नोएडा, मानेसर, पानीपत, भिवानी, फरीदाबाद के मजदूरों के समर्थन में तथा मजदूर आंदोलन पर बर्बर दमन और आंदोलन को बदनाम करने की सरकार की साजिश के खिलाफ शनिवार (18 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश में विरोध दिवस मनाया गया. एआईसीसीटीयू (ऐक्टू) के आह्वान पर आयोजित राज्यव्यापी विरोध दिवस में भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया.
विरोध दिवस पर जिलों में आयोजित धरना, मार्च व प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे गए. नोएडा में सभी गिरफ्तार मजदूरों, ट्रेड यूनियन नेताओं और मजदूर आंदोलन के बहाने गिरफ्तार बुद्धिजीवियों को रिहा करने की मांग की गई. सरकार से दमन चक्र रोकने, नेताओं के घरों पर छापेमारी-नजरबंदी पर रोक लगाने और मजदूरों की सभी मांगे मान लेने की पुरजोर अपील की गई.
लखनऊ में प्रदर्शनकारी मजदूरों ने ऐक्टू के जिला मंत्री का. कुमार मधुसूदन मगन के नेतृत्व में परिवर्तन चौक पर इकट्टा होकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च किया और राज्यपाल महोदया को संबोधित 5-सूत्रीय मांग पत्र अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) श्री कमलेश कुमार को सौंपा.
सभा को सम्बोधित करते हुए का. कुमार मधुसूदन मगन ने आंदोलनकारियों के ऊपर किए गए दमन की कड़ी आलोचना करते हुए समूची घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने और इसके लिए दोषी अधिकारियों को दंडित करने की मांग की. उन्होंने गिरफ्तार मजदूरों को अविलंब रिहा करने तथा उन्हें 34000 रू. मासिक वेतन देने की मांग की.
प्रदर्शनकारियों में प्रमुख रूप से निर्माण मजदूर यूनियन की जिला अध्यक्ष का. मंजू गौतम, रमेश शर्मा, रामसेवक रावत, सतीश राव, आलम अंसारी, कमलेश गौतम, जगतराम, रामकिशोर रावत, आदि शामिल थे.
गोरखपुर में श्रम विभाग कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के बाद सभा आयोजित कर जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया.
शहरी गरीब मोर्चा के संयोजक दीनदयाल यादव के संचालन में हुई सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के जिला सचिव राकेश सिंह, राज्य कमेटी सदस्य मनोरमा चौहान, ऐक्टू के जिला सह संयोजक विनोद भारद्वाज, आदि वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों के शोषण और श्रम की लूट में सरकार और उसकी मशीनरी लगातार पूंजीपतियों को संरक्षण दे रही है. मजदूरों को संगठन बनाने, शिकायत करने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने तक के अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. मजदूरों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस, पीएसी, आरएएफ और कंपनियों के बाउंसरों द्वारा बर्बर दमन किया गया. हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके.
सभा में शांति यादव (बांसगांव), भाकपा(माले) प्रभारी पीएन सिंह, विजय यादव, जैनुल अंसारी, जयप्रकाश यादव, सुदामा भारती सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
रायबरेली, बनारस, प्रयागराज, कानपुर, मिर्जापुर, जालौन, गोंडा, बिजनौर समेत कई अन्य जिलों में भी विरोध दिवस मनाया गया. भाकपा(माले) और ऐक्टू नेताओं ने कहा कि मजदूरों की हकमारी और भाजपा सरकार की पूंजीपतियों से यारी का पुरजोर विरोध किया जाएगा.
रांची में भी 18 अप्रैल 2026 को ही मजदूरों, कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम एवं पूरे एनसीआर में मजदूर आंदोलनों पर हो रहे दमन के खिलाफ प्रतिवाद मार्च आयोजित किया.
बड़ी संख्या में मजदूर जयपाल सिंह स्टेडियम के समीप एकत्रित हुए, जहां से एक जुलूस अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाला गया. जुलूस के दौरान “दमन बंद करो”, “लेबर कोड वापस लो”, “मजदूर एकता जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. अल्बर्ट एक्का चौक पर मजदूर नेता अजय सिंह की अध्यक्षता में हुई सभा को एआईसीसीटीयू के शुभेंदु सेन, ऐटक के पंकज कुमार और सरिता देवी, किसान सभा के महेंद्र पाठक, अराज. कर्मचारी महासंघ के गोपाल शरण सिंह, बेफ केएमएल सिंह तथा सीटू के भवन सिंह तथा प्रतीक मिश्रा ने संबोधित किया.
दिल्ली के जंतर मंतर पर 24 अप्रैल 2026 को हुए संयुक्त विरोध प्रदर्शन में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से मजदूरों, छात्रों और दिल्ली के नागरिकों ने भागदारी की.
विरोध प्रदर्शन को सबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि शर्मनाक है कि बढ़ती महंगाई और कम मजदूरी के मारे मजदूर जब अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरे, तो उन पर जबर्दस्त पुलिस दमन हुआ. कई मजदूरों पर फर्जी मुकदमें लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया गया है. कई मजदूर लापता हो गए हैं जिनकी तलाश और बेल के लिए परिजन भटक रहे हैं. वेतन मांगने पर भाजपा सरकार अपने के देश के मजदूरों को पाकिस्तानी और देशद्रोही बता रही है. मजदूर मात्र सात से आठ हजार रुपए में 10 से 12 घंटे काम करने को मजबूर हैं. श्रम कोड लागू होने के बाद मजदूरों की हालत और अधिक खराब होने वाली है.
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है :
1. सभी मजदूरों को बेशर्त रिहा किया जाए. फर्जी मुकदमें खत्म किए जाए.
2. आठ घंटे काम और 26,000 रू. न्यूनतम वेतन लागू किया जाए.
3. श्रम कोड को तत्काल वापस लिया जाए.
4. महंगाई पर रोक लगाई जाए.
5. मजदूर अधिकारों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों का लाइसेंस रद्द किया जाए.
भाकपा(माले) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव सुधाकर यादव ने लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार व बुद्धिजीवी सत्यम वर्मा को गिरफ्तार करने और उनके घर की तलाशी लेकर निजी सामान (नोटबुक, डायरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि) जब्त करने की कड़ी निंदा की है. जानकारी के अनुसार उन्हें शुक्रवार रात को गिरफ्तार किया गया. पार्टी ने उनकी खोजखबर न मिलने पर चिंता जताते हुए उनकी अविलंब बिना शर्त रिहाई की मांग की है.
उन्होंने प्रयागराज के फूलपुर में भाकपा(माले) व ऐक्टू नेता देवानंद के घर पर पुलिस भेजने, मुरादाबाद में रोहिताश राजपूत को नजरबंद करने और सरकार द्वारा मजदूर आंदोलन को फैलने से रोकने के लिए प्रदेश में भय व पुलिसिया आतंक का माहौल बनाने की भर्त्सना की है.