वर्ष 34 / अंक-35 / केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा क्षेत्राय फेडरेशनों/सं...

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा क्षेत्राय फेडरेशनों/संघों के संयुक्त मंच की घोषणा 12 फरवरी 2026 को होगी आम हड़ताल

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा क्षेत्राय फेडरेशनों/संघों के संयुक्त मंच की घोषणा 12 फरवरी 2026 को होगी आम हड़ताल

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) तथा क्षेत्राय फेडरेशनों/संघों के संयुक्त मंच द्वारा 23 दिसंबर 2025 : निम्नलिखित वक्तव्य प्रेस को जारी किया गया है.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) तथा क्षेत्रीय फेडरेशनों/संघों के संयुक्त मंच ने दमनकारी श्रम संहिताओं तथा केंद्र सरकार द्वारा जनता के अधिकारों और हकों पर किए जा रहे बहुस्तरीय हमलों के खिलाफ 12 फरवरी 2026 को आम हड़ताल का आह्वान करने का संकल्प लिया है.

हड़ताल की तिथि को औपचारिक रूप से 9 जनवरी 2026 को एचकेएस भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन में अनुमोदित किया जाएगा.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा क्षेत्रीय फेडरेशनों/संघों का संयुक्त मंच 22 दिसंबर 2025 को हाइब्रिड मोड में मिला. बैठक में इस अंतराल के दौरान संसद के भीतर और बाहर मोदी सरकार द्वारा किए गए खुले हमलों पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया.

“भारत के रूपांतरण हेतु परमाणु ऊर्जा के सतत उपयोग और उन्नयन (शांति) अधिनियम”, जो निजी और विदेशी कॉर्पारेट धुरंधरों को लाभ के उद्देश्य से अत्यंत जोखमपूर्ण और खतरनाक परमाणु ऊर्जा उत्पादन में प्रवेश की अनुमति देता है; इसमें दुर्घटना/आपदा की स्थिति में विदेशी और राष्ट्रीय उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की देयता समाप्त कर दी गई है, यह निस्संदेह देश की परमाणु सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला है.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को विकसित भारत, रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 से प्रतिस्थापित कर दिया गया है. यह नया कानून, जब देश भीषण बेरोजगारी से जूझ रहा है, अधिकार-आधारित ग्रामीण रोजगार गारंटी को केंद्रीय प्राधिकार के विवेकाधीन बना देता है और वित्तीय बोझ राज्यों पर डाल देता है. साथ ही, कटाई के मौसम में इस अधिनियम के संचालन पर रोक लगाकर जमींदारों को सस्ता श्रम सुनिश्चित करता है.

बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दे दी गई है, जिससे व्यावहारिक रूप से विदेशी कंपनियों को घरेलू बीमा कंपनियों पर कब्जा करने का अधिकार मिल जाता है.

केंद्र सरकार ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किया है, हालांकि इस सत्र में इसे पारित नहीं किया जा सका.

सरकार ने मसौदा बीज विधेयक तथा मसौदा विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 जारी किए हैं. यदि ये विधेयक प्रस्तुत होकर पारित होते हैं, तो कृषि, घरेलू एवं एमएसएमई बिजली उपभोक्ताओं तथा देश के सार्वजनिक बिजली क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने देश के उत्तरी हिस्से में मौजूदा पर्यावरणीय संकट, दिल्ली-एनसीआर में असहनीय प्रदूषण तथा सर्वोच्च न्यायालय के उस खतरनाक आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसमें अरावली पर्वतमाला के लगभग 90% हिस्से के विनाश की अनुमति दी गई है – जबकि अरावली उत्तरी भारत को थार मरुस्थल के विस्तार से बचाने वाली ढाल रही है.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनें इन सभी दमनकारी हमलों के खिलाफ संघर्षरत जनता और आंदोलनों के प्रति मजबूत एकजुटता व्यक्त करती हैं.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) को आम हड़ताल के लिए उसके बिना शर्त समर्थन हेतु सलाम करती हैं.

राष्ट्रीय विद्युत कर्मचारी एवं अभियंता समन्वय समिति (NCCOEEE) ने भी उसी दिन पूरे बल और दृढ़ संकल्प के साथ अपना क्षेत्रीय राष्ट्रीय हड़ताल आयोजित करने की घोषणा की है.

NCCOEEE, संयुक्त मंच (JPCTUs) और SKM की संयुक्त बैठक ने 23 दिसंबर 2025 को शांति अधिनियम के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया.

जनवरी और फरवरी 2026 में विद्युत कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के साथ संयुक्त बैठकें और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

SKM ने बीज विधेयक 2025, विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025, वीबी-ग्रामग अधिनियम, 2025 तथा अन्य मांगों के समर्थन में 16 जनवरी 2026 को गांव एवं ब्लॉक स्तर पर प्रतिरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया है. केंद्रीय ट्रेड यूनियनें इस कार्रवाई में पूरी ताकत के साथ भाग लेंगी.

श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया गया है और सरकार अपनी समस्त संस्थागत मशीनरी, मीडिया तथा सार्वजनिक क्षेत्र के प्रबंधन का उपयोग कर इनके पक्ष में सकारात्मक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन मजदूर सरकार द्वारा एकतरफा थोपे गए इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष करने और इन्हें रद्द करवाने के लिए संकल्पबद्ध हैं.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की बैठक ने 12 फरवरी 2026 को “एक दिवसीय हड़ताल” आयोजित कर मोदी सरकार को कड़ा संदेश देने का निर्णय लिया है.

हड़ताल की तिथि का औपचारिक अनुमोदन तथा विस्तृत कार्ययोजना 9 जनवरी 2026 को एचकेएस सुरजीत भवन, नई दिल्ली, दोपहर 02:00 बजे आयोजित होने वाले राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन में तैयार की जाएगी.

यदि सरकार श्रम संहिताओं के अंतर्गत नियमों की अधिसूचना को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखती है और संहिताओं को निरस्त नहीं करती है, तो केंद्रीय ट्रेड यूनियनें क्षेत्रीय प्रतिरोध कार्रवाइयों के साथ-साथ कई दिनों की आम हड़ताल सहित और भी कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगी.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनें समस्त मजदूर वर्ग और मेहनतकश जनता के अन्य तबकों से आ“वान करती हैं कि वे आगामी आम हड़ताल के लिए तैयार हों, व्यापक अभियान चलाएं और अपने संगठनों को उन्नत संघर्ष के लिए तैयार करें.

हम संसद में सभी विपक्षी दलों तथा जनता के विभिन्न वर्गों – विशेषकर युवाओं और छात्रों – से अपील करते हैं कि वे कामगारों के मूल अधिकारों की रक्षा और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को बचाने के लिए इस हड़ताल के समर्थन और एकजुटता में आगे आएं.

जारीकर्ता

इंटक, ऐटक, एचएमएस, सीटृ, एआइयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, ऐक्टू, एलपीएफ, यूटीयूसी एवं क्षेत्रीय फेडरेशन/संघ.

27 December, 2025