इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बरगद लॉन में 28 नवंबर 2025 (शुक्रवार) को स्त्री शिक्षा और किसानों के हित में लड़कर सामाजिक जागरूकता फैलाने वाले ज्योतिबा फुले को उनके स्मृति दिवस पर याद किया गया.
उन्हें याद करने के साथ साथ छात्र संगठन आइसा के द्वारा ‘ज्योतिबा फुले के संघर्ष और वर्तमान चुनौतियां’ विषय पर संवाद भी रखा गया.
बातचीत की शुरूआत शशांक ने फुले के परिचय और संघर्ष बताने के साथ की. इसके साथ ही शशि भूषण ने फुले के द्वारा दिए गए शिक्षा (खासकर स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में) के क्षेत्र में योगदान, किसानों के प्रति उनके विचारों और नवजागरण में फुले के द्वारा दिए गए योगदान को याद किया. संवाद के क्रम में कई अन्य छात्र-छात्राओं ने अपनी बात रखी. बातचीत का समापन करते हुए मनीष और कलाम ने फुले और आंबेडकर के संदर्भ से अपने वर्तमान समय की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उनके लिखे हुए को पढ़ने और संगठित होकर तार्किक लड़ाई लड़ने की बात कही. संवाद का संचालन कर रहे आर्यन ने फुले की किताब ‘किसान का कोड़ा’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह किताब केवल उस समय के ही नहीं, बल्कि आज के समय के भी किसान की दास्तां है.
पूरी बातचीत में भानु, सुजीत, विवेक, मानवेन्द्र, राकेश, अमित, आशीष, अभिषेक, आस्था, जैनब, दिवाकर, सौम्या, शिवम, प्रज्ञा समेत विश्वविद्यालय के कई विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल रहे.