बात जब निकली है तो दूर तलक जाएगी
पटना : आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च
18 मार्च को – ’74 आंदोलन के ऐतिहासिक दिवस पर – पटना में यूजीसी रेगुलेशन 2026 के समर्थन और दलित, आदिवासी, अतिपिछड़े और पिछड़े समुदायों के लिए 65» आरक्षण लागू करने, संसद से रोहित एक्ट का निर्माण करने इत्यादि मांगों को लेकर ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले गांधी मैदान से राजभवन मार्च आयोजित किया गया. इसमें हजारों की संख्या में छात्र-नौजवानों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न जिलों से आए लोगों ने भाग लिया. आज इस ऐतिहासिक दिन पर एक बार फिर से बिहार के युवाओं ने मनुवादी फासीवादी सत्ता के खिलाफ सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के लिए जंग के नए दौर का ऐलान किया.
गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से शुरू होकर यह मार्च जेपी गोलंबर के बैरिकेड को तोड़ते हुए डाक बंगला चौराहा पहुंचा, जहां पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की और कुछेक को गिरफ्तार भी किया. लेकिन, आंदोलनकारियों के दवाब में, अंततः सबको छोड़ना पड़ा.
डाक बंगला चौराहा पर आयोजित हुई सभा में वक्ताओं ने उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना, जातीय भेदभाव व उत्पीड़न के खिलाफ यूजीसी के नए रेगुलेशन को लागू करने, बिहार में विधानसभा से पारित दलित, आदिवासी, अतिपिछड़े और पिछड़े समुदायों के लिए 65% आरक्षण को लागू करने, कोलेजियम सिस्टम को खत्म करने, संविधान विरोधी इडब्ल्यूएस EWS कोटा को खत्म करने, गरीब विरोधी नई शिक्षा नीति 2020 और वीबीएसए बिल को वापस करने, निजी क्षेत्रों और न्यायपालिका में दलित, आदिवासियों व पिछडों के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू करने की मांगें दुहराते हुए यह चेतावनी दी कि यदि यूजीसी रेगुलेशन लागू नहीं किया गया तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
छात्र-युवा नेताओं ने कहा कि शिक्षा में बढ़ती सामाजिक असमानता, जातीगत भेदभाव एवं उत्पीड़न के खिलाफ यह जरूरी है कि यूजीसी रेगुलेशन लागू किया जाय, रोहित एक्ट का निर्माण किया जाए, नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लिया जाए. वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जाए और उसे सख्ती से लागू किया जाए. केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण और भेदभावपूर्ण नीतियों को छोड़कर समावेशी और न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.
सभा का संचालन ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के राज्य संयोजक रिंकु यादव ने किया. सभा को पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, सामाजिक न्याय आंदोलन के राज्य सचिव सुबोध यादव, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा, फोरम के मनजीत आनंद साहू, विजय पासवान, संतोष आर्या, पूर्व विधायक मनोज मंजिल, आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार, भीम आर्मी राज्य अध्यक्ष अमर ज्योति, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय, पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेता सबा आफरीन, मुख्तार, निशांत यादव, एआइएसएफ राज्य अध्यक्ष सुधीर, सोनल नारायण, कुमुद पटेल, आइसा राज्य अध्यक्ष प्रीति, आरवाईए राज्य सचिव और पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन, आइसा राज्य सह सचिव, दिव्यम आदि ने संबोधित किया. मार्च में बिहार के राजधानी पटना समेत विभिन्न जिला – पटना, बक्सर, छपरा, सिवान, भोजपुर, अरवल, भागलपुर, जहानाबाद, बेगूसराय, रोहतास, समस्तीपुर, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी, गया, मुजफ्फरपुर सहित अन्य इलाकों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए.
लखनउफ : समता मार्च पर पुलिस दमन
यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन के प्रभावी क्रियान्वयन और रोहित एक्ट के निर्माण की मांग को लेकर 18 मार्च 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा आयोजित ‘समता मार्च’ को प्रशासन ने गेट नंबर 3 पर ही रोक दिया. डीएम कार्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च कर ज्ञापन देने जा रहे छात्रों के साथ लखनऊ पुलिस ने धक्का-मुक्की, बदसलूकी और जबरन हिरासत जैसी कार्रवाइयां कीं.
समता मार्च के नेतृत्वकारी नेताओं इस पुलिस दमन की कड़ी निंदा की. आइसा के उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष सामर ने कहा कि आज की घटना यह साबित करती है कि जातिगत भेदभाव केवल परिसरों के भीतर सीमित नहीं है. जब दलित-बहुजन छात्र अपने अधिकारों की मांग करते हैं, तो पूरा राज्यतंत्र उनके खिलाफ खड़ा हो जाता है. यह संस्थागत नहीं, बल्कि राज्यसत्ता द्वारा संचालित जातिवाद है.’
