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अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय का संघर्ष जारी है!

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय का संघर्ष जारी है!

19 वर्षीय अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी जिले के डोभ-श्रीकोट गांव के एक साधारण परिवार की रहने वाली लड़की थी, जिसने आजीविका के लिए ऋृषिकेश से लगते पौड़ी जिले के यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले गंगा भोगपुर में स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में 28 अगस्त 2022 में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की. यह रिजॉर्ट भाजपा नेता और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री के दर्जे पर काम कर चुके विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य द्वारा संचालित किया जाता था जो खुद भी भाजपा से जुड़ा हुआ था.

अंकिता भंडारी बमुश्किल 20 दिन ही इस रिजॉर्ट में नौकरी कर सकी थी. 19  सितंबर 2022 को उसकी गुमशुदगी की खबर आई. गुमशुदगी की पहली रिपोर्ट तो रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने ही दर्ज करवाई. यह रिपोर्ट रेगुलर पुलिस को नहीं बल्कि राजस्व पुलिस को दर्ज करवाई गयी. उत्तराखंड में अंग्रेजों के जमाने से यह व्यवस्था है कि पर्वतीय क्षेत्रों में पटवारी यानि लेखपाल को भी पुलिस शक्तियां प्राप्त हैं. चूंकि रिजॉर्ट जहां स्थित है, वो  इलाका राजस्व क्षेत्र में आता है और बाद में यह स्पष्ट हुआ कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य रेगुलर पुलिस से बचना भी चाहता था इसलिए गुमशुदगी की शिकायत उसने पटवारी को दी. अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी को जब अपनी बेटी के गुमशुदा होने की खबर मिली तो वे  ऋृषिकेश में लक्ष्मणझूला कोतवाली गए, मुनि की रेती कोतवाली गए और चीला पुलिस चौकी भी गए. सभी जगह मामले की गंभीरता को समझने के बजाय प्रकरण के राजस्व क्षेत्र का होने का बहाना बना कर उन्हें टाल दिया गया. जिस पटवारी यानि राजस्व निरीक्षक ने रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य की तरफ से अंकिता भंडारी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की, वो अंकिता भंडारी के पिता से सीधे मुंह बात करने को भी तैयार नहीं हुआ.

बहरहाल इसी बीच में यह मामला सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चर्चा में आने लगा. तब जिलाधिकरी पौड़ी ने मामले को राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को हस्तांतरित कर दिया. 24 सितंबर 2022 को ऋृषिकेश के नजदीक चीला बैराज में पुलिस और एसडीआरएफ को एक युवती का शव मिला, जिसकी शिनाख्त अंकिता भंडारी के पिता और भाई ने अंकिता के तौर पर की. इसी दिन उत्तराखंड सरकार ने डीआईजी पी. रेणुका देवी की अगुवाई में इस मामले में एसआईटी का गठन किया.

जांच के दौरान पता चला  कि 18 सितंबर 2022 को रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य अपने दो साथियों – सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ अंकिता भंडारी को चीला बैराज घुमाने ले गए और वहां उन्होंने अंकिता को बैराज में धक्का देकर मार डाला.

लेकिन हत्या की जो वजह सामने आई, उसने तो पूरे उत्तराखंड को गुस्से और विक्षोभ से भर दिया. अंकिता भंडारी के मित्र पुष्प्दीप ने पुलिस को उससे पहले अंकिता के साथ हुई उसकी व्हाट्स ऐप चैट के बारे में बताया. 17 सितंबर 2022 की इस चैट में अंकिता ने लिखा था कि पुलिकत आर्य का साथी अंकित गुप्ता उसके पास आया और उसने कहा कि 19 सितंबर को रिजॉर्ट में कोई  वीआईपी आने वाला है, उसको स्पेशल सर्विस देनी है, जिसके लिए वो वीआईपी, दस हजार रूपए तक दे देगा. उक्त चैट के अनुसार अंकित गुप्ता ने अंकिता से दो-तीन और लड़कियों का इंतजाम भी करने को कहा.

