वर्ष 34 / अंक-28 / बाढ़ व भूस्खलन से हुई भारी तबाही राष्ट्रीय आपदा घोष...

बाढ़ व भूस्खलन से हुई भारी तबाही राष्ट्रीय आपदा घोषित हो!

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भारत में बाढ़ से हुई तबाही पर गहरा दुख व्यक्त किया है. एसकेएम पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली के कुछ हिस्सों के पीड़ित लोगों के साथ अटूट एकजुटता व्यक्त करता है, जो अभूतपूर्व बाढ़ और भूस्खलन के विनाशकारी प्रभावों को झेल रहे हैं. इस प्राकृतिक आपदा के परिणामस्वरूप सैकड़ों लोगों की दुखद मृत्यु हुई है, लाखों परिवार विस्थापित हुए हैं, पशुधन की भारी हानि हुई है, जिससे अनगिनत परिवारों की आजीविका नष्ट हो गई है. प्रभावित क्षेत्रों के लोग भारी और लगातार बारिश, बादल फटने से हो रहे विनाशकारी भूस्खलन और भीषण बाढ़ से जूझ रहे हैं. एसकेएम ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू व कश्मीर, और हरियाणा में आयी बाढ़ व भूस्खलन को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें और राहत एवं पुनर्वास के लिए तत्काल कार्रवाई करें. इसके साथ ही, एसकेएम ने इन प्रभावित राज्यों में तत्काल पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययनों के अलावा कॉरपोरेट हितैषी बड़ी विकास परियोजनाओं की गहन समीक्षा की भी मांग की है.

एसकेएम के एक प्रमुख राष्ट्रीय घटक अखिल भारतीय किसान महासभा ने भी इस विनाशकारी आपदा के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की नीतियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया है. किसान महासभा ने उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू व कश्मीर जैसे अति संवेदनशील हिमालयी राज्यों में चलाई जा रही विनाशकारी परियोजनाओं को पहाड़ों में बादल फटने, ग्लेशियरों के टूटने, तथा बाढ़ व भूस्खलन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया है. किसान महासभा ने कहा कि केंद्र सरकार को हिमालयी राज्यों की संवेदनशीलता को नुकसान पहुचाने वाली परियोजनाओं को तत्काल रोक देना चाहिए. सम्बन्धित राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार आपदा प्रवंध का मजबूत तंत्रा विकसित करे जिसमें स्थितियों पर निगरानी, पूर्व सूचना व पूर्व चेतावनी तंत्र का निर्माण किया जाये; बांधों, नदियों, नहरों, झीलों, तालाबों से गाद व मलवे की सफाई का काम हर वर्ष मध्य जून तक निश्चित हो; झीलों, तालाबों, नहरों, गूलों, नदियों के जल भराव क्षेत्रों में हुए सभी अतिक्रमण हटाए जायें और राष्ट्रीय राजमार्गों के कारण हर गांव में बाधित हुए प्राकृतिक जल निकास क्षेत्रों को तत्काल खोला जाये.

एसकेएम पंजाब की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के लगभग 2300 गांव और कस्बे (कुल गांवों का लगभग 20%) बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. 53 लोगों की जान चली गई. पशुधन नष्ट हो गया. 4.75 लाख एकड़ भूमि में एक मौसम की पूरी फसल बर्बाद हो गई है. प्रभावित लोगों के घर या तो ध्वस्त हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए. पंजाब के दुशी तटबंध के भीतर बसे गांव पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं. कुछ जगहों पर नदियों ने अपना प्रवाह बदल दिया है. कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगे लोगों को भारी नुकसान हुआ है. ग्रामीण श्रमिकों की हालत और भी खराब है. गाद की सफाई और निकासी, मवेशियों के लिए चारा और कृषि नलकूपों की मरम्मत जैसे काम अभी प्रमुख बने हुए हैं. मनुष्यों के साथ ही बचे हुए पशुओं में बीमारियों का खतरा भी बहुत ज्यादा है. एसकेएम के पंजाब चैप्टर के कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों के नेताओं की टीमों ने इस कठिन समय में अपने लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है. प्रभावित इलाकों में, इन टीमों ने राहत कार्यों के लिए दिन-रात ड्यूटी की है.

