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वोटर अधिकार यात्रा : चुनाव चोरों के खिलाफ जंग का ऐलान, बदलाव का संदेश

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एसआइआर के जरिए हमारे वोट के अधिकार पर अब तक के सबसे बड़े हमले, और बिहार में बीस वर्षों से जमी जर्जर, विफल और दमनकारी एनडीए सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के आह्वान के साथ इंडिया गठबंधन की – वोटर अधिकार यात्रा – रोज नए उफान पर है. समाज के सभी तबकों के लोग इससे लगातार जुड़ते जा रहे हैं और यह एक जनांदोलन में तब्दील होती जा रही है.

17 अगस्त को सासाराम के सुअरा हवाई अ्ड्डा मैदान से शुरू हुई यह यात्रा औरंगाबाद, गया, हिसुआ, नवादा, बरबीघा, शेखपुरा होते हुए 21 अगस्त की रात मुंगेर पहुंच चुकी है. 22 अगस्त की अहले सुबह यह यात्रा मुंगेर से भागलपुर की ओर रवाना हो चुकी है. 13 दिनों में 1300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यह यात्रा बिहार के कई जिलों से गुजरती हुई एक सितंबर को पटना पहुंचेगी और एक बड़े कार्यक्रम के साथ इसका समापन होगा.

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चुनाव आयोग की साख पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग चुके हैं. एसआइआर की प्रक्रिया के तहत बिहार के 65 लाख से अधिक मतदाताओं को अवैध तरीके से मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है. यह चुनावी चोरी की संगठित और सोची-समझी साजिश है, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलना है. लेकिन अब इंडिया गठबंधन ने इस साजिश के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान कर दिया है. जनता का समर्थन इस लड़ाई को अभूतपूर्व ऊर्जा और वैधता दे रहा है.

यात्रा के रास्ते में अनेक ऐसे मतदाताओं से भेंट हो रही है, जिनके नाम बेवजह सूची से हटा दिए गए हैं. ये सारे लोग अपने दस्तावेजों और शिकायतों के साथ यात्रा में शामिल नेताओं से संपर्क कर रहे हैं. सच कहा जाए तो यह यात्रा अब एक मंच बन चुकी है, जहां जनता अपनी व्यथा, अपनी मांगें और अपने सपनों को साझा कर रही है. एक ओर एसआइआर की साजिश के खिलाफ प्रतिरोध है, तो दूसरी ओर बीस वर्षों की कथित डबल इंजन सरकार की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त जनता का गुस्सा भी इस आंदोलन में साफ झलक रहा है. खासकर, स्कीम वर्कर्स समूह – आशा, रसोइया, अतिथि शिक्षक, मानदेय पर काम करने वाले समूह, जिनके साथ एनडीए सरकार ने लगातार छल किया है, इस यात्रा को अपना जबरदस्त समर्थन दे रहे हैं.

आज जब देश पर हर दिन फासीवाद का हमला तेज होता जा रहा है, तब पूरे देश की निगाहें आज बिहार पर टिकी हुई हैं. क्या बिहार एक बार फिर तानाशाही के अंधकार में रोशनी की किरण बनकर उभरेगा? क्या इस बार भी बिहार की जनता अपनी ऐतिहासिक भूमिका फिर निभा पाएगी? यह यात्रा उन उम्मीदों को साकार करता दिख रहा है. इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं – श्री राहुल गांधी, श्री तेजस्वी यादव, का. दीपंकर भट्टाचार्य, श्री मुकेश सहनी का एक साथ कदमताल बिहार में बदलाव की नई उम्मीदों को जन्म दे रहा है. तिरंगे, लाल और हरे झंडों की लहरों के बीच यह काफिला जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, वह एक नया इतिहास रच रहा है. जनता का मिलता अभूतपूर्व समर्थन इस बात की गवाही दे रहा है कि बिहार में सरकार बदलने वाली है, बिहार बदलने वाला है.

भाकपा-माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने यात्रा के उद्देश्य को बहुत स्पष्ट और प्रभावी ढंग से रेखांकित किया है – यह यात्रा वोट के अधिकार को बचाने की भी लड़ाई है और बीस वर्षों की विफल, जनविरोधी सरकार को बदलने की भी. दोनों संदेश इस यात्रा के मूल में हैं, और इसी वजह से यह यात्रा मील का पत्थर साबित हो रही है.


