9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर भाकपा(माले) और आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने झारखंड में कई जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए और दिशोम गुरू शिबू सोरेन जिनका 4 अगस्त को निधन हो गया, भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की.
गावां प्रखंड अंतर्गत जमडार पंचायत के कारीपहड़ी में इस मौके पर सभा आयोजित हुई जिसकी शुरूआत गुरू शिबु सोरेन के चित्रा पर माल्यार्पण कर की गई. सभा में बतौर मुख्य अतिथि धनवार पूर्व विधायक राजकुमार यादव उपस्थित थे. सभा की अध्यक्षता संतोष मरांडी और संचालन सुरेश मुर्मू ने किया. भाकपा(माले) जिला कमिटी सदस्य नागेश्वर यादव एवं प्रखंड सचिव सकलदेव यादव भी इस मौके पर मौजूद थे.
सभा को संबोधित करते हुए का. राजकुमार यादव ने कहा कि हर साल 9 अगस्त को बड़े हर्ष व उल्लास के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चले जाने से उसमें गहरे शोक का रंग घुल गया है. हमें इस शोक को संकल्प में बदल डालना है. गुरुजी शिबू सोरेन ने आदिवासियों के जीवन से जुड़ी समस्त समस्याओं को लेकर – जल, जंगल व जमीन पर अपने अधिकार; शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व विकास में हिस्सेदारी की मांग तथा उनके साथ हो रहे हर जुल्म-अत्याचार के खिलाफ मुखर आवाज उठायी थी और आज भी इसी रूप में जाने जाते हैं. आज अंबानी, अडानी और अन्य कारपोरेट ताकतों द्वारा आदिवासियों व दलितों की जमीन छीनी जा रही है. केंद्र में बैठी भाजपा सरकार न केवल इस पर चुप्पी साधे हुए है, बल्कि इसी को बढ़ावा दे रही है. हमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचारों पर चलते हुए इसके खिलाफ संघर्षों को तेज करना होगा और यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
इस सभा में विकास ठाकुर, बैजू मरांडी, तालो मरांडी, विकास शर्मा, मनोज सोरेन, सुरेंद्र हेंब्रम, संतोष बेसरा, राहुल हांसदा, बुधन मांझी, हुसैन मरांडी, मोती मरांडी, दिनेश यादव, पंचायत समिति सदस्य अशोक यादव,नारायण यादव, लहन मंडल, दिनेश यादव, प्रदीप यादव, अनिल यादव, संजय यादव, हेमराज दास समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे.
अरगड्डा टोंगी क्लब में कार्यकर्ता कन्वेंशन
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने अरगड्डा टोंगी क्लब में रामगढ़-हजारीबाग जिले का संयुक्त कार्यकर्ता कन्वेंशन आयोजित किया.
सोहराय किस्कू, लालचंद बेदिया, सुभाष बेदिया, नरेश बड़ाईक, परिवार मरांडी, सरयू बेदिया, मानाराम मांझी और रस्का मांझी के आठ सदस्यीय अध्यक्षमंडल ने कन्वेंशन की अध्यक्षता की और भाकपा(माले) केंद्रीय कमेटी के सदस्य आरडी मांझी, आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक देवकीनंदन बेदिया और भाकपा(माले) के हजारीबाग जिला सचिव का. पाचु राणा ने इसे अतिथि के बतौर सांबोधित किया. इस कन्वेंशन में रामगढ़, डाडी, मांडू, पतरातू और गोला से नागेश्वर मुंडा, नीता बेदिया, शंकर मुंडा, सोहन बेदिया, बंशी बेदिया आदि समेत दर्जनों नेता और कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की.
सर्वप्रथम दिशोम गुरु शिबू सोरेन को दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद आरडी मांझी ने उद्घाटन वक्तव्य दिया और सुभाष बेदिया ने कन्वेंशन का विषय प्रवेश का पाठ किया. पाचु राणा, भुवनेश्वर बेदिया, नरेश बड़ाईक, नीता बेदिया, गोपाल बेदिया और देवकीनंदन बेदिया ने मुख्य रूप से कन्वेंशन को संबोधित किया.
नेताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज रस्म अदायगी नहीं है बल्कि आदिवासियों के ऊपर हो रहे हमलों के खिलाफ और आदिवासियों की अधिकारों की रक्षा के अनवरत और समझौताहीन संघर्ष करने का संकल्प है.
कन्वेंशन से आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आदिवासियों के ज्वलंत मुद्दों पर 11 अगस्त को रांची प्रदर्शन में प्रदर्शन, 14 अगस्त को प्रखंडों में धरना तथा 29 अगस्त को राज्यपाल के समक्ष प्रदर्शन करने के प्रस्ताव लिए गए.
कन्वेंशन के माध्यम से आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने सरकार के समक्ष निम्न मांगों को रखा है –
- नक्सल के नाम पर आदिवासियों पर जारी हमले पर अविलंब रोक लगे.
- विश्व के मूलनिवासियों के अंतराष्ट्रीय दिवस (9 अगस्त, विश्व आदिवासी दिवस) को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए.
- संविधान में अनुसूचित जनजाति के जगह पर आदिवासी शब्द पुनर्स्थापित किया जाए.
- पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी बहुल राज्यों, जिलों, प्रखंडों व पंचायतों को शिडयूल्ड एरिया में शामिल किया जाए.
- पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम,1996 (पेसा) के प्रावधानों को सुदृढ़ करते हुए उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए.
- अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 को सख्ती से लागू किया जाए.
- आदिवासियों की धार्मिक मान्यता के आधार के आधार सरना धर्म कोड लागू किया जाए.
- मनरेगा आदिवासियों के लिए जीवन रेखा और रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है. 2024 की तुलना 2025 के केन्द्रीय वजट में 19.297 करोड़ रुपए कम है. इसलिए मनरेगा में केन्द्रीय वजट बढ़ाते हुए दैनिक मजदूरी 600 रुपए और 200 दिन काम की गारंटी हो.
- अदिवासियों की अपनी गांव व क्षेत्र से रोजगार के लिए अन्य राज्यों में पलायन को रोकने के लिए गांव में ही उनकी आजीविका सुनिश्चित की जाए.
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम, 1989 को सख्ती से लागू किया जाए.
- झारखंड में सीएनटी, एसटीपीटी ऐक्ट व विलकिल्सन रुल को सख्ती से लागू किया जाए.
लातेहार,बगोदर के तिसरी प्रखंड के छतरमार गांव के खेल मैदान मे कार्यक्रम आयोजित कर इन प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया. कार्यक्रम में आदिवासी संघर्ष मोर्चा के नेता जागो मरांडी और मनोज सोरेन सहित सैकडां आदिवासी युवक व युवतियां उपस्थित हुए.