ईरान युद्ध को लेकर गुस्सा, अमेरिका भर में ट्रंप विरोधी ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शनों को और भड़का रहा है.
आयोजकों का कहना है कि सभी 50 राज्यों में 3,100 से ज्यादा कार्यक्रम रजिस्टर किए गए हैं. ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शनों का निशाना ईरान पर युद्ध और ट्रंप के काम हैं.
शनिवार को अमेरिका और दुनिया भर में ट्रंप प्रशासन के कामों के खिलाफ चल रहे ताजा ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शनों के तहत रैलियां निकाली जा रही हैं. आयोजकों ने बताया कि सभी 50 राज्यों में कार्यक्रम रजिस्टर किए गए हैं, और लाखें लोगों के इन रैलियों में शामिल होने की उम्मीद है. इन लोगों की शिकायतों की एक लंबी सूची है, जिसमें ईरान युद्ध और सरकार द्वारा इमिग्रेशन कानूनों को सख्ती से लागू करना शामिल है.
अमेरिका भर में शनिवार को होने वाली ‘नो किंग्स’ रैलियों के आयोजकों का अनुमान है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के कामों के खिलाफ ये विरोध प्रदर्शन अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बन सकते हैं, जिसमें मिनेसोटा मुख्य केंद्र रहेगा.
आयोजकों का कहना है कि सभी 50 राज्यों में 3,100 से ज्यादा कार्यक्रम रजिस्टर किए गए हैं, और नौ मिलियन से ज्यादा लोगों के इनमें हिस्सा लेने की उम्मीद है.
वॉशिंगटन, डीसी में, सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर निकले. वे लिंकन मेमोरियल से होते हुए नेशनल मॉल तक पहुंचे. उनके हाथों में ऐसे बैनर थे जिन पर लिखा था, ‘ताज उतारो, जोकर’ और ‘सत्ता में बदलाव की शुरुआत घर से होती है.’ प्रदर्शनकारियों ने घंटियां बजाईं, ढोल पीटे और ‘नो किंग्स’ के नारे लगाए.
ट्रंप प्रशासन द्वारा इमिग्रेशन कानूनों को सख्ती से लागू करने के काम, खासकर मिनेसोटा में, प्रदर्शनकारियों की शिकायतों की लंबी सूची में से सिर्फ एक मुद्दा थे. इस सूची में ईरान युद्ध और सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर अधिकारों को कम करना भी शामिल था.
न्यूयॉर्क शहर में, न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज यूनियन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डोना लिबरमैन ने ट्रंप को देश का ‘सबसे बड़ा दादा’ (Bully in Chief) बताया. उन्होंने कहा कि मिनियापोलिस के लोगों ने ‘राजा बनने का सपना देखने वाले इस व्यक्ति को अपनी फौज वापस बुलाने पर मजबूर कर दिया.’ ऊपर से ली गई एक तस्वीर में प्रदर्शनकारी शहर की एक सड़क पर मार्च करते हुए दिखाई दे रहे हैं.
‘वे चाहते हैं कि हम सब विरोध करने से डरें,’ लिबरमैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा.
‘वे चाहते हैं कि हम इस बात से डरें कि उन्हें रोकने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते. लेकिन आपको पता है? वे गलत हैं – पूरी तरह से गलत.’
रिपब्लिकन ने ‘अमेरिका-विरोधी रैलियों’ का मजाक उड़ाया. व्हाइट हाउस ने इन रैलियों को खारिज कर दिया. प्रवक्ता अबीगैल जैक्सन ने इन विरोध प्रदर्शनों को ‘वामपंथी फंडिंग नेटवर्क’ का नतीजा बताया, जिन्हें जनता का बहुत कम असली समर्थन हासिल है. ’नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी ने भी इसकी कड़ी आलोचना की. कमेटी की प्रवक्ता मौरीन ओश्टूल ने कहा, ‘ये ‘अमेरिका-विरोधी रैलियां’ ही वह जगह हैं, जहां अति-वामपंथियों की सबसे हिंसक और पागलपन भरी कल्पनाओं को आवाज मिलती है.
मिनेसोटा कैपिटल में मुख्य कार्यक्रम
आयोजकों ने सेंट पॉल में मिनेसोटा कैपिटल में होने वाली रैली को राष्ट्रीय मुख्य कार्यक्रम घोषित किया है. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह वह राज्य है जहां फेडरल एजेंटों ने दो लोगों को गोली मारकर मार डाला था; ये लोग ट्रंप की इमिग्रेशन पर सख्ती की निगरानी कर रहे थे. यह राज्य अब विरोध का एक मुख्य केंद्र बन गया है.
इस कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण ब्रुस स्प्रिंगस्टीन होंगे, जो ‘Streets of Minneapolis’ गाना गाएंगे. यह गाना उन्होंने जनवरी में फेडरल एजेंटों द्वारा रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना के जवाब में लिखा था, और उन हजारों मिनेसोटावासियों को श्रद्धांजलि देने के लिए लिखा था जो सर्दियों के मौसम में सड़कों पर उतरे थे. स्प्रिंगस्टीन का Land of Hope & Dreams अमेरिकन टूर, जिसका विषय “No Kings” (कोई राजा नहीं) है, मंगलवार को मिनियापोलिस में शुरू होगा.
