कॉ. रामकिशोर राय (75 वर्ष) अस्सी दशक में हीं पार्टी से जुड़े थे. वे सहार थाना के धनछुहां गांव में मध्यवर्गीय किसान के घर में पैदा हुए थे. जब भोजपुर में सामंतवाद विरोधी किसान आंदोलन तेज था और जमींदारों व भूस्वामियों के बहकावे में सवर्ण जाति के लोग भाकपा(माले) (आईपीएफ) को अपना दुश्मन समझ रहे थे, उसी दौर में उनका पार्टी के साथ जुड़ना बहुत ही प्रगतिशील और क्रांतिकारी कदम था. 1987 में वे पार्टी के सदस्य बने. तब से तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद वे पार्टी के मजबुत सिपाही बने रहे.
2006 में वे पंचायत में मुखिया का चुनाव लड़े, अच्छे मत से जीते और एक इमानदार व जनपक्षीय जनप्रतिनिधि की पहचान बनाई. अगले चुनाव में उन्हें पार्टी द्वारा जिला परिषद का भी चुनाव लड़ाया गया जिसे वे बहुत कम वोट से हारे. उल्लेखनीय है कि रणवीर सेना से लड़ाई के दौर में भी वे मजबूती के साथ न केवल पार्टी के साथ जुड़े रहे बल्कि लड़ाई का नेतृत्व करते रहे. जब नाढ़ी में जन प्रतिरोध में नौ रणवीर सेना के अपराधियों के सफाया के जुर्म में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तब भी वे विचलित नहीं हुए. जेल में रहते हुए ही उनके बड़े लड़के का देहांत हो गया फिर भी वे बाहर आने के बाद फिर उसी उर्जा के साथ काम करने लगे. वे अत्यंत ही जीवट किस्म के क्रांतिकारी इंसान थे जो अभी भी पार्टी की जिला स्थाई समिति के सदस्य थे.
ऐसी स्थिति में जब देश में फासीवादी ताकतों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष जारी है उनके जैसे मजबुत सिपाही का जाना पार्टी के लिए अपूर्णीय क्षति है.
कॉ. रामकिशोर राय की क्रांतिकारी विरासत अमर रहे!