वर्ष 34 / अंक-29 / पीरपैंती में मोदानी पावर प्लांट के खिलाफ राज्यव्या...

पीरपैंती में मोदानी पावर प्लांट के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद मार्च

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मोदानी पावर प्लांट (गोड्डा) के बाद भागलपुर में  किसानों के साथ दोहरी ठगी रोकने, अडानी को 1 रुपये प्रति 1050 एकड़ की दर से जमीन उपलब्ध कराने के बजाये गरीबों के आवास, स्कूल एवं अस्पताल भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने, बिहार की जमीन व जल पर अडानी समूह के कब्जे को रोकने और किसानों को अपनी जमीन पर अधिकार दिलाने, बिहार को 6 रुपये प्रति यूनिट बिजली आपूर्ति से होने वाले सालाना 5000 करोड़ के नुकसान की भरपाई करने, 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई रोककर पर्यावरण की तबाही से बचाने, जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई उन्हें मुआवजा व अन्य सुविधाएं देने तथा किसानों पर दमन और फर्जी मुकदमे बंद करने की मांगों और नारों के साथ 22 सितंबर 2025 को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाया गया.

राजधानी पटना में अखिल भारतीय किसान महासभा व भाकपा(माले) के संयुक्त बैनर तले जीपीओ गोलंबर से पटना जंक्शन गोलंबर तक प्रतिवाद मार्च निकाला गया. पटना जंक्शन गोलंबर पर आयोजित प्रतिवाद सभा को फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, वरिष्ठ नेता का. केडी यादव, किसान महासभा राज्य सह सचिव  राजेंद्र पटेल, जल्ला किसान संघर्ष समिति नेता शंभूनाथ मेहता, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार आदि ने संबोधित किया.

वक्ताओं ने कहा कि बिहार को लूटने के लिए मोदी ने अडानी के लिए बिहार का दरवाजा खोल दिया है. भूमिहीन गरीब परिवारों को आवास के लिए 3 डिसमिल जमीन तक नहीं मिलती, लेकिन जब बात अडानी की आती है, तो सरकार पूरे बाग-बगीचे वाली 1050 एकड़ जमीन भी 1 रु. प्रति एकड़ के हिसाब से सौंप देती है. एनडीए का नारा बन गया है- जनता का साथ, अडानी का विकास. भागलपुर में अडानी के पावर प्रोजेक्ट के नाम पर मोदी-नीतीश डबल ठगी की तैयारी कर रहे हैं.

वक्ताओं ने शेखपुरा के चेवड़ा प्रखंड के हंसापुर-अस्थावां की 250 एकड़ जमीन उद्योग के नाम पर औने-पौने मुआवजे पर छीनी जाने के खिलाफ 20 सितम्बर को किसान महासभा ने प्रदर्शनकारियों के साथ एसडीओ-डीएम के साथ गाली-गलौज करने, आवेदन की रिसीविंग फाड़ देने और 4 किसान नेताओं पर मुकदमा थोप देने की कठोर भर्त्सना की.

मसौढ़ी में भाकपा(माले) के मसौढी प्रखंड सचिव राकेश व अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला कमेटी सदस्य निरंजन वर्मा के नेतृत्व में भाकपा(माले) कार्यालय से जुलूस निकाल कर कर्पूरी चौक के पास सभा आयोजित की गई. पालीगंज में पालीगंज प्रखंड सचिव सूरेन्द्र पासवान, दुल्हिनबाजार प्रखंड सचिव सदस्य अमर सेन दास और फतुहा में प्रखंड सचिव शैलेंद्र यादव के नेतृत्व में प्रतिवाद मार्च निकालकर सभा आयोजित की गई. इन कार्यक्रमों में विनेश चौधरी, आशा देवी, नागो देवी मुखिया संघ के अध्यक्ष आनंद प्रसाद, रामप्रवेश  दास, सुदामा दास, दीना, पंकज यादव व मुन्ना पंडित सहित कई नेता  शामिल थे.

हिलसा (नालंदा) में जिला सचिव सुरेंद्र राम व किसान महासभा के अध्यक्ष मुनीलाल यादव के नेतृत्व में भाकपा(माले) कार्यालय, काजी बाजार से प्रतिवाद मार्च निकाल कर जोगीपुर मोड़ के पास सभा आयोजित की गई. जमुई, नवादा, अरवल और समस्तीपुर में भी प्रतिरोध मार्च निकाला गया.

