पटना में एक निजी गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत एवं पूरे मामले में प्रशासन के रैवैये ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जहानाबाद की इस छात्रा की 11 जनवरी को पटना के मेदांता अस्पताल में ईलाज के दौरान हुई मौत के बाद परिजनों ने छात्रा के साथ बलात्कार एवं उसकी हत्या का आरोप हॉस्टल प्रशासन पर लगाया.
6 जनवरी को छात्रा जब वह ब्रेकफास्ट और लंच के लिए कमरे के बाहर नहीं आई तब हॉस्टल के स्टाफ को फिक्र हुई. इसके बाद जब वो उसके कमरे में दाखिल हुए तो लड़की बेहोश मिली.
सबसे पहले बेहोश छात्रा को पटना के सहजानंद अस्पताल ले जाया गया. लेकिन हालत गंभीर थी लिहाजा उसे वहां से प्रभात मेमोरियल प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया. लेकिन वहां भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो फिर उसे तीसरे अस्पताल मेंदाता में भेज दिया गया. जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई.
6 जनवरी को जब लड़की को सहजानंद अस्पताल लाया गया था, तब उसी दिन चित्रगुप्तनगर पुलिस स्टेशन को इसकी खबर दी गई थी. लेकिन पुलिस अस्पताल नहीं पहुंची. पुलिस तीन दिन बाद अस्पताल पहुंची एवं परिजनों ने प्राथमिकी दर्ज कराया. लेकिन पुलिस ने कोई कारवाई या जांच पड़ताल नहीं किया.पुलिस इस मामले में तब सक्रिय हुई जब लड़की की मौत 11 जनवरी को मेदांता में हो गई.
उसकी मौत के बाद शुरुआती घंटों में पुलिस और अस्पताल प्रशासन का फोकस मेडिकल कारणों पर रहा. प्राथमिक तौर पर तबीयत बिगड़ने या दवा के ओवरडोज जैसी आशंकाएं जताई गईं. इसी आधार पर पुलिस के कुछ शुरुआती बयान सामने आए. लेकिन छात्रा के परिजनों का कहना था कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और शरीर पर चोट के निशान थे, जो उसकी सामान्य मौत की ओर इशारा नहीं करते थे. यहीं से मामले में संदिग्धता की पहली परत तैयार हुई. परिजनों ने छात्रा के शव को लेकर गांधी मैदान के समीप कारगिल चौक पर प्रदर्शन किया एवं इस मामले में दोषियों की शिनाख्त कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की. पुलिस ने इस मामले में समझने-समझाने या परिजनों को आश्वासन देने की जगह प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियां बरसाने लगी एवं प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा दर्ज कर दिया.
इस घटना के विरोध में तथा इसको अंजाम देने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर पूरे बिहार से उठ रही आवाज एवं परिजनों के दावे के बीच पटना पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए छात्रा के साथ रेप की घटना होने से इंकार कर दिया और इस संदिग्ध मौत को आत्महत्या बता दिया.
लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसने पटना पुलिस के इस दावे पर कि छात्रा ने आत्महत्या कर ली, सवालिया निशान लगा दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि छात्रा के साथ यौन हिंसा एवं जोर-जबरदस्ती से इंकार नहीं किया जा सकता. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जहां एक ओर परिजनों द्वारा छात्रा के साथ रेप होने के दावे का समर्थन कर दिया, वहीं इस घटना में पटना पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए. इससे परिजनों द्वारा पटना पुलिस पर मामले की लीपापोती करने एवं आरोपियों को बचाने के आरोप को बल मिला. छात्रा के मामा ने विभिन्न मीडिया चैनलों पर दिए बयान में चित्रगुप्त नगर थाने पर भी आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके जरिए मेरे ऊपर एफआईआर नहीं करने के लिए दबाव बनाए गए एवं पैसे का प्रलोभन दिया गया.
चौतरफा विरोध प्रदर्शन – विभिन्न सामाजिक हिस्सों छात्रा, महिला व सामाजिक संगठनों ने जिसमें मुख्य भूमिका निभाई – के दबाव में बिहार सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 16 जनवरी को एसआईटी का गठन किया. लेकिन एसआईटी द्वारा जांच की जो दिशा अपनायी जा रही है, उससे उसके ऊपर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे. इन सवालों को इस तथ्य से और भी बल मिला, जब उन्हीं पुलिस अधिकारियों को इस एसआईटी में शामिल कर लिया गया जिन्होंने इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही छात्रा के साथ रेप से इंकार किया था और इसे आत्महत्या बताया था.
