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भुखमरी और तंगहाली से खुदकुशी को मजबूर हुआ दलित परिवार

भुखमरी और तंगहाली से खुदकुशी को मजबूर हुआ दलित परिवार

भाकपा(माले) ने डबल इंजन सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए आंदोलन छेडा

मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के नवलपुर मिश्रौलिया गांव में 15 दिसंबर 2025 के भोर में भुखमरी और तंगहाली के शिकार अमरनाथ राम ने अपनी झोपड़ी में पहले छोटी-छोटी तीन बच्चियों और दो बेटे को साड़ी से फंसरी बना कर लटका दिया. फिर खुद भी फंसरी से लटक गए. उनकी और तीन बच्चियों की मौत हो गई. दो बच्चे किसी तरह से बच गए. उनकी पत्नी की भी छः महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी क्योंकि आर्थिक तंगहाली के कारण वे उसका इलाज नहीं करा पाये थे. पत्नी की मौत के बाद उनका एक हाथ भी गिरने से टूट गया था और उनसे कोई काम नहीं हो पाता था.

इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही भाकपा(माले), ऐपवा, खेग्रामस और ऐक्टू कार्यकर्ताओं की टीम उनके घर पहुंची. उनके परिजनों और गांव के लोगों ने बताया कि अमरनाथ राम के कुल पांच बच्चे थे. तीन बेटियां – राधा (12 वर्ष), शिवानी (10 वर्ष) और राधिका (6 वर्ष) तथा दो बेटे – शिवम (7 वर्ष) का बेटा और अमीराज (4 वर्ष). पत्नी की बीमारी से मौत के बाद अमरनाथ पांचों बच्चों के साथ भुखमरी के शिकार थे और भारी तनाव में रह रहे थे. स्थिति इतनी बुरी हो चुकी थी कि बच्चों को हर रोज रोज खाने को भी कुछ नहीं मिल पाता था. उन्हें सरकारी राशन भी ठीक से नहीं मिल रहा था और कहीं से कोई कर्ज भी नहीं मिल रहा था. इस तनाव में अमरनाथ राम ने पहले बच्चों को फंसरी पर लटकाया और फिर खुद भी उससे लटक कर आत्महत्या कर ली.

जांच टीम में खेग्रामस के राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी, ऐपवा की जिला सचिव रानी प्रसाद, भाकपा(माले) जिला कमिटी के सदस्य विमलेश मिश्र और सकरा पार्टी प्रखंड कमिटी सदस्य प्रेमलाल राय तथा ऐक्टू कार्यकर्ता नीलकमल शामिल थे. जांच टीम ने पाया कि मृतक के घर में किसी भी तरह के अनाज का एक दाना भी नहीं था. उनके पास आधार कार्ड और श्रम कार्ड था, लेकिन उसे किसी भी तरह का सरकारी लाभ नहीं मिल रहा था. मुखिया और स्थानीय अधिकारियों के द्वारा भी परिवार को कोई मदद नहीं मिलती थी.

राज्य में एक बार फिर से डबल इंजन की नीतीश सरकार बनने के दो हफ्ते के बाद ही भुखमरी के शिकार एक दलित परिवार की दर्दनाक मौत पिछले बीस वर्षों के नीतीश राज में बिहार की भयावह हो चुकी गरीबी को उजागर करती है. इसके लिए नीतीश सरकार और प्रशासन सीधे जिम्मेवार है.

जांच दल ने इस घटना के लिए केंद्र व राज्य की मोदी-नीतीश सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए 19 दिसंबर को भाकपा(माले) के बैनर तले ने सकरा प्रखंड पर आक्रोशपूर्ण धरना देकर मुख्यमंत्री के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी को मांग-पत्र प्रस्तुत किया. मांग पत्र में मुख्यमंत्री से कहा गया है कि इस हृदयविदारक भयावह घटना के लिए आपकी सरकार और प्रशासन जिम्मेवार है. आपको मालूम होगा कि भुखमरी और तंगहाली के शिकार अमरनाथ राम ने तीन बच्चों के साथ फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है. छः महीने पहले उनकी पत्नी की भी मृत्यु बीमारी के कारण हो गई थी. पत्नी का भी दुखद निधन समुचित इलाज न होने के कारण हुआ था. घटना की जिम्मेवारी आपकी सरकार को लेनी चाहिए और कोई भी दलित व गरीब परिवार भुखमरी और तंगहाली के शिकार न हो इसकी गारंटी करनी चाहिए.

भाकपा(माले) की मांगें हैं –

1. आत्महत्या के शिकार अमरनाथ राम के जीवित दोनों बच्चों के नाम सरकार द्वारा 50-50 लाख रूपये बैंक में जमा किये जाएं. दोनों बच्चों की उचित परवरिश, पढा़ई तथा बेहतर जीवन यापन की गारंटी की जाए.

2. उनके अन्य परिजनों की स्थिति भी दयनीय है. उनके लिए भी रोजगार की गारंटी के साथ जरूरी सहयोग किया जाए.

3. भुखमरी और तंगहाली के शिकार दलित व गरीब परिवारों को रोजगार के लिए आपकी सरकार द्वारा घोषित दो लाख रूपये अविलंब देने की गारंटी की जाए.

4. बच्चों के साथ अमरनाथ राम द्वारा आत्महत्या तथा ईलाज के अभाव में छः महीने पहले उनकी पत्नी की अकाल मृत्यु के कारणों का उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. इसके लिए जिम्मेवार सरकारी-प्रशासनिक अधिकारियों पर कारवाई की जाए.

5. अतिक्रमण के बहाने गरीबों की झोपड़ियों को बुलडोजर से रौंदने पर रोक लगाई जाए. यूपी की तरह बिहार में शुरू बुलडोजर राज पर सख्ती से रोक लगाई जाए.


20 December, 2025