बेगूसराय में भाकपा(माले) और किसान महासभा कार्यकर्ताओं ने कचहरी रोड स्थित कमलेश्वरी भवन से प्रतिवाद मार्च निकाला. कैंटीन चौक पर आयोजित सभा को किसान महासभा के जिला सचिव वैजू सिंह, अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, भाकपा(माले) नेता चंद्रदेव वर्मा, मुक्तिनरायण सिंह सहित अन्य लोगों ने संबोधित किया.

सासाराम (रोहतास) में भाकपा(माले) जिला कार्यालय से मार्च निकाल कर पोस्ट ऑफिस चौक पर सभा आयोजित की गई. सभा को भाकपा(माले) जिला सचिव नंदकिशोर पासवान, किसान महासभा के जिला सचिव जवाहरलाल यादव, भाकपा(माले) जिला कमेटी सदस्य रविशंकर राम, कृष्णा मेहता, नरेंद्र राम, जैगम कुरैशी, ललिता देवी, जितेन्द्र प्रसाद आदि नेताओं ने संबोधित किया.

जहानाबाद में इस अवसर पर शहीद भगत सिंह नगर स्थित जिला कार्यालय से ऊॅटा मोड़ होते अरवल मोड़ तक ‘प्रतिवाद मार्च’ निकाला गया तथा अरवल मोड़ पर सभा आयोजित की गई!

सरकार की कॉरपोरेटपरस्त किसान विरोधी-पर्यावरण विरोधी नीतियों के खिलाफ आयोजित था यह कार्यक्रम. कार्यक्रम में घोसी विधायक कॉमरेड रामबली सिंह यादव, माले राज्य कमिटी सदस्य कॉमरेड श्रीनिवास शर्मा, कॉमरेड अरुण बिंद, किसान नेता कॉमरेड शौखीन यादव, इंसाफ मंच नेता कॉमरेड आरिफ रजा मासूमी सहित कई प्रमुख नेता/कार्यकर्त्ता शामिल थे.

आरा में पूर्वी रेलवे गुमटी से प्रतिवाद मार्च निकला और  रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर सभा की गई. प्रतिवाद मार्च में शामिल भाकपा(माले) नगर सचिव सुधीर सिंह, आरा मुफस्सिल के सचिव विजय ओझा,भाकपा माले जिला कार्यलय सचिव दिलराज प्रितम, आइसा राज्य सचिव सबीर कुमार सहित अन्य नेता मौजूद थे.


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किसानों के साथ डबल ठगी है मोदानी का भागलपुर पावर प्लांट

-- मनोज भक्त

1 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से अडाणी को भागलपुर पावर प्लांट में 1050 एकड़ जमीन नीतीश सरकार ने दिया है. यहां अडाणी कंपनी के अनुसार 10 से 12 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर मिलेंगे. ठीक यही बात झारखंड के गोड्डा पावर प्लांट के लिए एमओयू करते वक्त रघुवर सरकार की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और अडाणी ग्रुप के सीईओ राजेशचंद्र झा ने 12 दिसंबर 2017 को कही थी (बिजनस स्टैंडार्ड). सच्चाई लेकिन इसके विपरीत है.

अडाणी के गोड्डा पावर प्लांट में अडाणी पावर (झारखंड) लिमिटेड के 31 दिसंबर 2024 तक Traxn की 14 जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार कुल कर्मी 3316 हैं. गोड्डा पावर प्लांट के संबंध में अडाणी ग्रुप के जरिये जारी सूचना के अनुसार उसने कुल मिलाकर 558 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया है. इसमें 517 एकड़ निजी और फसली जमीन है जबकि 41 एकड़ सरकारी जमीन है. शुरुआत में अडाणी ग्रुप ने 1363.15 एकड़ जमीन की मांग की थी जिसमें 1214.49 फसली निजी और 148.66 सरकारी जमीन थी. पावर प्लांट और कोल ब्लाक के विस्तार के साथ जमीन के लिए अभी भी अडाणी का सरकार एवं किसानों पर दबाव बना हुआ है. किसानों से जमीन अधिग्रहण जबरदस्ती की गई है. किसानों से वादा किया गया था कि  2 एकड़ या इससे अधिक जमीन देने वालों को नौकरी या मुआवजा के साथ 5 लाख रु. अतिरिक्त दिए जाएंगे. स्थानीय किसानों के अनुसार नौकरी के नाम पर उन्हें अस्थायी ठेका मजदूर ही बनाया गया. प्रशिक्षण के बावजूद अभी भी जमीन के बदले नौकरी उन्हें नहीं मिली.  अभी भी जमीन मालिकों के साथ वादा खिलाफी के खिलाफ कानूनी और आंदोलनात्मक गतिविधि पर किसान आगे बढ़ रहे हैं.

