वर्ष 34 / अंक-35 / मनरेगा को समाप्त करने के खिलाफ देशव्यापी रोष प्रदर...

मनरेगा को समाप्त करने के खिलाफ देशव्यापी रोष प्रदर्शन

मनरेगा को समाप्त करने के खिलाफ देशव्यापी रोष प्रदर्शन

उत्तरप्रदेश : वामदल सड़क पर उतरे

प्रयागराज में 22 दिसम्बर 2025 को अपने अखिल भारतीय आह्वान के तहत वामदलों – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के बैनर तले मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 (वीबी - जी राम जी बिल) लाने के खिलाफ जिला कचहरी में प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन एडीएम सिटी को सौंपा. प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी के गेट पर एकत्र होकर नारे लगाते हुए एडीएम सिटी के कार्यालय तक आये तथा वहां सभा की.

सभा की अध्यक्षता भाकपा जिला सचिव नसीम अंसारी तथा संचालन माकपा जिला सचिव अखिल विकल्प ने किया. सभा को मुख्य रूप से भाकपा के आनन्द मालवीय, माकपा राज्य सचिव रवि मिश्रा तथा भाकपा(माले) के जिला सचिव सुनील मौर्या ने सम्बोधित किया.

वाराणसी में जिला मुख्यालय मुख्यालय (शास्त्री घाट) वाराणसी में भाकपा(माले), भाकपा, माकपा व फारवर्ड ब्लाक ने कॉ. रमा उदल की अध्यक्षता व कॉ. मिठाई लाल के संचालन में प्रदर्शन किया. प्रदर्शन को माकपा के केन्द्रीय कमेटी सदस्य हीरालाल यादव, भाकपा जिला सचिव लाल बहादुर सिंह व भाकपा(माले) के जिला सचिव अमरनाथ प्रसाद के साथ ही ऐटक, सीटू  खेत मजदूर यूनियन, बुनकर संघ व किसान सभा के नेताओं ने संबोधित किया.

लखनऊ में भी वाम दलों का संयुक्त विरोध प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के लखनऊ जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि मनरेगा कोई खैरात नहीं, बल्कि ग्रामीण मेहनतकशों का कानूनी अधिकार है. इसे खत्म कर नया कानून लाना करोड़ों ग्रामीण परिवारों को बेरोजगारी, भुखमरी और पलायन की ओर धकेलने की साजिश है.

प्रदर्शन को भाकपा के राज्य सचिव अविंद्य राज स्वरूप, माकपा जिला सचिव मंडल सदस्य प्रवीण सिंह, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उदय नाथ सिंह ने भी संबोधित किया.प्रदर्शन में मजदूर, महिला, छात्र और युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी की.

प्रदर्शनकारी दलों और संगठनों ने संयुक्त रूप से मांग की कि मनरेगा को समाप्त करने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए, नए ग्रामीण रोजगार कानून को रद्द किया जाए, और मनरेगा को मजबूत करते हुए कार्यदिवस बढ़ाए जाएं, मजदूरी दर में वृद्धि की जाए तथा समय पर भुगतान की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए. वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह जनविरोधी कदम वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक व तेज किया जाएगा.

चंदौली वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने चंदौली स्थित बिछिया धरना स्थल से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च कर राष्ट्रपति महोदया को संबोधित तीन सूत्रीय ज्ञापन सौंपा और सभा आयोजित की.

कार्यक्रम का नेतृत्व भाकपा(माले) जिला कमेटी सदस्य श्रवण मौर्य और माकपा नेता गुलाबचंद ने किया. मार्च तथा प्रदर्शन में सैकड़ो वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

कानपुर में संयुक्त वामपंथी मोर्चा कानपुर के बैनर तले मनरेगा कानून और महात्मा गांधी राष्ट्रपिता का नाम हटाने, गुलामी का दस्तावेज चार श्रमिक कोड लाने व 4 श्रम कानूनों को खत्म करने के खिलाफ कॉ. रामाआसरे पार्क, बड़ा चौराहा पर प्रदर्शन किया.

बलिया, गाजीपुर, जालौन, मिर्जापुर आदि समेत राज्य के अन्य जिला व तहसील मुख्यालयों पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित कर ज्ञापन सौंपा गया.