जांच में सामने आये घटनाक्रम के अनुसार अंकिता भंडारी ने ऐसा करने से इंकार कर दिया, वो रिजॉर्ट छोड़ कर जाना चाहती थी. पुलकित आर्य और उसके साथियों ने कुछ डरा-धमका कर और कुछ बहला-फुसला कर उसे रिजॉर्ट छोड़ कर जाने से रोक दिया. फिर वे उसे घुमाने ले गए और चीला बैराज में फेंक कर मार डाला और यह प्रदर्शित करने की कोशिश की कि वह खुद ही कहीं चली गयी है.

वीआईपी का मामला सामने आते ही स्पष्ट हो गया कि यह रिजॉर्ट ऊंचे, रसूखदार लोगों की ऐशगाह था, जहां जिस्मफरोशी को भी अंजाम दिया जा रहा था. अंकिता भंडारी के चैट से ही पता चलता है कि 13 सितंबर 2022 को भी इस रिजॉर्ट में तीन लड़कियां लायी गयी थी. लेकिन पुलिस ने इस मामले में जांच को आगे नहीं बढ़ाया.

वीआईपी एंगल सामने आते ही यह मांग होने लगी कि वीआईपी का खुलासा होना चाहिए. इस खुलासे से कुछ हद तक बौखलाई उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने प्रदर्शित किया कि वह बुलडोजर कार्यवाही से लोगों के गुस्से को ठंडा करने की कोशिश कर रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उस समय के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बाकायदा ट्वीट करके बुलडोजर कार्यवाही का ऐलान किया. हैरत की बात है कि बुलडोजर, रिजॉर्ट के सिर्फ उस कमरे पर चलाया गया, जिसमें अंकिता भंडारी रहती थी. जाहिर सी बात है कि यह सबूत नष्ट करने के लिए की गयी कार्यवाही थी.

यह मांग लगातार जोर पकड़ती रही कि इस प्रकरण में जिस वीआईपी को “स्पेशल सर्विस” देने से इंकार करने पर पुलिकत आर्य और उसके साथियों ने अंकिता भंडारी की हत्या कर दी, उस वीआईपी का खुलासा होना चाहिए. लेकिन इस मामले में उत्तराखंड सरकार और उसके द्वारा गठित पुलिस की एसआईटी खामोश ही रही.

30 मई 2025 को कोटद्वार की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडिशनल सेशन जज) रीना नेगी की अदालत ने तीन अभियुक्तों – पुलिकत आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुना दी. हत्या, सबूत मिटाने, महिला से छेड़छाड़ के अलावा अनैतिक व्यापार के लिए भी सजा सुनाई गयी. 160 पन्ने के इस फैसले में माना गया कि वीआईपी ही वो कारक है, जिसके कारण अंकिता भंडारी की हत्या की गयी.

लेकिन वीआईपी का खुलासा न होने के चलते उत्तराखंड के आम जनमानस ने यह महसूस किया कि इस प्रकरण में न्याय नहीं हुआ. हालांकि एक समय अंकिता भंडारी की माता श्रीमती सोनी देवी ने भाजपा के उत्तराखंड संगठन मंत्री अजय कुमार का नाम वीआईपी के तौर पर लिया, लेकिन इस बात पर भी भाजपा संगठन और सरकार ने खामोशी ही बरती.

दिसंबर 2025 के अंतिम दिनों में अंकिता भंडारी प्रकरण और उसमें वीआईपी के मामले पर एक अप्रत्याशित दायरे से खुलासा सामने आया. हरिद्वार जिले के ज्वालापुर (अनुसूचित जाति आरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी दूसरी पत्नी होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर का विवाद और सुलह-सफाई का मामला आये दिन, सोशल मीडिया की चर्चा बनता रहता था. दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में बेहद नाटकीय रूप से उर्मिला सनावर ने सुरेश राठौर के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो फेसबुक लाइव में सुनाया. उक्त ऑडियो में सुरेश राठौर, अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम लेते सुने जा सकते हैं, साथ ही राठौर, भाजपा के उत्तराखंड संगठन महामंत्री अजय कुमार का नाम भी उक्त ऑडियो में लेते हैं.