अभी मार्च में लगभग 180 कर्मियों को सूचना मिली की उन्हें रिद्ध कंपनी द्वारा ‘हायर’ किया जा रहा है जो अडाणी ग्रुप के लिए काम करता हैं. इसमें 50 ऐसे मजदूर हैं जिन्हें जमीन के बदले काम दिया गया था. इन मजदूरों ने कंपनी द्वारा दिये जा रहे धोखे के खिलाफ हड़ताल शुरू किया. सरकार ने हड़ताली कर्मियों के पक्ष में न जाकर एक खोखला आश्वासन दिया कि भविष्य में जब कंपनी को जरूरत होगी, उन्हें बहाल किया जाएगा. हड़ताली कर्मियों के साथ बल का भी प्रयोग किया गया.

गोड्डा पावर प्लांट द्वारा स्थानीय पर्यावरण या सामाजिक विकास का वादा भी ढकोसला ही बना रहा. स्थानीय आबादी के बिजली आपूर्ति का संकट हमेशा बना रहा. बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति करने हेतु समर्पित इस पावर प्लांट से राज्य को भी ऊर्जा-आपूर्ति के लिहाज से कोई फायदा नहीं हुआ. जमीन के अतिरिक्त, कोल खनन और गंगा से 36 MCM प्रति वर्ष पानी खपत की मार राज्य को झेलनी पड़ रही है.

एक शोध टीम ने पाया कि प्लांट के बाद सांस की बीमारियों में इजाफा हुआ. हवा की गुणवत्ता AQI के लिहाज से 80 से बढ़कर 120 हो गई है और पानी का पीएच 6.8 से 5.5 हुआ है. प्रभावित इलाके को सेज (विशिष्ट आर्थिक प्रक्षेत्र) का नाम दिया गया है. प्रत्यक्ष तौर पर इससे जुड़े 11 गांव हैं लेकिन प्लांट की सहायक गतिविधियों जैसे पानी का पाइपलाइन आदि के लिए कई और गांव इससे जुड़े है. भूमि अधिग्रहण में एसपीटी एक्ट की पकड़ से बच निकलने के लिए इस प्लांट को सार्वजनिक हित का बताया गया है. जबकि स्पष्ट है कि यह दूसरे देश के लिए उत्पादन करने वाला प्लांट है. सरकार और अडाणी के सूत्रों से प्रत्यक्ष तौर पर विस्थापितों की संख्या 400+ परिवारों के 1500 सदस्य बताया जा रहा है. दूसरे स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा किए गये आकलन के लिहाज से यह संख्या 5000 के करीब है. 10000 नौकरी की बात तो छोड़ दिया जाए, जमीन देने वाले किसानों को भी नौकरी नहीं मिली है. वे आज भी जबरिया अवैध अधिग्रहण और अडाणी द्वारा दिए गए धोखे के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं.

बिहार में नीतीश-मोदी की डबल इंजन सरकार नौकरी देने के मामले में कोई स्टार्ट ही नहीं ले पायी है. यह बिहार चुनाव का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. भागलपुर में अडाणी के पावर प्रोजेक्ट के नाम पर मोदी-नीतीश डबल ठगी की तैयारी कर रहे हैं. एक और तो वे फसली जमीन छीन कर अडाणी को सौंप रहे हैं और गंगा के पानी का औद्योगिक दोहन से बिहार के पूर्वांचल में नया जल संकट पैदा करेंगे. प्लांट के निर्माण में 10-12 हजार लोगों को नौकरी देने की जो बात है तो उन्हें अस्थायी ठेका मजदूर ही बनाया जायेगा. संचालन काल में 3 हजार लोगों को नौकरी की बात की जा रही है उसकी सच्चाई यह है कि इस मामले में स्थानीय आकांक्षियों को बिरले ही मौका मिलता है. बिहार की जनता मोदानी को आंखों में धूल झोंक कर भागने का मौका नहीं देगी.

27 September, 2025