मिनेसोटा ने रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की हत्याओं से जुड़े सबूतों तक पहुंच के लिए ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा किया. मिनेसोटा के आयोजकों ने राज्य के अधिकारियों को बताया है कि उन्हें उम्मीद है कि कैपिटल परिसर में 100,000 लोग इकट्ठा हो सकते हैं; पिछले जून में हुए ऐसे ही एक कार्यक्रम में अनुमानित 80,000 लोग आए थे.
सेंट पॉल की इस रैली में गायिका जोन बेज, अभिनेत्री जेन फोंडा, सीनेटर बर्नी सैंडर्स और कई अन्य कार्यकर्ता, मजदूर नेता और चुने हुए अधिकारी भी शामिल होंगे.
दुनिया भर में भी रैलियों की योजना
‘इंडिविजिबल’ नामक समूह के सह-कार्यकारी निदेशक एजरा लेविन ने एक इंटरव्यू में बताया कि यूरोप से लेकर लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक, एक दर्जन से ज्यादा अन्य देशों में भी रैलियों की योजना बनाई गई है. यह समूह इन कार्यक्रमों का नेतृत्व कर रहा है. उन्होंने कहा कि जिन देशों में संवैधानिक राजशाही है, वहां इन विरोध प्रदर्शनों को “No Tyrants” (कोई तानाशाह नहीं) नाम दिया गया है.
जो लोग व्यक्तिगत रूप से इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकते, उनके लिए एक अन्य कार्यकर्ता समूह ‘स्टैंड अप फॉर साईंस’ ऑनलाइन एक ‘आभासी और सुलभ’ कार्यक्रम आयोजित कर रहा है.
टोरंटो में अमेरिकी दूतावास के बाहर ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल हुए.
पेरिस में, शनिवार की सुबह सैकड़ों लोग – जिनमें ज्यादातर फ्रांस में रहने वाले अमेरिकी थे, साथ ही फ्रांसिसी मजदूर संघ और मानवाधिकार संगठन भी शामिल थे – बैस्टिल में इकट्ठा हुए. 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान, भीड़ ने बैस्टिल पर ही धावा बोला था.
एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ का वेश धारण किए हुए एक व्यक्ति पोज दे रहा है. शनिवार को पेरिस में ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शन में ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ के रूप में सजी एक प्रदर्शनकारी ने हिस्सा लिया. (ऑरेलियन मोरिसार्ड/द एसोसिएटेड प्रेस)
पेरिस में ‘नो किंग्स’ की आयोजक एडा शेन ने कहा, ‘मैं ट्रंप के सभी गैर-कानूनी, अनैतिक, लापरवाह और बेकार, कभी न खत्म होने वाले युद्धों का विरोध करती हूं.’
रोम में, हजारों लोगों ने प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के खिलाफ नारे लगाते हुए मार्च किया. उनकी दक्षिणपंथी सरकार का इटली की न्यायपालिका को सुव्यवस्थित करने के लिए किया गया जनमत संग्रह इस हफ्ते की शुरुआत में बुरी तरह विफल हो गया था, क्योंकि इसकी आलोचना हो रही थी कि यह अदालतों की स्वतंत्रता के लिए खतरा है. प्रदर्शनकारियों ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों का विरोध करते हुए बैनर लहराए और ‘युद्धों से मुक्त दुनिया’ की मांग की.
लंदन में, ईरान में युद्ध का विरोध कर रहे लोगों ने ऐसे बैनर पकड़े हुए थे जिन पर लिखा था, ‘अति-दक्षिणपंथ को रोको’ और ‘नस्लवाद के खिलाफ खड़े हो.’
अमेरिका के आयोजकों ने गुरुवार को एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेेंस में पत्रकारों को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि शनिवार का विरोध प्रदर्शन ‘नो किंग्स’ रैलियों के पहले दो दौरों से भी बड़ा होगा. उनके अनुमान के मुताबिक, पिछले जून में इन रैलियों में 50 लाख से ज्यादा लोग और अक्टूबर में 70 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे.
‘इंडिविजिबल’ की दूसरी सह-कार्यकारी निदेशक लेह ग्रीनबर्ग ने बताया कि दो-तिहाई लोगों ने बड़े शहरी केंद्रों के बाहर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. उन्होंने इडाहो, व्योमिंग, मोंटाना, यूटा, साउथ डकोटा और लुइसियाना जैसे रूढ़िवादी झुकाव वाले राज्यों में, साथ ही पेंसिल्वेनिया, जॉर्जिया और एरिजोना के प्रतिस्पर्धी उपनगरीय इलाकों में पंजीकरण में हुई भारी वृद्धि का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, ‘इस प्रशासन के काम न सिर्फ डेमोक्रेटिक मतदाताओं या बड़े ‘ब्लू’ (डेमोक्रेटिक) शहरी केंद्रों में रहने वाले लोगों को नाराज कर रहे हैं’, बल्कि वे ‘रेड’ (रिपब्लिकन) और ग्रामीण इलाकों में, उपनगरों में, और पूरे देश में रहने वाले लोगों के लिए भी सारी हदें पार कर रहे हैं.