एसकेएम पंजाब ने बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और कुलवंत सिंह संधू की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की. बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई. एसकेएम पंजाब की समझ यह है कि बाढ़ मानव निर्मित है, न कि प्राकृतिक आपदा. क्योंकि मानसून की पूर्व तैयारी के लिए दोनों सरकारें (केंद्र और राज्य दोनों) अपनी गलतियों को ढंकने की कोशिश कर रही हैं. 31 मई तक बांधों को खाली करने की आवश्यकता थी, लेकिन इस बार बांध पूरी तरह से खाली नहीं हुए. इस वर्ष पंजाब के किसानों को नहर से पानी की आपूर्ति बहुत कम समय के लिए हुई. ट्रिब्यून और इंडियन एक्सप्रेस जैसे प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, गाद के कारण बांधों की भंडारण क्षमता कम हो गई है, विशेष रूप से भाखड़ा बांध की क्षमता में 18-20% की कमी आई है. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘बांध सुरक्षा अधिनियम’ के लागू होने के साथ, बांधों का नियंत्रण अब केंद्र सरकार के हाथों में चला गया है. पंजाब में व्यास भाखड़ा प्रवंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और पंजाब सरकार के बीच समन्वय की कमी भी स्पष्ट रूप से सामने आई है.

इस बड़ी तबाही के लिए जलवायु परिवर्तन मूल कारण है. ग्लोबल वार्मिंग अपना प्रभाव दिखा रही है. आजकल कम समय में भी बारिश का तेज होना या पहाड़ों में बादलों का फटना इस प्रभाव को ज्यादा स्पष्ट दिखा रहा है. कॉरपोरेट विकास मॉडल के कारण पहाड़ों में हुई तबाही इस आपदा का एक और महत्वपूर्ण कारक है. तेज बारिश और नदियों के साथ पहाड़ों से आए भारी मलवे के कारण, बांधों के गेट अचानक ही खतरे के निशान पर पहुंच गए, जिससे बांधों के जलभराव के दरवाजे खोलने पड़े. बिना सूचना और बिना पूर्व चेतावनी के अचानक लाखों क्यूसेक पानी नदियों में छोड़ दिया गया. अवैध खनन, नदी के तटबंधों को मजबूत न करना, नदियों और नहरों की सफाई का काम न होना, झीलों तालाबों की सफाई का न होना और उन पर अतिक्रमण की मार जैसे कारकों ने पंजाब व हरियाणा में आई इस विनाशकारी बाढ़ और तबाही में अहम भूमिका निभाई.

इस बाढ़ और तबाही के जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने के लिए, एसकेएम पंजाब ने माननीय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक समयबद्ध न्यायिक आयोग के गठन की मांग की है. साथ ही, सभी बाढ़ पीड़ित परिवारों को तुरंत एक-एक लाख रुपये की अंतरिम राहत देने की मांग की है. एसकेएम ने मुआवजे के मानदंडों में संशोधन की माँग करते हुए, प्रति एकड़ एक बुनियादी इकाई और ‘क्षति के अनुसार मुआवजा’ की मांग की है. एसकेएम ने प्रभावित क्षेत्रों का विशेष सर्वेक्षण की मांग करते हुए क्षतिग्रस्त फसलों के लिए 70,000 रुपये प्रति एकड़, क्षतिग्रस्त गन्ने की फसल के लिए एक लाख रुपये प्रति एकड़, मृतक के लिए 10 लाख रुपये और पशुधन के नुकसान के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की है. साथ ही ढहे हुए घरों के लिए 10 लाख रुपये और क्षतिग्रस्त घरों के लिए उचित मुआवजे की भी मांग की गई है. एसकेएम ने राहत गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए राहत शिविर लगाने का भी निर्णय लिया है. ऐसा ही एक शिविर अमृतसर जिले की अजनाला तहसील में स्थापित किया गया है. पंजाब के लोगों के साथ-साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान आदि के कई लोगों और संगठनों ने पीड़ितों की खुलकर मदद की. परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं. बेहतर मुआवजे और बेहतर राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार और पंजाब सरकार दोनों पर दबाव बनाने के लिए जन संघर्ष को संगठित करने की तत्काल आवश्यकता है. एसकेएम पंजाब 20 सितंबर के बाद इस संबंध में एक बैठक करेगा और आगे की रणनीति पर चर्चा करेगा.

