वर्ष 35 / अंक - 07 / बिहार में चली ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ का विधानसभा...

बिहार में चली ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ का विधानसभा मार्च के साथ समापन

बिहार में चली ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ का विधानसभा मार्च के साथ समापन

आइसा-ऐपवा की ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’, जो 3 फरवरी 2026 को पटना के बुद्धा स्मृति पार्क से जन-सुनवाई के साथ शुरू हुई थी, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद, अरवल और पटना जिलों से चलती हुई 9 फरवरी को राजधानी पटना में पहुंची. अगले दिन 10 फरवरी को महिलाओं व छात्र-युवाओं के जुझारू विधानसभा मार्च के साथ इसका समापन हुआ. न्याय यात्रा के दौरान कई बलात्कार पीड़िताओं के परिजनों से मुलाकात की गई और उनकी पीड़ा, संघर्ष और न्याय की मांग को सामने लाया गया.

इस दौरान 100 से अधिक नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें महिलाओं, छात्राओं, युवाओं और आम जनता ने बड़ी संख्या में भाग लिया.

इस न्याय यात्रा में ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी के साथ संगीता सिंह, रीता वर्णवाल, लीला वर्मा, वंदना प्रभा, अंजुषा,  आइसा की राज्य अध्यक्ष प्रीति कुमारी, प्रिया, अनु तथा दीपंकर लगातार शामिल रहे.

यात्रा अनामिका के गांव गोह पहुंची

यात्रा के क्रम में गोह (औरंगाबाद) की नीट छात्रा अनामिका की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले का भी जायजा लिया गया तथा पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की गई. अनामिका की पटना के परफेक्ट पीजी हॉस्टल में हुई मौत ने बिहार में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 6 जनवरी को दोपहर 1 बजे परिवार को सूचना दी गई कि अनामिका ने फांसी लगा ली है, जबकि उसी दिन सुबह 9 बजे अनामिका ने अपनी मां से सामान्य बातचीत की थी. यह तथ्य पूरे मामले को गहरे संदेह के घेरे में लाता है. यात्रा की टीम गोह में अनामिका के घर पहुंची, जहां पीड़िता की दादी से मुलाकात हुई. वह पोती की हत्या के बाद पूरी तरह टूट चुकी हैं. चाचा और फुआ ने बताया कि प्रशासन ने माता-पिता को पटना बुला रखा है, जबकि प्रशासन को स्वयं पीड़ित परिवार के घर आकर न्याय की गारंटी देनी चाहिए थी. परिजनों का आरोप है कि प्रशासन जांच में देरी कर रहा है और हत्या को आत्महत्या साबित करने का दबाव व भय पैदा कर रहा है.

घटना की सूचना मिलते ही परिजन जब पटना पहुंचे, तो उन्हें पीएमसीएच सहित कई अस्पतालों में घंटों भटकाया गया. काफी देर बाद शव तक पहुंचने दिया गया. परिजनों को हॉस्टल के कमरे में प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि इसी दौरान रूम पार्टनर का सामान दूसरे कमरे में शिफ्ट कराया गया, जो स्पष्ट रूप से साक्ष्यों से छेड़छाड़ का मामला है.

पुलिस ने अनामिका का मोबाइल फोन जब्त किया है. लेकिन महीनों बाद भी न तो कोई डिजिटल साक्ष्य सार्वजनिक किया गया है और न ही फोन परिवार को लौटाया गया है. 7 जनवरी को पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन उसकी रिपोर्ट 29 जनवरी को दी गई. परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के बदले एक लाख रुपये की मांग की गई. मामले को एक महीना बीत जाने के बावजूद, न तो जांच की कोई पारदर्शी जानकारी परिवार को दी गई है और न ही किसी दोषी पर कार्रवाई हुई है. इस मामले को ‘आत्महत्या’ बताकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है.

पटना स्टेशन गोलंबर पर हुआ यात्रा का समापन

स्टेशन गोलंबर पर आयोजित जनसभा में 10 फरवरी को पटना में आहूत विधानसभा मार्च में भारी तादाद में लोगों से शामिल होने की अपील के साथ यात्रा का समापन हुआ. समापन सभा को ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, विधान पार्षद शशि यादव, महबूब आलम, आइसा की प्रीति कुमारी, सबा आफरीन सहित कई नेताओं ने संबोधित किया.

जुझारू रहा विधानसभा मार्च

10 फरवरी को नीट पीड़िता समेत बिहार की छात्राओं और महिलाओं के न्याय की मांग को लेकर पटना के गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से दोपहर 12 बजे निकले विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया. पुलिस द्वारा लगाए गए भारी बैरिकेड के जरिए मार्च को जेपी गोलंबर पर ही रोक दिया गया जबकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़कर अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते थे. पुलिस ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी और बाद में महिलाओं पर लाठीचार्ज किया. इसमें कई महिलाएं घायल हो गईं. कुछ को हाथ, सिर और पैर में चोटें आईं. लाठीचार्ज के चलते सैकड़ों महिलाएं तितर-बितर हो गईं और मुख्य मार्च के साथ डाकबंगला चौराहे तक नहीं पहुंच सकीं. इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर पर लगाए गए बैरिकेड को पार कर लिया और डाकबंगला चौराहा पहुंच गए. वहां भी बैरिकेड था और भारी तादाद में पुलिस भी. चौराहे पर बीच सड़क बैठकर सभा आयोजित की गई.

विधानसभा मार्च का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, आइसा के महासचिव प्रसेनजीत कुमार, जेएनएसयू के पूर्व अध्यक्ष धनंजय कुमार, सोहिला गुप्ता, संगीता सिंह, रीता वर्णवाल, सरोज चौबे, प्रीति कुमारी, सबीर कुमार, कुमार दिव्यम, सबा आफरीन, मनीषा यादव, अनु, प्रिया, दीपंकर सहित कई नेताओं ने किया. मार्च के समर्थन में विधायक संदीप सौरभ, एमएलसी शशि यादव और पूर्व विधायक गोपाल रविदास, सिस्टर डोरोथी, मीरा दत्त भी पहुंचे.

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी और अन्य वक्ताओं ने कहा कि बिहार में छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ लगातार गंभीर अपराध हो रहे हैं. नीट छात्रा का मामला, दरभंगा में छह साल की बच्ची के साथ बलात्कार और केसठ (बक्सर) की घटनाएं यह दिखाती हैं कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह विफल है. अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बजाय प्रशासन आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग कर रहा है.

सभी वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि इस मामले में केवल सीबीआई जांच से न्याय सुनिश्चित नहीं होगा. इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के प्रत्यक्ष निर्देशन में होनी चाहिए. बिहार की महिलाएं अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगी और न्याय मिलने तक यह आंदोलन जारी रहेगा.

एमएलसी शशि यादव ने कहा कि विधानमंडल से लेकर सड़क तक सरकार इस मामले को दबाना चाहती है. सदन में मुख्यमंत्री महिला जनप्रतिनिधियों को अपमानित करते हैं और सड़क पर उनकी पुलिस दमन करती है.

7 दिनों के न्याय यात्रा के बाद आयोजित इस विधानसभा मार्च में हजारों की संख्या में महिलाओं और छात्राओं की भागीदारी हुई. विधानसभा मार्च से आइसा-ऐपवा ने मुख्यमंत्री के नाम अपनी सात-सूत्री मांगों का ज्ञापन भी दिया.



14 February, 2026