झारखंड : राजधानी रांची में भी विरोध प्रदर्शन

वाम दलों के पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर वामपंथी दलों, शोधकर्ताओं और मजदूर संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नया विधेयक मांग-आधारित रोजगार के अधिकार को खत्म कर, बजट-सीमित और आपूर्ति-आधारित योजना थोपता है. इससे ग्रामीण मजदूरों की काम की गारंटी समाप्त होगी, राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और ग्राम सभाओं की भूमिका कमजोर होगी. इस प्रदर्शन में झारखंड जनाधिकार महासभा, नरेगा वॉच, नरेगा संघर्ष मोर्चा, आइसा आदि संगठन के कार्यकर्ता मौजूद थे.

धनबाद में भाकपा(माले) धनबाद जिला कमिटी की और से जिला मुख्यालय रणधीर वर्मा चौक में जोरदार प्रदर्शन किया गया. सभा आयोजित कर वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मजदूर वर्ग पर हमला कर रही है. मजदूर अधिकारों को कमजोर करने और श्रम को गुलामी की ओर धकेलने का काम कर रही है. अडानी-अंबानी जैसे कॉर्पारेट घरानों को सस्ता श्रम उपलब्ध कराना ही सरकार का मकसद रह गया है. कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकपा(माले) जिला सचिव बिंदा पासवान ने की.

कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता हरि प्रसाद पप्पू, राज्य स्थाई समिति सदस्य कार्तिक प्रसाद, जिला सदस्य सुभाष चटर्जी, नकुलदेव सिंह, नमिता महतो, सरोज देवी आदि समेत दर्जनों लोग मौजूद थे.

बेरमो के जारंगडीह में वामदलों के द्वारा विरोध मार्च निकाल कर प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया गया.

बिहार :  खेग्रामस का राज्यव्यापी प्रदर्शन

मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म कर उसकी जगह ग्रामजी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण) कानून को रद्द करने, मनरेगा की पुनर्बहाली, ग्रामीण गरीबों के रोजगार अधिकार की रक्षा तथा बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक की मांग को लेकर खेग्रामस के बैनर तले पूरे बिहार में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया.

राजधानी पटना में स्टेशन गोलंबर के पास जोरदार प्रदर्शन हुआ, जिसमें खेग्रामस के महासचिव धीरेंद्र झा, अध्यक्ष सत्यदेव राम, विधान परिषद सदस्य शशि यादव, पूर्व विधायक गोपाल रविदास, शत्रुघ्न साहनी, अकलू पासवान, जितेंद्र कुमार, केडी यादव, उमेश सिंह, आर एन ठाकुर, वंदना प्रभा, सत्यनारायण प्रसाद, नागेश्वर पासवान, मुर्तजा अली, प्रमोद यादव सहित बड़ी संख्या में मजदूर, किसान, ग्रामीण गरीब और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मनरेगा देश का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून रहा है, जिसने करोड़ों गरीब परिवारों को न्यूनतम रोजगार और आजीविका की सुरक्षा दी, लेकिन मोदी सरकार की नीतियों के कारण यह कानून पहले ही कई राज्यों में लगभग निष्क्रिय कर दिया गया था. अब ग्रामजी जैसे नए कानून के जरिए मनरेगा को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की गई है, जो मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है.

प्रदर्शन में यह भी मांग उठाई गई कि गरीबों और मजदूरों पर चल रहे बुलडोजर को तुरंत रोका जाए, क्योंकि यह संविधान, कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ है. वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर सरकार गरीबों के रोजगार व आवास दोनों पर हमला कर रही है..

अरवल में खेग्रामस, किसान महासभा, भाकपा(माले) व भाकपा नेताओं की अगुआई में प्रतिरोध मार्च निकला. मार्च का नेतृत्व भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता अरवल के पूर्व विधायक महानंद सिंह, भाकपा(माले) जिला सचिव जितेंद्र यादव, भाकपा नेता दीनानाथ सिंह, भाकपा ;मालेद्ध राज्य कमेटी सदस्य रविन्द्र यादव, माले नगर सचिव नंदकिशोर ठाकुर, खेग्रामस नेता उपेंद्र पासवान ने किया.