आइसा का राज्यव्यापी प्रदर्शन
छात्र संगठन आइसा ने इस मामले में न्यायिक जांच एवं पीड़िता को न्याय देने की मांग को ले कर 12 जनवरी को पटना विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर कैंडल मार्च निकाला और प्रदर्शन किया. 21 जनवरी को आइसा ने राज्यव्यापी प्रदर्शन किया एवं इस मामले में लीपापोती की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने की मांग की. आइसा ने मामले की निष्पक्ष जांच करने एवं पीड़िता को न्याय देने की भी मांग उठाई. आइसा ने यह मांग भी की कि निजी हॉस्टलों के संचालन एवं निगरानी के लिए स्वतंत्र नियामक संस्थान बने.
शंभू गर्ल्स हॉस्टल मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर खड़े किए गम्भीर सवाल
भाकपा(माले) की बिहार राज्य सचिव कुणाल ने 16 जनवरी 2026 को एक बयान जारी कर कहा कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की छात्रा की मौत के मामले में अब जांच के दौरान बलात्कार की पुष्टि ने बिहार पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है. यह बेहद गंभीर है कि पीड़ित परिजन शुरुआत से ही रेप की आशंका और आरोप लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने न केवल उनकी बातों को नजरअंदाज किया, बल्कि घटना को छुपाने और हल्का साबित करने की कोशिश की.
जारी बयान में कहा गया कि यदि परिजनों की बातों को समय रहते गंभीरता से लिया जाता, तो सच्चाई पहले ही सामने आ जाती. उल्टे, पुलिस प्रशासन ने बेरहमी से उनपर लाठियां चलाईं. पुलिस द्वारा रेप जैसी जघन्य घटना को दबाने का प्रयास न केवल अमानवीय है, बल्कि यह सीधे-सीधे अपराधियों को संरक्षण देने जैसा है.’
पार्टी ने कहा है कि यह मामला केवल एक छात्रा की हत्या या बलात्कार का नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही और पुलिसिया संरक्षण का मामला बन चुका है. इससे बिहार में बेटियों की सुरक्षा को लेकर गहरी असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है. हम देख रहे हैं कि चुनाव बाद पूरे राज्य में महिलाओं पर हिंसा की बाढ़ सी आ गई है. भाजपा-नीतीश शासन में महिलाएं बेहद असुरक्षित हैं.
भाकपा(माले) ने यह मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्रा और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, रेप की घटना छुपाने में शामिल पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, दोषी आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कड़ी सजा दी जाए, पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए. साथ ही, राज्य के सभी ऐसे गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा की तत्काल समीक्षा करने की भी मांग की गई है.
पार्टी ने कहा है कि पार्टी पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और दोषियों को सजा दिलाने तथा पुलिसिया लापरवाही के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी.
नेताओं की टीम ने परिजनों से मुलाकात की
ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव का. मीना तिवारी के नेतृत्व में एक टीम 18 जनवरी को नीट छात्रा के जहानाबाद जिला स्थित पतोयामा गांव पहुंची. इस टीम में ऐपवा नेत्री अफ्शां जबीं (पटना), भाकपा(माले) के जहानाबाद जिला सचिव रामाधार सिंह व ऐपवा नेत्रियां – रेणु देवी, कंचन देवी, रिंकी देवी शामिल थे.
नेताओं ने छात्रा के परिजनों – उसकी मां व पिता नवीन शर्मा से मुलाकात की. उन लोगों ने कहा – ‘हमारी बेटी के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना को छिपाने के लिए प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल द्वारा जहर की सुई देकर हत्या की गई है. हॉस्पिटल में हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल के निकटतम रिश्तेदार डॉक्टर हैं. गांव की महिलाओं का कहना था कि सरकार कह रही है बेटी पढ़ाओ. कैसे पढ़ाएं, जब बच्चियां हॉस्टल में भी सुरक्षित नहीं है.’