वर्ष 34 / अंक-28 / जो अन्न वस्त्र उपजाएगा, अब वही कानून बनाएगा, शासन...

जो अन्न वस्त्र उपजाएगा, अब वही कानून बनाएगा, शासन चलाएगा

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संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार के द्वारा आसन्न बिहार विधानसभा चुनाव में मौजूदा एनडीए सरकार को सत्ता से बेदखल करने के आह्वान के साथ 15 सितंबर को गेट पब्लिक लाइब्रेरी में किसान महापंचायत का आयोजन किया गया.

महापंचायत की अध्यक्षता अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सह-सचिव कृपानारायण सिंह, अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के नन्द किशोर सिंह, बिहार राज्य किसान सभा (जमाल रोड) के राजेंद्र प्रसाद सिंह, जय किसान सभा के नेता ऋषि आन्द, ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य महासचिव इन्द्रदेव राय, बिहार राज्य किसान सभा (अजय भवन) के राज्य अध्यक्ष सीताराम शर्मा ने संयुक्त रूप से की. उपस्थित लोगों का स्वागत क्रांतिकारी किसान यूनियन के संजय श्याम ने किया जबकि नन्द किशोर सिंह ने आलेख प्रस्तुत किया.

किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव सह सांसद राजाराम सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा (कैनिंग रोड) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पी कृष्णाप्रसाद और जय किसान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविक साहा ने कहा कि आज बिहार के किसान केन्द्र और राज्य सरकार की उपेक्षा का सामना कर रहे हैं. बिहार की करीब तीन-चौथाई आबादी कृषि पर आश्रित है. फिर भी बिहार के किसानों की स्थिति देश में सबसे दयनीय बनी हुई है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एपीएमसी अधिनियम को समाप्त कर दिया था जिसके बाद से कृषि मंडी व्यवस्था ठप्प हो गई. कृषि मंडी के बिना सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सिर्फ कागजी आंकड़ा बन कर रह गया है. पैक्स व्यवस्था के कारण किसानों को भ्रष्टाचार और विलम्बित भुगतान से जुझना पड़ता है. बिहार में सिर्फ 5% किसानों को एमएसपी का लाभ मिल पाता है, जबकि पंजाब और हरियाणा में यह आंकड़ा 90% से अधिक है. एमएसपी न मिलने के कारण बिहार के किसानों को सिर्फ धान की फसल पर 10 हजार करोड़ रूपये का नुकसान होता है.

बिहार राज्य किसान सभा के विनोद कुमार, अखिल भारतीय किसान महासभा के शिवसागर शर्मा, बिहार राज्य किसान सभा (अजय भवन) के रविन्द्र नाथ राय, ऑल इंडिया खेत मजदूर किसान संगठन के कृष्णदेव साह, अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के अशोक बैठा, क्रांतिकारी किसान यूनियन के अर्जुन प्रसाद सिंह, जय किसान आंदोलन के मथुरा सिंह, बिहार किसान समिति के पुकार, एनएपीएम के उदयन राय, जल्ला किसान संघर्ष समिति के शंभुनाथ मेहता, और ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के विनोद झा ने कहा कि बढ़ती आय और घटती आय से खेती घाटे का सौदा बन गई है. बाढ़ और सुखाड़ से फसल की निरंतर क्षति हो रही है पर राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा लागू तक नहीं है. बिना वैकल्पिक व्यवस्था के गरीबों आदिवासियों को उन्हें घर-बार व जमीन स बेदखल किया जा रहा है.

किसानों की समस्याओं को उजागर करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा की बिहार इकाई ने कई बार प्रदर्शन, धरना, मार्च का आयोजन किया. जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपा गया और उनके सामने किसानों की बातें रखी गईं. कई बार तो सरकार ने आश्वासन भी दिया. 

लेकिन बिहार की नीतीश कुमार और केन्द्र में सत्तासीन भाजपानीत नरेन्द्र मोदी की डबल इंजन की सरकार का रवैया किसान-विरोधी बना रहा. फसल का उचित दाम या भूमि का उचित मुआवजा जैसी जायज मांगों को नजरअंदाज किया गया. अपना हक मांगने पर किसानों को चौसा में उनके घरों में घुस कर पीटा गया. सरकारी अधिकारी किसानों को अपराध का कारण बताने की जुर्रत करते हैं.

बिहार आन्दोलन की भूमि है. यहीं महान किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किसानों को एकजुट किया था और नारा दिया ‘जो अन्न, वस्त्र उपजाएगा, अब वो कानून बनाएगा, ये भारतवर्ष उसी का है, अब वही शासन चलाएगा.’ अब वक्त आ गया है कि हम बिहार के किसान किसान आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को याद करें और बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सत्तारूढ़ किसान-मजदूर विरोधी, फासीवादी, दमनकारी सरकार को आसन्न विधानसभा चुनाव में सत्ता को बेदखल करने का हर संभव प्रयास करें.

इसकी समाप्ति बिहार राज्य किसान सभा (जमाल रोड) के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुई.

20 September, 2025