रांची में 8 मार्च 2026 को राजभवन के समक्ष भाकपा(माले) और झामकिस के बैनर तले केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनसुनवाई आयोजित की गई. इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, मजदूर, किसान और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. भाकपा(माले) के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने जनसुनवाई कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित किया. इसका संचालन भाकपा(माले) नेता और बगोदर के पूर्व विधायक का. विनोद कुमार सिंह ने किया, जबकि आरोप-पत्र झामकिस नेता आरडी मांझी द्वारा प्रस्तुत किया गया.
जनसुनवाई में प्रस्तुत आरोप-पत्र में महंगाई, बेरोजगारी, मजदूरी संकट और मनरेगा को कमजोर करने जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया. आरोप-पत्र में कहा गया कि मनरेगा में मजदूरी की पूरी जिम्मेदारी केंद्र पर थी. योजना में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी क्रमशः 90:10 थी, जबकि वीबी-ग्रामजी में इसे क्रमशः 60:40 कर दिया गया है. काम के घंटे बढ़ाए गए हैं तथा दैनिक मजदूरी और हड़ताल के अधिकार पर भी लगभग पाबंदी लगा दी गई है. मौजूदा नीतियों के कारण गरीब, मजदूर, किसान और हाशिये के तबके सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार की नीतियां कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जबकि आम जनता के अधिकारों को लगातार कमजोर किया जा रहा है. साथ ही, झारखंड सरकार पर भी जमीन अधिग्रहण, संसाधनों के निजीकरण और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए.
इस दौरान दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कहा – ‘मनरेगा देश के गरीबों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि जीवनरेखा है. इसे वीबी-ग्राम जी के माध्यम से कमजोर करना सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गरीबों की आजीविका पर हमला है. सरकार रोजगार के अवसर बढ़ाने के बजाय उन्हें सीमित कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है. यह केवल रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों का भी प्रश्न है. हम इन हमलों के खिलाफ देशभर में व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेंगे और जनता की आवाज को बुलंद करेंगे.’
इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के मामले में भारत का रुख काफी शर्मनाक रहा. ईरान के प्रमुख नेता की मृत्यु के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई टिप्पणी या प्रतिक्रिया नहीं आई, जो देश के लिए शर्मनाक स्थिति है. पांच दिन बाद भारत सरकार के विदेश सचिव द्वारा जाकर शोक व्यक्त किया गया. एसआईआर के जरिए बंगाल में 60 लाख लोगों के नागरिकता अधिकारों पर प्रश्नचिह्न लगने की स्थिति में चुनाव कराए जा रहे हैं. भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर वोटों की चोरी कर बंगाल में सरकार बनाने की कोशिश के आरोप लगाए जा रहे हैं. इसके अतिरिक्त, उन्होंने देशभर में चल रहे यूजीसी समता विनियम को शैक्षणिक संस्थानों में लागू कराने की लड़ाई में झारखंड के छात्र-युवाओं और आम लोगों से शामिल होने की अपील की.
जनसुनवाई में भाकपा(माले) के राज्य सचिव मनोज भक्त, राजधनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव, जयंती चौधरी, गौंदलपुरा (हजारीबाग) में अडाणी के खिलाफ 1000 से अधिक दिनों से चल रहे आंदोलन के प्रमुख नेता श्रीकांत निराला और अरुण महतो सहित सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. सभी वक्ताओं ने किसानों और मजदूरों की लड़ाई को साथ-साथ लड़ने का आह्वान किया. इसके अलावा, ‘राइट टू फूड’ अभियान से जुड़े सिराज दत्त जेम्स, झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता दयामणि बारला सहित अन्य सदस्यों ने भी संबोधित किया. न्यायिक मंच में हलधर महतो, जनार्दन प्रसाद, सुषमा मेहता, अलमा खलखो और उस्मान अंसारी शामिल रहे.