वर्ष 35 / अंक - 07 / यूजीसी रेगुलेशंस समता आंदोलन की देशव्यापी शुरूआत :...

यूजीसी रेगुलेशंस समता आंदोलन की देशव्यापी शुरूआत : ‘अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी’ का गठन

यूजीसी रेगुलेशंस समता आंदोलन की देशव्यापी शुरूआत : ‘अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी’ का गठन

8 फरवरी को दिल्ली के सुरजीत भवन में विपक्षी छात्रा संगठनों के राष्ट्रीय नेतृत्व, शिक्षकों, सार्वजनिक बुद्धिजीवियों और सामाजिक आंदोलनों के नेताओं ने मिलकर ‘अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी’ का गठन किया.

इस मंच के घटक संगठनों व नेताओं में शामिल हैं – डॉ. जितेंद्र मीणा, डॉ. लक्ष्मण यादव, महेश चौधरी, भंवर मेघवंशी, जेएनयूएसयू, आइसा, एसएफआई, एनएसयूआई, एआईएसएफ, एमएसएफ, आरवाइए, डीएसएफ, एएसए, एआईओबीसीएसए, सीआरजेडी, कलेक्टिव, बापसा, सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार, रिहाई मंच, सोशल जस्टिस आर्मी, एफटीआईआई छात्रा संघ अध्यक्ष, ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति, गोंडवाना छात्र संगठन, भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा, जय आदिवासी युवा शक्ति एवं अन्य.

बैठक की अध्यक्षता डॉ जितेंद्र मीणा ने की. उन्होंने विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी, और ओबीसी छात्रों पर हो रहे ऐतिहासिक उत्पीड़न को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि ‘सैकड़ों साथियों ने विश्वविद्यालयों में जातिगत उत्पीड़न के कारण अपनी जान गंवाई. उनके दर्द और ऐतिहासिक उत्पीड़न को देखते हुए यूजीसी ने भेदभाव विरोधी दिशानिर्देश जारी किए. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से एक अनावश्यक भय का माहौल बनाया गया और अंततः अदालत के जरिए इन दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी गई.’

जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति ने मीडिया और ब्राह्मणवादी ताकतों द्वारा गढ़ी गई भ्रामक व मनगढ़ंत कहानी पर बात रखी. उन्होंने कहा कि ‘एक ऐसा कदम जो केवल न्यूनतम सकारात्मक कार्रवाई के लिए था उसे एक समुदाय के लिए खतरे के रूप में पेश किया गया. संभावित दुरुपयोग के नाम पर झूठ को बार-बार दोहराया गया और भय का माहौल बनाया गया.’ अदिति ने रोहित एक्ट के आधार पर विश्वविद्यालयों में सामाजिक न्याय के दिशानिर्देशों को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि ‘इस संघर्ष में जेएनयूएसयू अग्रिम पंक्ति में रहेगा.’

डॉ लक्ष्मण यादव ने मंडल आंदोलन के दौर को याद करते हुए वर्तमान हालात से उसकी तुलना की. उन्होंने कहा कि ‘अदालतें लगातार सकारात्मक कार्रवाई को रोकने में भूमिका निभा रही हैं, जैसे कि एसआईआर जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधना और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को उसी उच्च न्यायालय द्वारा आसानी से मंजूरी मिल जाना.’ उन्होंने मीडिया की पक्षपाती भूमिका की आलोचना करते हुए कहा कि ‘चंद मुट्टी भर लोगों के यूजीसी विरोध को बड़ा आंदोलन दिखाया गया जबकि आज इलाहाबाद, पटना, दिल्ली सहित देश में कई जगह हजारों छात्र सड़कों पर हैं और मीडिया उन्हें नजरअंदाज कर रहा है.’

अखिल भारतीय दलित लेखिका मंच से डॉ. हेमलता महेश्वर ने कहा कि ‘जाति उन्मूलन की परियोजना भारत के संवैधानिक प्रोजेक्ट की बुनियाद है और विश्वविद्यालयों को इसमें मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए.’

अन्य वक्ताओं में अरावली बचाओ मंच से महेश चौधरी, आइसा से नेहा, एसएफआई से सूरज एलामोन, एआईएसएफ से विराज, एनएसयूआई से अखिलेश कुमार, बापसा से क्रांति कुमार, जेएनयूएसयू सचिव सुनील यादव, डीएसएफ से हार्दिक, कलेक्टिव से प्रियम, एमएसएफ से अहमद साजू, एयूडीएससी से शरण्या, ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति से राजेंद्र सहित कई अन्य लोग शामिल रहे.

फोरम ने जेएनयूएसयू के निलंबित पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष के साथ एकजुटता व्यक्त की और कैंपस लोकतंत्र पर हो रहे तानाशाही हमलों की निंदा की.

फोरम ने 13 फरवरी को यूजीसी विनियमों के खिलाफ अखिल भारतीय विरोध का आह्वान किया जिसके तहत देश के 100 से अधिक विश्वविद्यालय परिसरों और सैकड़ों शहरों में विरोध सभाएं हुईं.

11 फरवरी 2026 पटना में भी अंबेडकर सेवा एवं शोध संस्थान, दरोगा राय पथ, ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी की बिहार स्तरीय बैठक एवं प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई. बैठक में बिहार के विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, एक्टिविस्ट एवं विभिन्न जिलों के नेतृत्वकर्ता शामिल हुए. प्रेस वार्ता को आइसा महासचिव प्रसेनजीत कुमार, अखिल भारतीय अतिपिछड़ा संघर्ष मोर्चा के संयोजक मंजीत आनंद साहू, सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के सुबोध यादव, राजेश शर्मा, ‘हम भारत के लोग’ संगठन से विशु यादव, संतोष सिंह, प्रो. विनय भूषण, समाजवादी छात्र सभा से सूरज यादव, छात्रा नेता निशांत यादव, जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष धनंजय, देवशंकर आर्या, कुमार दिव्यम, मनीषा यादव, सबीर कुमार, विकास यादव , सुधीर शर्मा सहित कई अन्य नेताओं  एवं एक्टिविस्टों  ने संबोधित किया. 22 फरवरी को पटना में राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित होगा.

10 फरवरी को झारखंड की राजधानी रांची स्थित श्याम प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के जैकब हॉल में विभिन्न छात्रा संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई.

बैठक में झारखंड में अखिल भारतीय समता मंच के तहत आगे के कार्यक्रमों और आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की गई. बैठक में पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल समिति का गठन किया गया जिसमें दयाराम, संजना मेहता, बबलू मंडल, ऐहतेशाम प्रवीण व शहनवाज हुसैन शामिल हैं.



14 February, 2026