इस सनसनीखेज ऑडियो प्रसारण ने एक बार फिर अंकिता भंडारी प्रकरण में अधूरे न्याय के प्रश्न को सतह पर ला दिया. यह मांग होने लगी कि अब जबकि वीआईपी का नाम भाजपा से जुड़े लोगों ने ही ले लिया है तो वीआईपी बताए जा रहे लोगों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए. वीआईपी बताए गए दुष्यंत कुमार गौतम ने इस मामले में पहले चुप्पी और फिर लोगों को डराने का रास्ता चुना. दुष्यंत कुमार गौतम ने पहले 28 सोशल मीडिया एकाउंट्स और हैंडल्स के खिलाफ उत्तराखंड के गृह सचिव को पत्र भेजा. फिर उन्होंने सुरेश राठौर, उर्मिला सनावर और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों पर देहरादून में एफआईआर और दिल्ली उच्च न्यायालय में 2 करोड़ 1 सौ रुपये का मानहानि का दावा किया. हैरत की बात है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने बिना अन्य पक्षों को सुने ही पहली तारीख पर पक्षकार बनाए गए लोगों और पार्टियों को दुष्यंत गौतम के वीआईपी होने संबंधी सामग्री हटाने का एकतरफ फैसला सुना दिया.

इस मामले में उत्तराखंड की भाजपा सरकार असंजस और उलझन में ही नजर आई. अंकिता भंडारी के न्याय के लिए नए सिरे से उठ खड़े हुए आन्दोलन को पहले-पहल भाजपा ने विपक्ष की साजिश करार दिया. फिर उसके मंत्री और सांसद जवाब देने के लिए मीडिया के सामने आये पर पत्रकारों के तीखे सवालों ने उनके पांव उखाड़ दिए. अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच करने वाली एसआईटी का हिस्सा रहे एडिशनल एसपी शेखर सुयाल, भाजपा के राज्य सभा सांसद नरेश बंसल और स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया के सामने यह स्थापित करने की कोशिश की कि कोई वीआईपी था ही नहीं! अंकिता के चैट्स और अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्यायालय का फैसला भी कहता है कि हत्या तो वीआईपी को स्पेशल सर्विस न देने के कारण हुई. एसआईटी से जुड़े अफसर का वीआईपी से इंकार करना, एक तरह से अपनी ही जांच को नकारना था. मुख्यमंत्री द्वारा वीआईपी होने से इंकार करना, वीआईपी बताए जा रहे अपनी पार्टी के नेताओं को बचाने की कोशिश तो है ही, यह तो उन अपराधियों के भी जेल से बाहर आने का रास्ता सुगम बनाने की कोशिश है, जो हत्या के अपराध में उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं.

अंकिता भंडारी के न्याय और वीआईपी एंगल की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग को लेकर 4 जनवरी को मुख्यमंत्री आवास कूच हुआ, जिसमें हजारों-हजार की तादाद में लोग शामिल हुए और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद हुआ.

इस सब से दबाव में आई उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सीबीआई जांच की घोषणा की. लेकिन इस बीच संदिग्ध चरित्रों का इस मामले में प्रवेश भी सत्ता की शह पर होता रहा. अचानक बीच में लापता हुई उर्मिला सनावर, दर्शन भारती नाम के व्यक्ति के साथ प्रकट हुई. दर्शन भारती का इस प्रकरण से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा और बीते कुछ सालों से वे उत्तराखंड में साम्प्रदायिक नफरत फैलाने वाले प्रमुख व्यक्तियों में रहे हैं. सीबीआई जांच की घोषणा के बाद अचानक मालूम पड़ा कि पर्यावरणविद कहे जाने वाले पद्म श्री, पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई है. अनिल प्रकाश जोशी बीते कई वर्षों से सरकारी पर्यावरणवादी के तौर पर ही जाने जाते हैं. बीते तीन सालों से अंकिता भंडारी के न्याय की लड़ाई से उनका कोई सरोकार नहीं रहा है, कभी एक बयान तक उन्होंने नहीं दिया. लेकिन एकाएक एफआईआर दर्ज करवाना और सरकार का यह कहना कि यही एफआईआर सीबीआई को संदर्भित की जायेगी, ने इस प्रकरण में नए तरह के संदेहों को जन्म दिया है.

