वर्ष 34 / अंक-28 / पीरपैंती (भागलपुर) में एनटीपीसी का भूमि अधिग्रहण अ...

पीरपैंती (भागलपुर) में एनटीपीसी का भूमि अधिग्रहण अभियान : डबल इंजन के राज में सबकुछ अडानी का

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[ 18 सितंबर 2025 को भाकपा(माले) के एक उच्चस्तरीय जांच दल ने, जिसमें आरा सांसद और अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय संगठन सचिव का. सुदामा प्रसाद, घोषी के विधायक और अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य का. रामबली सिंह यादव, अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह राज्य सहसचिव का. राजेंद्र पटेल, अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का. शिवसागर शर्मा, भाकपा(माले) के भागलपुर जिला सचिव का. महेश यादव, अखिल भारतीय किसान महासभा के भागलपुर जिला संयोजक का. रणधीर यादव, भाकपा(माले) के राज्य कमेटी सदस्य का. विंदेश्वरी मंडल, अखिल भारतीय किसान महासभा के बांका जिला संयोजक का. रणवीर कुशवाहा और बांका के किसान नेता संजीव कुमार शामिल थे, पीरपैंती (भागलपुर) का दौरा किया. वहां किसानों की खेती की जमीन व बाग-बगीचों को नेशनल थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर जबरन अधिग्रहित किया गया है. यहां प्रस्तुत है उस जांच दल की रिपोर्ट ]

पीरपैंती, भागलपुर में भाजपा-जदयू की डबल ईंजन सरकार ने पावर प्लांट लगाने के लिए 1 रूपये प्रति एकड़ की दर से 1050 एकड़ जमीन को अगले 33 वर्षा के लिए अडानी को दे दिया है. यह जमीन नगर पंचायत, पीरपैती से बिल्कुल सटी हुई है.

इस जमीन पर 10 लाख से अधिक पेड़ हैं. ये पेड़ आम, अमरुद, लीची, शीशम, महोगनी, सखुआ तथा सागवान आदि के हैं. इसके बाद जो जमीन शेष है, उसमें ईख की फसल लगी हुई है.

ये जमीन 7 पंचायतों के अंतर्गत 76 गांव टोलों के करीब 1200 किसानों की है. इनमें बड़ी जोतवाले कुछ किसान भी हैं, लेकिन बड़ी संख्या छोटी जोतवाले गरीब किसानों की  हैं. जो पिछड़ा (यादव जाति), दलित, आदिवासी व मुस्लिम समुदाय से आते हैं.

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर 2025 को पूर्णिया से रिमोट के जरिये इस पावर प्लांट का शिलान्यास किया. स्थानीय भाजपा विधायक ललन पासवान ने पीरपैंती में बने उद्घाटन मंच से धमकी देते हुए किसानों से जमीन खाली करने को कहा और साथ ही उन्होंने इस योजना में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने का लालच भी दिया. विदित हो कि ये वही ललन पासवान हैं जो विधायक बनने से पहले जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा (जन चेतना समिति) के कार्यक्रमों मे शामिल होकर किसानों के पक्ष में भाषण दिया करते थे.

शिलान्यास के वक्त भी सरकार को किसानों के विरोध का अंदेशा था. इसलिए दो दिन पहले उज्जवला गांव निवासी दीपक सिंह (मुखिया, हरिनकोल पंचायत) को एक फर्जी मुकदमें में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. जिला प्रशासन और भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं ने गांवो में घूम-घूम कर ऐसा माहौल बनाया और लोगों को यह धमकी भी दी कि इन बगीचों अथवा जमीन के इर्द-गिर्द भी अगर कोई बाहरी व्यक्ति दिखा तो उसको भी जेल भेज दिया जायेगा. ऐसा ही धमकी भरा प्रचार कुछ पत्रकारों द्वारा भी किया गया.

इसतरह, आतंक का जो माहौल बना उसकी एक झलक जांच दल को भी देखने को मिली. जांच दल जब पीरपैंती पहुंचा तो नगर पंचायत में मकान बनाकर रह रहे शत्रुघन यादव के मकान में बैठने को जगह मिली. उन्होंने जांच दल के लिए चाय-पानी का भी इंतजाम किया. आसपास के आसपास के कुछ पत्रकार भी आ पहुंचे. लेकिन जब 1 किलोमीटर बाईं तरफ, अधिगृहित की गई जमीन के बगल में ही अवस्थित पंचायत भवन में आयोजित बैठक में जब चलने को कहा गया, तो शत्रुघन यादव ने भी इंकार कर दिया जबकि शत्रुघन यादव की जमीन भी अधिग्रहण में है. इतना ही नही, पंचायत भवन में 11 बजे से बैठक रखी गई है यह प्रचारित था लेकिन जांच दल जब पंचायत भवन पहुंचा तो उसका दरवाजा बंद मिला. वहां यत्र-तत्र बैठी कुछ महिलाओं के आलावा कोई भी नहीं था. यह पता चला कि भाजपा समर्थकों द्वारा, जिनमें कुछ पत्रकार भी शामिल थे, वहां लोगों के बीच जाकर यह प्रचार किया था कि जांच दल के रूप में जो लोग आये हैं, वे सभी नक्सली पार्टी के हैं. जो कोई उस बैठक में जायेगा वह संकट में फंस जायेगा. काफी मशक्कत के बाद यादव जाति और मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग वहां जुटे और तब जाकर बातचीत हो पायी.

