2009 में हैदराबाद की कंपनी ऐथना पावर कंपनी लिमिटेड (APCL) ने छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा जिले के डबरा तहसील के सिंघीतराई, बेनीपाली, ओडेकरा और निमोही गांवों की जमीन पर 1200 मेगावाट क्षमता (600 मेगावाट प्रति यूनिट वाली दो यूनिटों) के कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट की नींव रखी. इसके साथ ही कंपनी ने मध्य प्रदेश व नेपाल सरकार के साथ पावर पर्चेज एग्रीमेंट भी किया. 2011 में तत्कालीन यूपीए सरकार के केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की. 2016 में प्लांट का निर्माण बंद हो गया. यूनिट -1 का 80% और यूनिट 2 का केवल 30% काम पूरा था. अब स्थिति थी – अधूरा प्लांट, बर्बाद जमीन, विस्थापित ग्रामीण और दिवालिया घोषित कंपनी.
2022 में अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकराप्सी कोड (आईबीसी)-2016 के तहत दिवालिया कार्यवाही के माध्यम से इस अधूरे प्लांट को औने -पौने दामों पर खरीद लिया. जुलाई 2023 में एनसीएलटी, हैदराबाद के आदेश से इस कंपनी का वेदांता में विलय कर दिया गया और इस प्लांट को नया नाम दिया गया – वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट (VLCTPP).
जुलाई 2025 में यूनिट -एक में 600 मेगावाट बिजली का कमिशनिंग हुआ. 600 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-दो के निर्माण का काम अभी चल रहा है. अभी यह कंपनी नये बने शक्ति जिले में स्थित है.
इस कंपनी में 14 अप्रैल 2026 को भीषण दुर्घटना हुई. अभी तक 24 मजदूरों की मौत हो चुकी है और 14 मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं. यह दुर्घटना बॉयलर के स्टीम लाइन में विस्फोट होने से हुई है. मारे गए मजदूर छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल के हैं.
17 अप्रैल 2026 को ऐक्टू, सीटू व ऐटक द्वारा मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर, दुर्ग को दिया गया. ज्ञापन में मांग किया गया है कि घायल श्रमिकों का उच्च स्तरीय इलाज कराया जाए, मारे गए श्रमिकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए, मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए, दुर्घटना की न्यायिक जांच कराई जाए, राज्य के तमाम कंपनियों में सुरक्षा के मानदंडों व श्रम कानूनों का शक्ति से पालन कराया जाए, श्रमिकों को उचित मजदूरी, सुरक्षा सामग्री व सुविधाएं दी जाए और कंपनी मालिक पर कठोर कार्यवाही की जाए.
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में आए दिन हो रही औद्योगिक दुर्घटनाएं मजदूरों – खासकर ठेका मजदूरों के लिए – कब्रगाह साबित हो रही है. प्रशासन व सरकार ने दुर्घटनाओं में मजदूरों की लगातार हो रही मौतों और उनकी जायज मांगों पर चुप्पी साध ली है. घायल श्रमिकों का समुचित इलाज भी नहीं कराया जाता है. कंपनी मालिक व ठेकेदार मुनाफा कमाने के लिए सुरक्षा के मानदंडों व श्रम कानूनों को दरकिनार कर देते हैं. श्रमिकों के साथ न्यूनतम मानवीय व्यवहार भी नहीं किया जाता है. श्रमिकों से बिना समुचित प्रशिक्षण से काम कराया जा रहा है.
प्रतिनिधि मंडल में बृजेन्द्र तिवारी, जगन्नाथ त्रिवेदी, विनोद कुमार सोनी, नंदकिशोर गुप्ता, राजेंद्र परगनिया, टीकाराम चुनारकर, आरपी चौधरी, मुक्तानंद साहू, रघुवर गोंड, धनराज, शमीम कुरेशी, शिव नारायण, आरपी गजेंद्र, विनोद तोरले,जोहनलाल साहू, शत्रुघ्न यादव, आदि शामिल थे.