लोगों के विरोध के बाद उत्तराखंड पुलिस की तरफ से बयान दिया गया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता के पत्र को भी इसमें जोड़ दिया जाएगा. गौरतलब है कि 15 दिन तक इस मामले में चुप्पी बरतने के बाद जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मीडिया के सामने आये तो उन्होंने कहा कि वे अंकिता भंडारी के माता-पिता से पूछ कर तय करेंगे कि आगे क्या करना है. आनन-फानन में अंकिता भंडारी के माता-पिता को अगले दिन देहरादून लाया गया. उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखित में दिया कि वे इस प्रकरण में वीआईपी के खुलासे के लिए उच्चतम न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच चाहते हैं.

अंकिता भंडारी के माता-पिता के द्वारा यह लिख कर दिए जाने के बाद सीबीआई जांच की घोषणा हुई तो उनके पत्र को ही शिकायत का आधार बनाया जाना चाहिए था, लेकिन एक सत्ता परस्त व्यक्ति अनिल जोशी की एफआईआर को आधार बनाया जाना दर्शाता है कि भाजपा अपने दुष्कर्मी वीआईपियों को बचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

इस मामले से एक बार फिर भाजपा के चाल-चरित्र-चेहरा का खुलासा हो गया है. यह भी एक बार फिर दिखा कि बेटी बचाओ का नारा भले ही भाजपा देती हो, लेकिन व्यवहार में वो दुष्कर्म के आरोपी अपनी पार्टी के नेताओं को बचाने में पूरी ताकत लगा देती है.

देश में वो चाहे कुलदीप सेंगर हो, राम रहीम हों, आसाराम बापू हों, पहलवान बेटियों के यौन उत्पीड़न का आरोपी बृजभूषण शरण सिंह हों या बिलकिस बानो के बलात्कारी हों, सबके साथ भाजपा की सहानुभूति रही है. उत्तराखंड में सल्ट के मंडल अध्यक्ष, रुद्रपुर के पार्षद से लेकर नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष तक – दुष्कर्म के आरोपी हैं और भाजपा से हैं और उनके प्रति भाजपा का रवैया कोमल ही रहा है. हरिद्वार में तो भाजपा की महिला नेता ने अपनी ही बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म तक करवाया और इसके लिए वह जेल में है.

अंकिता भंडारी प्रकरण में यह साफ हुआ कि उत्तराखंड में भाजपा की अगुवाई में पर्यटन और रिजॉर्ट के नाम पर सफेदपोशों के लिए जिस्मफरोशी का कारोबार चल रहा है. उत्तराखंड के जल-जंगल-जमीन की लूट तो भाजपा राज में बदस्तूर जारी है और उनके सफेदपोश वीआईपी, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए घर से बाहर निकल रही युवतियों और महिलाओं को भी नहीं बख्श रहे हैं.

हाल ही में दुनिया से रुखसत हुए उत्तराखंड में वाम-जनवादी आन्दोलन की एक प्रमुख शख्सियत कॉमरेड राजा बहुगुणा अक्सर अपने भाषणों में कहते थे कि उत्तराखंड में पर्यटन का थाईलैंड वाला मॉडल नहीं पनपना चाहिए. अंकिता भंडारी प्रकरण और उसमें वीआईपी की संलिप्तता से साफ है कि अब पर्यटन के उस थाईलैंडी मॉडल, जिसमें स्त्री सिर्फ एक जिस्म है, जिसकी भोग के लिए कीमत लगाई जाती है, से उत्तराखंड को बचाने की लड़ाई तत्काल लड़नी होगी.

अंकिता भंडारी प्रकरण में यह भी स्पष्ट है कि न्याय की लड़ाई में सड़क के संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है. एसआईटी से सीबीआई तक का रास्ता सड़क के संघर्षों से ही तय हुआ है और आगे भी न्याय होगा तो तभी होगा जब सड़कें न्याय के नारों से गूंजती रहेंगी. 

17 January, 2026