्रभारी एडवोकेट गिरीश कुमार, भाकपा(माले) पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी अफरोज आलम के साथ एडवोकेट नासिर सुल्तान भी मौजूद रहे.

डेलिगेशन ने जौहर विश्वविद्यालय के कैंपस का भ्रमण करते हुए छात्र-छात्राओं से बातचीत की और विश्वविद्यालय के बारे में जाना और वाइस चांसलर डाॅ. जहीरुद्धीन (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष) से भी मुलाकात की. जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलाने के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन देते हुए इस फैसले को रद्द करने तक लड़ाई जारी रखने और सिर्फ अंतरिम स्टे नहीं बल्कि आदेश को पूरी तरह रद्द करने की की मांग करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं तो यहां भी जंतर मंतर जैसा आंदोलन छेड़ा जायेगा. इस दौरान पूर्व मंत्री आजम खान के परिजनों तथा पूर्व सांसद प्रोफेसर डाॅ. तंजीम फातिमा जी से भी मुलाकात की गई.


01 August, 2026