इस दौरान यह पता चला कि धनी किसान जिनमें से अधिकांश राजपूत जाति से आते हैं और जिन्होंने भोजपुर व बक्सर जिलों से यहां आकर जैसे-तैसे जमीन अर्जित की है और उनकी जमीन भी अडानी को दे दी गयी है, वे पूरी तरह से अडानी के पक्ष में हैं. वे सभी ठेकेदारी करते हैं और हाइवा आदि चलवाते हैं. उन्हें खुशी भी है कि इसमें उनकी ठेकेदारी चलेगी. इसका एकमात्र अपवाद हैं कांग्रेस के पीरपैंती प्रखंड अध्यक्ष राजेश तिवारी जिनके परिवार की 30 एकड़ जमीन अधिग्रहण में गई है.

गौरतलब है कि राज्य की नीतीश-भाजपा सरकार ने पिछले दिनों 10 डिसमिल जमीन की अनुपलब्धता बताकर राज्य स्तर पर 2600 प्राथमिक विद्यालयों को, जिनमें से ज्यादातर गरीब-दलित टोलों में अवस्थित थे, दूसरे विद्यालयों में मर्ज कर दिया. उसीतरह से सरकार ने पंचायत स्तर पर निर्मित होनेवालों हजारों उप स्वास्थ्य केंद्रों के भवन निर्माण को जमीन का अभाव बता कर टाल दिया. सभी आवास हीन गरीबों को तीन डिसमिल जमीन देने का जो सरकारी वादा था, उसे भी जमीन नहीं होने का बहाना बनाकर पूरा नहीं किया गया. लेकिन अडानी को 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर 1050 एकड़ जमीन दे दी गई.

यह भी जानकारी हो कि स्कुलों और अस्पतालों को बनाने के लिए सरकार द्वारा जमीन खरीदने का कोई प्रावधान नहीं है – इनका निर्माण सरकारी जमीन या दान में मिली जमीन पर ही करने का प्रावधान है. जिन गांव-टोलों के 2600 विद्यालयों को खत्म किया गया है, उन टोलों के लोग भी वास-आवास हेतु 3 डिसमिल जमीन के लिए प्रखंड मुख्यालयों पर धरना देते रहे हैं. वे भला जमीन कहां से दान करते? बिहार विधान सभा में भाकपा(माले) विधायकों ने इस सवाल को कई-कई बार उठाया भी है कि अन्य  विकास कार्या की तरह स्कूलों और अस्पतालों के लिए भी जमीन अधिग्रहन का प्रावधन बनाया जाये. भाकपा(माले) विधायक दल के उप नेता का. सत्यदेव राम द्वारा गरीबों को जमीन देने की मांग से संबंधित सवाल को विधानसभा में उठाये जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक ने यह जवाब दिया था कि जमीन नहीं है. भाकपा(माले) विधायक का. रामबली सिंह यादव ने भी जब स्कूलों और अस्पतालों के लिए जमीन देने का सवाल उठाया तो यही जवाब मिला.

पीरपैती के किसानों की चिंतायें और मांगें 

1. सरकारी उपक्रम NTPC के नाम पर सरकार ने इस जमीन को 2014 में अधिगृहित किया था जिसके लिए जमीन के प्रकार का आकलन करते हुए मुआवजे का भुगतान किया जाना था. इसी क्रम में मौखिक रूप से कहा गया था कि काम शुरू होने से पहले पेड़ों की गणना और उनकी कीमत का आकलन कर मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जायेगा. आम के एक पेड़ की कीमत (उसकी आयु 50 वर्ष की मान कर) 12 लाख रूपये निर्धारित की गई थी. इसी प्रकार अन्य वृक्षों के लिए भी मुआवजे की राशि तय करने की बात थी. किसानों को यह हसीन सपना दिखाया गया था कि इस राशि के जरिये वे अपना उद्यम खड़ा कर सकें, इसकी भी पूरी व्यवस्था की जाएगी. साथ ही, यह भी कहा गया कि जब यह सरकारी उपक्रम खड़ा हो जायेगा तो उनको या उनके बच्चों को पक्की सरकारी नौकरी मिल जाएगी. इसके अलावे सभी घरों को मुफ्त बिजली भी मिलेगी.

2. कहा तो यह भी गया था कि कहलगांव थर्मल पावर प्रोजेक्ट से होनेवाले पर्यावरण के नुकसान से सबक लेते हुए  यहां प्रदूषण नियंत्रण की चौकस व्यवस्था की जाएगी. यह सर्वविदित है कि कहलगांव एनटीपीसी का उस क्षेत्र के पर्यावरण पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है. वहां 12 किमी के दायरे में लोग अपने घर की छत पर नहीं सो पाते. खुले मे कपड़ा सुखाने पर वह काला पड़ जाता है. फसलों पर भी राख की काली परत जम जाती है.

