वर्ष 35 / अंक - 03 / दूसरी आजादी के लिए संघर्ष का संकल्प

दूसरी आजादी के लिए संघर्ष का संकल्प

दूसरी आजादी के लिए संघर्ष का संकल्प

आदिवासी संघर्ष मोर्चा एवं झारखंड जनाधिकार महासभा के संयुक्त निर्णय के तहत 1 से 9 जनवरी 2026 तक झारखंड राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में एक व्यापक जन-अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य आदिवासी इतिहास में हुई शहादतों और नरसंहारों की स्मृति को पुनर्जीवित करना, वर्तमान दौर में आदिवासी, दलित एवं वंचित समुदायों पर हो रहे दमन और कॉरपोरेट लूट के खिलाफ जन-जागरूकता पैदा करना तथा जल, जंगल, जमीन, व खनिज की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष को तेज करना और लोकतंत्र की रक्षा हेतु दूसरी आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना था.

जन-अभियान की शुरुआत 1 जनवरी 2026 को खरसावां गोलीकांड शहादत दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए काला दिवस मनाकर की गई. रामगढ़ जिला के घुटूवा सेकेंड गेट चौक पर आयोजित नुक्कड़ सभा का संचालन नागेश्वर मुंडा ने किया तथा परचा का पाठ तृतियाल बेदिया ने किया. इस अवसर पर “अडानी-अंबानी कंपनी राज नहीं चलेगी”, “नक्सल के नाम पर आदिवासियों का दमन और हत्या बंद करो”, “जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण की रक्षा करो” और “विस्थापन और पलायन पर रोक लगाओ, आदिवासियत की रक्षा करो” जैसे नारे बुलंद किए गए. सभा को संबोधित करते हुए देवकीनंदन बेदिया ने कहा कि झारखंड सहित पूरे देश में, विशेषकर पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में, जल, जंगल, जमीन और खनिज की लूट लगातार बढ़ रही है. कॉरपोरेट हितों की रक्षा के लिए ग्राम सभा और स्थानीय जनता की सहमति के बिना सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित किए जा रहे हैं और व्यापक सैन्यीकरण किया जा रहा है. सभा को सुरेन्द्र कुमार बेदिया, नागेश्वर मुंडा, भरत बेदिया आदि ने भी संबोधित किया.

इसी क्रम में बुमरी पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में भाकपा(माले) नेता भुनेश्वर बेदिया ने कहा कि 1 जनवरी 1948 को आजाद भारत में आदिवासियों का पहला संगठित नरसंहार खरसावां में हुआ, जब अलग राज्य की मांग कर रहे हजारों निहत्थे आदिवासियों पर तत्कालीन ओड़िशा पुलिस ने गोलीबारी की. इस गोलीकांड में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला, पुरुष और बच्चे शहीद हुए, जो यह दर्शाता है कि आजादी के बाद भी आदिवासियों पर राज्य दमन की नीति लगातार जारी रही है.

पडरिया गांव में आयोजित कार्यक्रम में रामवृक्ष बेदिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार भी केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप कार्य कर रही है. अवैध खनन, ग्राम सभा की सहमति के बिना माइनिंग, और उन्हीं क्षेत्रों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना लगातार बढ़ रही है. चुनावी वादों के बावजूद 2016-17 में बनाए गए लैंड बैंक और भूमि अधिग्रहण कानून में किए गए संशोधनों को अब तक रद्द नहीं किया गया है. इस कार्यक्रम में लाका बेदिया, प्रयाग बेदिया, जगदीश बेदिया, सुगिया देवी और गुरदयाल बेदिया ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी.

बारीडीह पंचायत के कडरू गांव में आयोजित सभा में नरेश बड़ाईक ने कहा कि माओवाद के खात्मे के नाम पर आदिवासी, दलित और अन्य वंचित समुदायों पर हिंसा, दमन, फर्जी मुकदमे और फर्जी मुठभेड़ों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. मोदी सरकार के कार्यकाल में इस दमनकारी नीति को और अधिक व्यापक और आक्रामक रूप दिया गया है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भागीदारी करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी.

3 जनवरी 2026 को ग्राम डुडुगी में आदिवासी संघर्ष मोर्चा द्वारा जयपाल सिंह मुंडा की 124वीं जयंती मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत पंचायत की पूर्व मुखिया मुनी देवी द्वारा जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण से हुई. आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह-संयोजक देवकीनंदन बेदिया ने वहां आयोजित सभा को संबोधित किया.

इस मौके पर नागेश्वर मुंडा, हीरोलाल मुंडा, मतलू करमाली, पंचम करमाली, प्रदीप मुंडा, अमर मुंडा, नारायण मुंडा सहित अनेक साथियों ने पुष्पांजलि देकर कहा कि आज भी अंग्रेजी शासन की तरह कॉरपोरेट हितों की रक्षा के लिए आदिवासियों को नक्सली घोषित कर दमन और हत्या की जा रही है, जिसके खिलाफ दूसरी आजादी की लड़ाई को तेज करना समय की जरूरत है.

8 जनवरी 2026 को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह की शहादत स्थल, ओरमांझी प्रखंड के चुटूपालू स्थित फांसीयाही बरगद वृक्ष पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और रामगढ़ में रैली निकाली गई. सरदार वल्लभ भाई पटेल चौक से शुरू हुई रैली शहीद स्थल पर पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई. वक्ताओं ने शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए किये गये संघर्ष को याद किया और वर्तमान सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान को कमजोर कर कॉरपोरेट शासन थोपने और मजदूर, किसान और आदिवासी विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने और दूसरी आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. इस अवसर पर आर.डी. मांझी, देवकीनंदन बेदिया, नागेश्वर मुंडा, सोहराय किस्कू, मनाराम मांझी, पच्चु राणा, हीरा गोप और सरयू बेदिया सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे.

9 जनवरी को बिरसा मुंडा के उलगुलान के दौरान वर्ष 1900 में खूंटी जिला के डोंबारी पहाड़ में अंग्रेजी सेना द्वारा किए गए हमले में शहीद हुए सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चों की स्मृति में पिरी, हेसला, ठाकुर गोड़ा आदि विभिन्न गांवों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए.

जन-अभियान के दौरान यह मांग प्रमुखता से उठाई गई कि जल, जंगल, जमीन और खनिज पर कॉरपोरेट लूट को तुरंत बंद किया जाए, ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण, खनन या परियोजना लागू न की जाए, आदिवासी क्षेत्रों में सशस्त्र अभियानों और सैन्यीकरण पर तत्काल रोक लगे तथा ग्राम सभा की सहमति के बिना लगाए गए सभी सुरक्षा कैंपों को हटाया जाए. इसके साथ ही आदिवासी युवाओं पर दर्ज यूएपीए और माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों, विचाराधीन कैदियों तथा कथित मुठभेड़ों की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई. पांचवीं अनुसूची, वन अधिकार कानून सहित सभी आदिवासी अधिकार संबंधी संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग दोहराई गई.

इस प्रकार यह जन-अभियान आदिवासी इतिहास के नरसंहारों और शहादतों की स्मृति को वर्तमान जन-संघर्षों से जोड़ने, कॉरपोरेट लूट और राज्य दमन के खिलाफ जनमत तैयार करने तथा आदिवासी समाज को संगठित कर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा हेतु दूसरी आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ.


17 January, 2026