वर्ष 35 / अंक - 29 / पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में नाबालिग के साथ रेप और...

पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में नाबालिग के साथ रेप और हत्या : भाकपा(माले) की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया

पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में नाबालिग के साथ रेप और हत्या : भाकपा(माले) की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया

भाकपा(माले) की एक जांच टीम ने 7 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के बरुईपुर का दौरा किया जहां 11 साल की एक बच्ची के साथ बर्बर गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. टीम ने पीड़ित बच्ची के परिजनों, स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की. जांच टीम ने घटना की त्वरित न्यायिक जांच, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की.

4 जुलाई को बरुईपुर के धापधापी ग्राम पंचायत अंतर्गत सूर्यपुर हाट में रहने वाले एक अल्पसंख्यक परिवार की 11 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई. अगले दिन उसका शव स्थानीय जलाशय से बरामद किया गया.

भाकपा(माले) जांच टीम ने बढ़ती बलात्कार संस्कृति को खत्म करने, महिलाओं के लिए न्याय, समानता और बेखौफ आजादी के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रशासनिक और संस्थागत सुधारों की भी मांग की. दौरे के दौरान, जांच टीम ने पीड़िता के परिवार और स्थानीय लोगों से बातचीत की, इलाके में पुलिस कैंपों का दौरा किया और घटना तथा जांच की प्रगति के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी जुटाई.

जांच टीम ने परिवार की शिकायत दर्ज करने में पुलिस की शुरुआती आनाकानी की निंदा करते हुए कहा कि सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार न कर पाना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है.

जांच टीम में इंद्राणी दत्ता, नब कुमार बिस्वास, शिशिर चटर्जी, सुजय कुमार गुहा और संग्राम मंडल शामिल थे.

कोलकाता में विरोध प्रदर्शन

बरुईपुर में नाबालिग लड़की के साथ हुए बर्बर रेप और हत्या के मामले में न्याय की मांग हेतु अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने कई महिला संगठनों और लोकतांत्रिक संगठनों के साथ मिलकर 8 जुलाई को सियालदह में विरोध प्रदर्शन किया.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बरुईपुर की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा, बलात्कार  और हत्या के लगातार बढ़ते मामलों की ही एक कड़ी है. उन्होंने कहा कि बार-बार हो रही इन घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य सरकार की विफलता को उजागर किया है.

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से जवाबदेही की मांग करते हुए मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया जिसमें उन्होंने तुरंत सजा देने (एनकाउंटर) की बात कही थी. उन्होंने कहा कि ‘एनकाउंटर’ में हत्या की धमकियां कानून के शासन या आपराधिक न्याय प्रणाली की जगह नहीं ले सकतीं. प्रदर्शनकारियों ने बरुईपुर में हुए तथाकथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने, नाबालिग लड़की के साथ रेप और हत्या की घटना की समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कराने और राज्य द्वारा मुख्य गवाह की हत्या और उसस जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की.

इस विरोध प्रदर्शन ने बरुईपुर पीड़िता के लिए न्याय, अपराधियों को कड़ी सजा, कानून के शासन की रक्षा और महिलाओं की आजादी, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा की मांगों को फिर से दोहराया.

प्रदर्शनकारी महिला संगठनों ने उसी दिन एक संयुक्त बयान जारी कर पुलिस की भूमिका की जांच की भी मांग की, जिसमें लापरवाही और अपराधियों को दिए गए किसी भी अनुचित लाभ की जांच और दोषी पाए जाने पर सजा देने की मांग शामिल है.

महिला संगठनों ने मामले से जुड़े सभी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले वामपंथी कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने, विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा करने और पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, कानूनी सहायता और न्याय की त्वरित व पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की.

महिला संगठनों ने शिक्षण संस्थानों, कार्यस्थलों, सार्वजनिक परिवहन और मोहल्लों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और जवाबदेह उपायों की भी मांग की. उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आजादी को सीमित नहीं किया जा सकता और राज्य को ऐसे हालात सुनिश्चित करने चाहिए जिनमें हर महिला और लड़की सम्मान के साथ और बिना किसी डर के जी सके.


18 July, 2026