विगत कुछ सालों से 25 जून को मोदी सरकार द्वारा संविधान हत्या दिवस मनाया जा रहा है. क्या कभी किसी ने सोचा था कि इसी दिन को चुनकर बिहार में मताधिकार को छीनने की साजिश रची जाएगी? लोगों को अब यह बात समझ आने लगी है कि जिस तरह नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन के जरिए मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ी, उसी तरह आज वोटबंदी और वोटचोरी के जरिए लोकतंत्र, देश की पूरी चुनावी व संसदीय प्रणाली को खत्म करने की साजिश हो रही है.
लेकिन बिहार ने एक बार फिर आंदोलन का शंखनाद कर दिया है. आंदोलन में इतनी बुलंदी है कि ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अब पूरे देश का नारा बन गया है. पहले जब हमने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया था, तब संघ परिवार के लोग कहते थे कि ‘हम भी चौकीदार हैं’. लेकिन इस बार, जब पूरा देश ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ कह रहा है, तो संघ परिवार यह कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा कि उनका पूरा कुनबा ‘वोट चोर’ है.
2 जुलाई को हमलोग चुनाव आयोग से मिले थे, तब श्री ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार के 20 प्रतिशत लोग बाहर रहते हैं, उन्हें बाहर ही वोट डालना चाहिए. तब ही हमें समझ में आ गया कि बिहार में डेढ़ से दो करोड़ लोगों का नाम मतदाता सूची से काटने की साजिश है.
लेकिन, आप लोगों के आंदोलन के चलते यह संख्या 65 लाख पर आकर रुकी. फिर भी लाखों लोगों के साथ अन्याय हुआ. किसी को मुर्दा घोषित कर दिया गया, किसी को बाहरी. कितनी महिलाओं का नाम काटा गया! बांग्लादेशी का डर दिखाकर 3 लाख लोगों को नोटिस थमा दिए गए कि उनके दस्तावेज भरोसेमंद नहीं हैं.
हमारी यात्रा के दौरान एक बात स्पष्ट दिखी – बिहार की जनता ने मन बना लिया है कि इस वोटचोरी को रोकना है और वोट का सही इस्तेमाल करके डबल इंजन सरकार को गद्दी से उतारना है.
भाजपा बौखलाहट में कांग्रेस के दफ्तर पर हमला कर रही है. नीतीश कुमार जो पहले कहते थे कि एक यूनिट भी बिजली मुफ्त नहीं देंगे, अब कह रहे हैं कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली देंगे. सामाजिक सुरक्षा पेंशन 400 रु. से 1100 रु. कर देने की बात हो रही है, महिलाओं के खाते में 10,000 रु. डालने का वादा भी किया जा रहा है.
पर याद रखिए, दो लाख रु. देने का वादा भी किया गया था गरीब परिवारों को, एक पैसा भी नहीं मिला. अब 10,000 रु. का झुनझुना थमाया जा रहा है, जो माइक्रोफाइनेंस कंपनियां तुरत हड़प लेंगी.
जरूरत है कि महिलाओं को कर्ज से राहत मिले, उन्हें नियमित रोजगार मिले, 200 यूनिट बिजली मुफ्त मिले.
इन्हीं मुद्दों के साथ इंडिया गठबंधन आपके बीच है. यह चुनाव बदलाव का चुनाव है. ‘बदलो सरकार, बदलो बिहार’ अब जन-जन का नारा बन चुका है. पूरे देश की नजर बिहार पर है. ये तो अंगड़ाई है, आगे लड़ाई जारी है.