वर्ष 35 / अंक - 05 / विस्थापन विरोधी आंदोलन की जीत

विस्थापन विरोधी आंदोलन की जीत

विस्थापन विरोधी आंदोलन की जीत

गया जिला में पुराने रेल लाईन से अलग ईस्ट-वेस्ट डेडीकेटेड फ्रंट कॉरिडोर (पीपी) का निर्माण किया जा रहा है. यह नई रेल लाईन सिर्फ माल ढूलाई के लिए बनायी जा रही है. यह गया जंक्शन और शहर के बाहर से होकर गुजरेगी और मानपुर जंक्शन के बाद से दिल्ली-हावड़ा मेन रेल लाईन के समानांतर गुजरेगी.

इस रेल लाईन के निर्माण के कारण बहुफसली खेती की जमीन और बड़ी संख्या में पूर्वजों से बने आवास को अधिग्रहण किया गया है. खतियानी रैयतों को मुआवजा के सवाल पर किसानों ने शुरुआती आंदोलन किया था लेकिन रैयतों को आज भी सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ रहा है.अन्य इलाकों में बसे गरीब-भूमिहीन परिवारों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा रहा है.

मानपुर अंचल/प्रखंड अंतर्गत बुनियादगंज थाना क्षेत्र में हमारे काम-काज के प्रभाव वाले इलाके में लगभग 30 एकड़ भूमि पर राजपूत जाति के स्थानीय दबंग-सामंती परिवारों ने दखल कर रखा था और वे उस पर खेती करवाते थे. इसी भूखंड के एक हिस्से पर चिरारी (मुर्दघट्टी) था. मानपुर शहर और आसपास के कुछ गांवों के लोग यहां मृतकों को दफनाने-जलाने का काम करते थे. लेकिन एक भूमि माफिया-अपराधी सुरेश सिंह ने इस मुर्दघट्टी की जमीन पर हल चलाकर उसे कब्जा करना चाहा था. लेकिन हल चलने से एक दिन पहले दफन किये गये एक पांच वर्षीय बच्चे का शव कब्र से ऊपर आ गया. इस घटना से जनता में आक्रोश भड़क उठा और सुरेश सिंह द्वारा भूमि कब्जा के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गया. भाकपा(माले) ने इस भूमि आंदोलन का नेतृत्व किया था. जब आंदोलन तेज हुआ तो उसके दबाव में प्रशासन ने जमीन की कागजी पड़ताल की. जांच-पड़ताल में कागजी आधार पर सिर्फ एक व्यक्ति का तीन एकड़ 49 डिसमिल जमीन का रैयती थी.

चूंकि यह जमीन सरकारी गैरमजरूआ निकली इसलिए भाकपा(माले) की अगुआई में आंदोलन ने जोर पकड़ लिया और सन् 2000 में मुर्दघट्टी की जमीन को छोड़कर शेष 24 एकड़ जमीन पर करीब तीन सौ गरीब परिवारों को बसा दिया गया. इस नये नगर का नामकरण पार्टी के दिवंगत जिला सचिव कामरेड ब्रजेश के नाम से ‘ब्रजेश नगर’ रखा गया था. जोड़ा मस्जिद, मानपुर का यह नया इलाका में गया नगर निगम क्षेत्र में है. तब से ही जमीन पर कानूनी हक परचा-आवास देने के सवाल पर आंदोलन चलता रहा है.

यह नई रेल लाईन इस जमीन पर बसे गरीब-भूमिहीन परिवारों के घरों के बीच से गुजरनी है जिसके कारण कुल 76 परिवारों को विस्थापित होना पड़ रहा है. इसकी भनक लगते ही भाकपा(माले) और शहरी गरीब मोर्चा के बैनर से उनके पुनर्वास के सवाल पर आंदोलन शुरू हो गया.

इसी बीच 15 जनवरी 2026 को  एसडीएम, डीएसपी, अंचल अधिकारी, मुफ्फसिल और बुनियादगंज थानाध्यक्ष भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ ब्रजेशनगर आ पंहुचे. पार्टी नेताओं के नेतृत्व में जनता भी प्रतिरोध के लिए जम गई. अधिकारयों से वार्ता के बाद सभी विस्थापित परिवारों को को बगल के शादीपुर पंचायत के मौजा गंगटी में वासभूमि का परचा, प्रधानमंत्री आवास, सामुदायिक भवन, सड़क-बिजली पहुंचाने का आश्वासन मिलने के बाद ही दन परिवारों के मकानों को गिराने की इजाजत दी गई. तत्काल 18 जनवरी 2026 को 55 दलित-महादलित परिवारों को जमीन का परचा मिल भी गया और शेष 21 अन्य परिवारों को जो अतिपिछड़ा और सामान्य जाति के अतिनिर्धन है, उसके स्वीकृति के लिए जिलाधिकारी के पास फाइल अग्रसारित की गयी है. विस्थापितों को ठंड से बचने के लिए तत्काल सभी परिवारों को पर्याप्त प्लास्टिक और कम्बल भी दिलवाया गया है. इस प्रकार किसी रेल परियोजना से विस्थापन के कारण सरकारी जमीन पर बसे गरीबों को पुनर्वास के लिए जनता की जीत का एक नया अनुभव हासिल हुआ है.

– निरंजन कुमार

31 January, 2026