वोटर अधिकार यात्रा, यात्रा नहीं आंदोलन है : दीपंकर भट्टाचार्य

17 अगस्त को सासाराम के सुअरा हवाई अड्डा मैदान से यात्रा का विधिवत उद्घाटन एक विशाल जनसभा से हुआ, जिसमें – वोट चोर, गद्दी छोड़ और बदलो बिहार, बदलो सरकार – जैसे नारे गूंजते रहे. सासाराम की सभा में इंडिया गठबधंन के सभी बड़े नेता जुटे. यात्रा के अगुवा नेताओं के अलावा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सीपीएम की नेता सुभाषिणी अली सहित सीपीआई-सीपीएम के नेताओं ने सभा को संबोधित किया. भाकपा-माले के दोनों सांसद का. राजाराम सिंह और का. सुदामा प्रसाद, राज्य सचिव का. कुणाल, काराकाट विधायक का. अरुण सिंह, डुमरांव विधायक का. अजीत कुमार कुशवाहा, पोलित ब्यूरो सदस्य का. अमर, एमएलसी का. शशि यादव, लोकयुद्ध के संपादक का. संतोष सहर, अरवल विधायक का. महानंद सिंह, पूर्व विधायक और खेग्रामस के राज्य अध्यक्ष का. मनोज मंजिल समेत सासाराम, बक्सर और कैमूर जिलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या झंडा-बैनर के साथ जनसभा में शामिल थे.

सासाराम की सभा में शामिल होने के लिए माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में माले नेताओं का काफिला पटना से निकला. आरा शहर के अलावा नासरीगंज में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका शानदार स्वागत किया. सासाराम के सुअरा हवाई अड्डा के पास किसान महासभा और इंसाफ मंच के लोगों ने फूल-माला के साथ उनका स्वागत किया. सासाराम से निकली यात्रा पहले दिन डेहरी ऑन सोन होते हुए अंबा-कुटुम्बा तक पहुंची. दूसरे दिन 18 अगस्त को भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य का काफिला देवकृति मैरेज हॉल, औरंगाबाद से निकला. उनके साथ विधान परिषद सदस्य शशि यादव, पोलितब्यूरो सदस्य अमर, अगिआंव के पूर्व विधायक का. मनोज मंजिल, केंद्रीय कमेटी सदस्य संतोष सहर तथा घोषी के विधायक रामबली सिंह यादव, औरंगाबाद जिला सचिव मुनारिक राम सहित दर्जनों नेता और कार्यकर्ता शामिल थे.

दिन की शुरुआत से पहले संवाददाताओं से बात करते हुए का. दीपंकर ने कहा कि यह यात्रा एक महज रूट तय करने वाली राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और संविधान पर हो रहे सबसे बड़े हमले के खिलाफ उठ खड़े होने का जनआंदोलन है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि एसआइआर प्रक्रिया के जरिए बिहार के 65 लाख गरीब, दलित, पिछड़े, मुस्लिम और प्रवासी मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करना भाजपा की सुनियोजित साजिश है. लाखों प्रवासी मजदूर, जो वर्षों से बिहार के वोटर रहे हैं, आज उन्हें बाहरी घोषित किया जा रहा है. जीवित मतदाताओं को मृतक दिखा दिया गया है. जनता अब इस अन्याय को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है और यही भावना इस यात्रा को ऊर्जा दे रही है.

देव, रफीगंज, गुरारू, खैरा, अहियापुर, सुल्तानपुर, पंचाननपुर होते हुए यात्रा जब गयाजी पहुंची, तब तक जगह-जगह हजारों की संख्या में जुटी जनता यात्रा के नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत कर रही थी. गुरारू में किसान नेता बालेश्वर यादव और छात्र नेता धनंजय कुमार ने, वहीं पंचाननपुर में ऐपवा की नेत्री रीता वर्णवाल और माले के टिकारी प्रखंड सचिव रवि कुमार की अगुआई में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने तीन तारा वाले लाल झंडों और  – वोट चोर, गद्दी छोड़ – जैसे नारों के साथ स्वागत किया. राज्य कमिटी सदस्य तारिक अनवर के नेतृत्व में नगर प्रखंड के कोसमा, केशरू और जमुने में स्वागत किया गया. इस जनउभार ने यह साफ कर दिया कि यह यात्रा जनता की यात्रा बन गई है. रात को यात्रा गयाजी शहर में रसलपुर होते हुए क्रिकेट ग्राउंड पहुंची, जहां रात्रि विश्राम हुआ.

तीसरे दिन की शुरुआत का. दीपंकर भट्टाचार्य, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के संयुक्त नेतृत्व में हुई. रसलपुर से यात्रा आगे बढ़ी. गया से नवादा के रास्ते में हर तबके, हर उम्र के लोग सड़कों के किनारे घंटों खड़े होकर यात्रा का इंतजार करते रहे. मनैनी गांव में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने ग्रामीणों से संवाद किया. स्मार्ट मीटर के बढ़े बिलों, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के उत्पीड़न, सरकारी राशन और पेंशन से वंचित किए जाने जैसी कई शिकायतें सुनने को मिलीं. यह संवाद दर्शाता है कि यह यात्रा जनता की असली तकलीफों को सामने लाने का एक मंच बन चुकी है.