खभैनी पंचायत के पूर्व मुखिया विजय पासवान, ऐपवा नेत्री लीला वर्मा, इंनौस के नेता नीतीश कुमार व किसान महासभा के नेता रामकुमार वर्मा भी मार्च में शामिल थे.

मार्च के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए का. महानंद सिंह ने कहा कि आज भाजपा सरकार देश के गरीबों को बेरोजगार करने के लिए  ही यह कानून लाई है. उन्होंने कहा कि बिहार में सरकार बनते ही गरीबों पर बुलडोजर चलने लगा. गरीबों को उजाड़ा जा रहा है और सरकार के मुखिया चुप है. इसलिए गरीब आज बोल रहे हैं कि उनके साथ धोखा हुआ है. इस सरकार में कोई सुरक्षित नहीं है. अरवल में आंगनवाड़ी रसोइया को बलात्कार कर हत्या कर दी गई. अभी तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. बिहार में लगातार अपराध बढ़ रहा है लेकिन सरकार अपराधियों पर करवाई करने के बजाय गरीबों पर बुलडोजर चला रही है. सभा की अध्यक्षता कॉ. उपेंद्र पासवान ने की.

सहरसा में भाकपा(माले) और खेग्रामस के कार्यकर्त्ताओं ने बिस्कोमान भवन से आक्रोश मार्च निकाला जिसका नेतृत्व भाकपा(माले) जिला सचिव ललन यादव, खेग्रामस राष्ट्रीय पार्षद विक्की राम, भाकपा(माले) के युवा नेता कुंदन यादव, भाकपा(माले) नगर सचिव वकील कुमार यादव और ऐक्टू के जिला सचिव मुकेश कुमार आदि नेताओं ने किया.

सुपौल में खेग्रामस व भाकपा(माले) के आ“वान पर जिला पदाधिकारी के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर मजदूर-किसान विरोधी वीबी-जी राम जी कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की गई. सैकड़ों खेत और ग्रामीण मजदूरों ने कहा कि यह कानून गरीबों से रोजगार छीनने और कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने की साजिश है.

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) जिला सचिव जयनारायण यादव, खेग्रामस जिला अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, अच्छे लाल मेहता, अनिल कुमार यादव, डा. अमित चौधरी व जनमेजय राय आदि नेताओं ने कहा कि यह कानून गरीब-विरोधी और संविधान-विरोधी है और अगर सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो खेत-ग्रामीण मजदूर अपने हक के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करेंगे. धरना के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी को मांग-पत्र सौंपा.

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मानसा : वामपंथी दलों, शोधकर्ताओं और मजदूर संगठनों का प्रदर्शन 

मोदी सरकार द्वारा पिछले बीस साल से चल रही मनरेगा स्कीम का खात्मा करने के लिए बनाए नये कानून का विरोध करते हुए वाम दलों के देशव्यापी विरोध के आह्वान का पालन करते हुए भाकपा(माले) (लिबरेशन) व भाकपा ने संयुक्त रोष रैली निकाल कर नए कानून को वापस लेने की मांग करते हुए लेबर चौंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका.

सभा को लिबरेशन की सूबाई नेत्री जसबीर कौर नत्त, भाकपा के जिला सचिव कृष्ण चौहान, ऐटक के बूटा सिंह बरनाला, मजदूर मुक्ति मोर्चा लिबरेशन के जिला अध्यक्ष बलविंदर सिंह घरांगणा, ऐपवा की नेशनल कोंसिलर बलविंदर कौर खारा और ऊसारी मिस्त्री मजदूर यूनियन के सुखदेव सिंह ने कहा कि संसद के अभी खत्म हुए सेशन में मोदी सरकार द्वारा मनरेगा कानून का गला घोंटकर ‘जी राम जी’ नाम का जो नया कानून बनाया है, वह मजदूरों के रोजगार हासिल करने के मूलभूत संवैधानिक हक पर सीधा हमला है.  इस मौके पर अंग्रेज सिंह घरांगणा, बलवंत सिंह फक्कर, गुरप्रीत सिंह कोट लल्लू, बलवंत सिंह भैणी बाघा और किसान आगू गुरप्रणाम दास भी मौजूद थे.

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27 December, 2025