उधर भाकपा(माले) के राज्य सचिव कामरेड गुरमीत बख्तपुरा के नेतृत्व में भाकपा(माले) लिबरेशन की टीम ने लगातार बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उनका हालचाल लिया और उनकी तकलीफों के समाधान के लिए आवाज उठाई. पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरे राज्य में आपदा पीड़ितों की राज्य व केंद्र सरकार द्वारा की जा रहे अवहेलना के खिलाफ आवाज उठाई. किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड रुलदू सिंह मानसा के आह्वान पर किसान महासभा के घटक ‘पंजाब किसान यूनियन’ ने स्वतंत्र रूप से 17 सितंबर को राज्य के 15 जिलों की तहसीलों और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर आपदा से प्रभावित सभी वर्गों को तत्काल एक लाख रुपया राहत और पूरी क्षतिपूर्ति के भुगतान का मांगपत्र सौंपा. भाकपा(माले) लिबरेशन और उसके मजदूर संगठन ‘मजदूर मुक्ति मोर्चा पंजाब’ ने भी बाढ़ से तबाह हुए मजदूरों, किसानों, व्यापारियों सहित सभी तबकों को तत्काल राहत राशि का भुगतान करने और बाढ़ से हुई क्षति का आकलन कर क्षतिपूर्ति करने की मांग से सम्बन्धित ज्ञापन पूरे राज्य में सौंपे हैं. आने वाले समय में मजदूर मुक्ति मोर्चा ने बाढ़ राहत और मजदूरी के सवाल पर 29 सितंबर को मानसा में एक बड़ी रैली करने की घोषणा की है.

– एसकेएम, भाकपा(माले) लिबरेशन, पंजाब किसान यूनियन और मजदूर मुक्ति मोर्चा द्वारा जारी रिपोर्टों पर आधारित



शियारपुर घटना की आड़ में प्रवासियों के खिलाफ माहौल भड़काना बंद करो!

होशियारपुर और कमेआना में बाल शोषण करने वाले और होशियारपुर में एक बच्चे की बेरहमी से हत्या करने वाले दोषियों पर विचाराधीन फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर जल्द सजा दी जानी चाहिए. पर इसकी आड़ में सभी प्रवासी मजदूरों के खिलाफ भीड़ हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. उपरोक्त विचार मजदूर मुक्ति मोर्चा, लिबरेशन पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष गोबिंद सिंह छाजली और प्रदेश कार्यकारी सचिव विजय सोहल ने प्रेस को एक बयान जारी करते हुए व्यक्त किए. दोनों मजदूर नेताओं ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के साथ संघर्ष करने के बजाय, पंजाब के बेरोजगार और मेहनतकश लोगों को केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ सभी के लिए रोजगार गारंटी अधिनियम, बेहतर काम करने की स्थिति, बाढ़ जैसी आपदाओं से सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऐसे जघन्य अपराधों की रोकथाम के कानून बनाने के लिए संघर्ष करना चाहिए. उन्होंने कहा कि चंद दोषियों की वजह से पूरा समुदाय दोषी नहीं बनाया जा सकता है. इस अवसर पर, श्रमिक नेताओं ने न्यायप्रिय प्रवासी मजदूरों से भी ऐसे अपराधी तत्वों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की. मजदूर नेता गोबिंद छाजली ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे सांप्रदायिक माहौल से सिर्फ भाजपा जैसी सांप्रदायिक ताकतों को ही फायदा होता है.

20 September, 2025