हिसुआ से नवादा के रास्ते में लालूनगर, छोटी पाली जैसे गांवों में और फिर नवादा शहर में प्रजातंत्र चौक तक भारी जनसभा और स्वागत हुआ. भगत सिंह चौक पर का. दीपंकर, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी ने जनसभा को संबोधित किया. का. दीपंकर ने साफ शब्दों में कहा कि इस बार बिहार की जनता भाजपा-नीतीश के गठजोड़ को पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है. उन्होंने कहा कि वोट चोरों को गद्दी से उतरना ही होगा. नवादा के आईआईटी परिसर में कांग्रेस नेत्री अलका लांबा के साथ प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी नवादा-गया पदयात्रा (2024) की चर्चा की और बताया कि इन जिलों में सामंती दमन, भूख, बेरोजगारी, और कर्ज के बोझ से आत्महत्या जैसी त्रासदियां रोजमर्रा की हकीकत हैं. आज जब चुनाव आयोग भाजपा की साजिश में सहभागी बन रहा है, तब जनता के इस व्यापक आक्रोश के आगे कोई साजिश टिक नहीं पाएगी. शाम को बरबीघा में आयोजित सभा में उन्होंने फिर से कहा कि विधानसभा चुनाव में वोट चोरों को धूल चटाइए.

एक दिन के विश्राम के बाद वोटर अधिकार यात्रा 21 अगस्त को फिर से शुरू हुई. सभी लोग शेखपुरा पहुंचे और लखीसराय होते हुए मुंगेर की ओर कूच किया. इस दिन यात्रा में का. दीपंकर ने दो टूक कहा कि यह अभियान अब पूरे बिहार में एक लहर की तरह फैल चुका है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग बार-बार कह रहा है कि 65 लाख लोगों का नाम हटाया गया, पर जब सवाल पूछा जाता है कि किस आधार पर? कौन लोग हटे? इनकी शिकायतों का क्या हुआ? तो आयोग के पास कोई जवाब नहीं होता. वहीं दूसरी ओर 2 लाख नए नाम जोड़ने की बात कही जा रही है – कौन हैं ये लोग? क्या ये भाजपा के “फर्जी वोट बैंक” का हिस्सा हैं? कई जगहों पर शून्य घर संख्या वाले नाम मिले हैं. यह घोटाला नहीं तो और क्या है?

उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला और कहा कि अब संसद में एक ऐसा विधेयक लाया जा रहा है जो राज्यों में विपक्षी दलों को सरकार चलाने से रोकेगा. यह संघीय ढांचे पर हमला है, और लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है. इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए. अंत में उन्होंने जनता से अपील की कि वे न केवल इस यात्रा में सहभागी बनें, बल्कि अपने मताधिकार की सुरक्षा के लिए वोटर लिस्ट में नाम जांचें, जोड़ें, और फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज बुलंद करें. यह सिर्फ चुनाव नहीं, लोकतंत्र की रक्षा की निर्णायक घड़ी है.

मुंगेर में पार्टी नेता सरोज चौबे, मुंगेर के संयोजक दशरथ सिंह के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और आशा-रसोइया संगठनों ने सबका स्वागत किया.

यात्रा में अब विभिन्न तबके के लोग अपनी मांगों के साथ ज्ञापन सौंप रहे हैं. शेखपुरा में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता, फैसिलिटेटर, विद्यालय रसोइया, सफाईकर्मी, कस्तूरबा विद्यालय में काम कर रहे दैनिक मजदूर, अतिथि शिक्षक आदि लोगों ने अपना ज्ञापन सौंपा और यात्रा का अभिंनदन किया. लखीसराय में विद्यालय रसोइयां ने आशा कार्यकर्ताओ की नेता शशि यादव को अपना ज्ञापन सौंपा और अपने गुस्से को इजहार किया. विदित हो कि लंबे आंदोलन के बाद अंततः चुनाव के दो महीना पहले बिहार सरकार ने रसोइयों का मानदेय 1650 रु. से बढ़ाकर 3300 रु. प्रति माह किया है. लेकिन रसोइयों को गुस्सा इससे कम नहीं हुआ है. वे जानती है कि यह चुनावी झांसा है. कई रसोइयों ने बताया कि घोषणा तो हो गई है लेकिन उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. वे इस बात से भी नाराज थीं कि उनसे काम तो 12 महीने करवाया जाता है लेकिन मानदेय केवल दस महीनों का मिलता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिहार में अब एनडीए को किसी भी प्रकार का समर्थन नहीं देंगे. इसके अलावा लखीसराय में डीह प्राथमिक शिक्षक संघ के नेताओं ने भी अपना मांग पत्र दिया. 22 अगस्त की सुबह यह यात्रा मुंगेर से भागलपुर की ओर निकल गई है. जगह-जगह लोगों ने इन नेताओं का स्वागत किया. पूरी यात्रा इंडिया गठबंधन के दलों के झंडों व नारों से पटा हुआ है. वोटर अधिकार यात्रा को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है.

– क्रमशः जारी

23 August, 2025