एनएसयूआइ के राज्य महासचिव शुभम खरवार ने कहा – ‘पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर ज्ञापन देने की हमारी कोशिश पर पुलिस का व्यवहार अस्वीकार्य था. यह लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. सरकार स्पष्ट रूप से सामाजिक न्याय की मांग से असहज है और उसे दबाने के लिए प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल कर रही है.’
लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्रा महेंद्र यादव ने कहा – ‘यह सिर्फ छात्रों पर हमला नहीं है, बल्कि दलित-बहुजन समाज की ऐतिहासिक रूप से दबाई गई आवाज पर हमला है. जिन समुदायों को सदियों तक शिक्षा से दूर रखा गया, जब वे बराबरी की मांग करते हैं, तो राज्य उन्हें फिर से उसी स्थान पर धकेलने की कोशिश करता है. यही संरचनात्मक जातिवाद है, और हम इसके खिलाफ अपनी लड़ाई और तेज करेंगे.’
वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों ने छात्रों के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की. यह केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में किया गया दमन है. संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए तथा इस पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
यह घटना और अधिक स्पष्ट करती है कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन और रोहित एक्ट की मांग आज क्यों अत्यंत आवश्यक है. इस संघर्ष को और व्यापक तथा संगठित रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है समानता, न्याय और गरिमा की इस लड़ाई को न रोका जा सकता है, न दबाया जा सकता है.
प्रयागराज : यूजीसी रेगुलेशन के लिए हुई महापंचायत
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर आयोजित समता महापंचायत में सशक्त यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने तथा विश्वविद्यालय में व्याप्त भेदभाव शोषण और उत्पीड़न को दूर करने की मांग और समता आंदोलन के दौरान लखनऊ के छात्रों पर की गई पुलिसिया कार्यवाही की निंदा की गई. पंचायत के दौरान छात्रा संघ भवन से बालसन चौराहे तक मार्च निकाला गया.
इस पंचायत में जेएनयूएसयू सहसचिव दानिश, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, डीयू की छात्र नेता अंजलि तथा जेएनयू से रणविजय व मणिकांत, आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार, आरवाईए राज्य सचिव सुनील मौर्य, वरिष्ठ अधिवक्ता माता प्रसाद पाल और सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट आरके गौतम आदि वक्ता के रूप में शामिल रहे.
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा कि सामाजिक न्याय का प्रश्न आज इस देश का सबसे प्रमुख सवाल बन चुका है. इसको लेकर सड़क पर आंदोलन जारी है. भाजपा सरकार के मंसूबे को हम सड़कों पर आंदोलन के जरिए ध्वस्त करेंगे. देश मनुस्मृति से नहीं, बाबा साहब के संविधान से चलेगा. जेएनयूएसयू सहसचिव दानिश ने कहा कि जेएनयू से लेकर एयू तक में समता और न्याय की लड़ाई आगे बढ़ चुकी है और सुप्रीम कोर्ट को संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के पक्ष में खड़ा होना होगा, न की मनुस्मृति के. अगर निर्णय हमारे पक्ष में नहीं आता है तो भाजपा सरकार इसके खिलाफ एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन झेलने को तैयार रहे. डीयू की छात्र नेता अंजलि ने कहा कि रोहित वेमुला, दर्शन सोलंकी और पायल तडवी की शहादत और लड़ाई के उपरांत यूजीसी का रेगुलेशन आया था जिसको भाजपा सरकार ने लागू नहीं होने दिया. जेएनयू में जेल जाने व लाठी खाने व लखनऊ में सरकार का दमन झेलने के बाद भी आंदोलन आज सड़कों पर जारी रहा.
आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार और आरवाईए के राज्य सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में पद जाति के आधार पर खाली छोड़े गए हैं, उन्हें भरा नहीं जा रहा है जो लोग विश्वविद्यालय में पहुंच रहे हैं उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. जब तक भाजपा की सरकार रहेगी तब तक शैक्षणिक संस्थानों पर बुलडोजर चलता रहेगा, संविधान पर हमला होता रहेगा.
पंचायत का समापन आइसा इकाई अध्यक्ष सोनाली और संचालन शशांक ने किया. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र इसमें शामिल रहे. उसी दिन चंदौली, वाराणसी और गाजीपुर समेत उत्तर प्रदेश कई अन्य शहरों में समता मार्च आयोजित हुआ.