3. लोगों से यह भी वादा किया गया था कि मुआवजे में जो विसंगतियां हैं, उनको दूर कर लिया जायेगा तथा जमीन का दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं करा पाने कि वजह से जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला, उनको भी मुआवजा दिया जायेगा. लेकिन आज सच्चाई यह है कि मुआवजे का बकाया लेने और उसकी विसंगतियों को दूर करवाने के लिए किसानों को विगत 11 वर्षा से जिला व अनुमंडल कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है. बाबुओं को चढ़ावा चढ़ाते लोग तबाह हैं और यह मामला अभी तक हल नहीं हुआ है.

4. अबतक तो लोगों को इसी बात का सुकून था कि जमीन उनके कब्जे में थी. लेकिन शिलान्यास होने के बाद से उन सबको जमीन को पूरी तरह से खाली कर देने की नोटिस मिलने लगी है. इन नोटिसों में उन जमीनों को, जिनमें बाग-बगीचे व पेड़ हैं, भीठ (बंजर) के बतौर दर्ज किया गया है. कई गांवों में ऐसी नोटिसें भेजी गई हैं. कमालपुर गांव को तो, जहां यादव जाति के लोगों के 50 घर बसे हुए हैं, कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया है. एक ग्रामीण वकील यादव को घर खाली करने को कहा गया है. इस घर में 14 कमरे हैं लेकिन उसका मुआवजा केवल जमीन के आधार पर तय किया गया है, और वह भी 40 हजार रूपये प्रति डिसमिल के दर से.

5. पेड़ों के कटने से पर्यावरण को होनेवाला नुकसान भी यहां लोगों की चिंता का सबब बना हुआ है.

6. किसानों की एक बड़ी चिंता यह भी है कि शिलान्यास हो जाने के बाद से यह जमीन जब अडानी की हो गई तो  सरकार के साथ हुई मौखिक वार्ताओं और आश्वासनों का क्या होगा? अब तो अडानी समूह यह कहते हुए जबरन जमीन हथिया लेगा कि मुआवजे का मामला किसान अपनी सरकार से समझें. वहीं दूसरी तरफ सरकार कहेगी कि यह मामला अडानी समूह के जरिए ही हल होगा. इस तरह से किसान तो इन दो पाटों के बीच पिसकर यूं ही मर जायेंगे, अन्य राज्यों में यही हुआ है और बिहार में भी यही बात दुहरायी जायेगी.

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कहलगांव में किसान महासभा का प्रतिरोध मार्च

पीरपैंती में किसानों से अधिगृहित जमीन को एक रूपये प्रति एकड़ की दर से अडानी को देने के खिलाफ 19 सितंबर 2025 को कहलगांव में अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले प्रतिरोध मार्च निकला गया. गांगुली पार्क से निकल कर यह प्रतिरोध मार्च स्टेशन चौक, घाट रोड, पुरानी बाजार व केला आढ़त होते हुए पार्क चौक पर पहुंचा, जहां सभा आयोजित हुई. किसान महासभा के जिला अध्यक्ष महेश प्रसाद यादव और राज्य कमिटी सदस्य रणधीर यादव के नेतृत्व में मार्च में शामिल दर्जनों किसान ‘अडानी से यारी-देश से गद्दारी नहीं चलेगी’, ‘पीरपैंती में किसानों से ली गई जमीन अडानी को मुफ्त भेंट क्यों – नीतीश-मोदी जबाव दो’, ‘देश पर कंपनी राज थोपने की साजिश मुर्दाबाद’, ‘कंपनी राज नहीं चलेगा’ आदि नारे लगा रहे थे.

सभा को संबोधित करते हुए महेश प्रसाद यादव ने कहा कि  जमीन अधिग्रहण संबंधित कानून में सिर्फ ये नहीं है कि किसानों को जैसे-तैसे मुआवजा दिया जाए बल्कि उसमें सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ, पर्यावरण संबंधित प्रावधानों का निर्वहन करना होता है. लेकिन यहां तो इन जवाबदेहियों का पालन करने के बजाय सरकारी आतंक पैदा कर किसानों को डराया-धमकाया जा रहा है और कुछ लोगों को जेल भी भेजा दिया गया है.

रणधीर यादव ने कहा कि वहां के किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला है. सरकार ने किसानों से जमीन ली कि उसपर सरकारी उपक्रम लगेगा लेकिन उस जमीन को मुफ्त में जमीन अडानी को दिया गया. यह इस सरकार के कारपोरेट परस्त नीतियों को साफ-साफ दर्शाता हैं, कटाव विस्थापितों को वर्षों से टरकाया जा रहा है लेकिन अडानी के लिए लाखों पेड़ों की कुर्बानी देकर मिनटों में जमीन दे दी गई. इसलिए हमलोग इस मार्च के माध्यम से सरकार की कंपनी राज कायम करने की मंशा – सब कुछ अडानी के लिए – को जनता की अदालत में ले जाएंगे.

20 September, 2025