रांची में 17 अगस्त को किसान संघर्षों के नेता का. खुदीराम मुंडा के 14वें स्मृति दिवस पर सैकड़ो माले कार्यकर्ताओं ने सुभाष चौक से गोमदा मोड़ राहे तक मार्च निकाला और संकल्प सभा आयोजित की. का. खुदीराम मुंडा अमर रहें, नक्सल के नाम आदिवासियों पर दमन बंद करो, एसआइआर की आड़ में वोट के अधिकार से वंचित करने की साजिश नहीं चलेगी, वोट चोर – गद्दी छोड़ जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा.
सभा की शुरुआत कॉ. खुदीराम मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण और स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों, दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रामदास सोरेन को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि से हुई. यह अब तक की सबसे बड़ी गोलबंदी रही जिसमें महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही.
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के खिलाफ खड़ा रहा आरएसएस आज लाल किले से शहीदों का अपमान कर रहा है. भाजपा की विरासत भारत को खंड-खंड करने की साजिश है. एसआइआर कुछ और नहीं, बल्कि चयनित वोटरों की मतदान के अधिकार से बेदखली की तैयारी है, जिसका लक्ष्य एनआरसी जैसे कानूनों थोपना और नागरिकों को अधिकारविहीन करना है. लेकिन जनता इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी.
सभा में कहा गया कि शोषित-वंचितों के अधिकार, जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा की लड़ाई में कॉ. खुदीराम मुंडा का जीवन हर दौर में युवाओं को प्रेरित करता रहेगा. झारखंड में पेसा कानून का अक्षरशः लागू होना, स्थानीयता नीति और नक्सल के नाम पर जारी दमन का अंत ही संघर्ष का अगला चरण होगा.