वर्ष 35 / अंक - 02 / भाकपा(माले) का 12वां तमिलनाडु राज्य सम्मेलन

भाकपा(माले) का 12वां तमिलनाडु राज्य सम्मेलन

भाकपा(माले) का 12वां तमिलनाडु राज्य सम्मेलन

भाकपा(माले) का 12वां तमिलनाडु राज्य सम्मेलन 12 दिसंबर 2025 को तूतीकोरिन (थूथुकुडी) में आयोजित खुले सत्र के साथ आरंभ हुआ. यह सम्मेलन तमिलनाडु में लागू की जा रही एसआईआर 2.0 और मजदूर-विरोधी श्रम संहिताओं के खिलाफ आयोजित किया गया. सम्मेलन का उद्घाटन कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने किया. खुले सत्र को तमिलनाडु की सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण मंत्री तथा डीएमके नेता श्रीमती गीता जीवन, विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) के संस्थापक अध्यक्ष कॉमरेड तिरुमावलवन, सीपीआई(एम) के राज्य सचिव कॉमरेड शणमुगम, सीपीआई के राज्य सचिव कॉमरेड एम. वीरपांडियन, मक्कल अधिकारम के राज्य सचिव कॉमरेड चेझियन ने संबोधित किया. इनके साथ तमिलनाडु के पार्टी मामलों के प्रभारी पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड वी. शंकर, केंद्रीय कमेटी के सदस्य कॉमरेड बालासुंदरम और बालसुब्रमणियन भी मंच पर उपस्थित थे. डीएमके सांसद कनिमोझी ने सम्मेलन के लिए शुभकामना संदेश भेजा, जिसे पढ़कर सुनाया गया. खुले सत्र की अध्यक्षता राज्य सचिव कॉमरेड असैथम्बी ने की, जबकि चंद्रमोहन ने प्रस्ताव प्रस्तुत किए. कॉमरेड सिम्पसन, शंकर पांडियन, एंथनी मुथु और सुशीला ने सत्र का संचालन किया. सगायम ने स्वागत भाषण दिया और मुरुगन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.

कॉमरेड दीपंकर ने कहा कि तूतीकोरिन महान स्वतंत्रता सेनानी वी.ओ.सी. की विरासत को संजोए हुए है, जिन्होंने भारत की पहली स्वदेशी नौवहन सेवा शुरू कर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के वर्चस्व को चुनौती दी और साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन के खिलाफ और भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वालों में से अधिकांश ने सामंतवाद, उत्पीड़ित वर्गों के दमन और पूंजीवाद के खिलाफ भी संघर्ष किया. 1947 से पहले राष्ट्रीय मुक्ति और राष्ट्रीयकरण साथ-साथ चलते थे. जब डॉ. अंबेडकर ने स्टेट्स एंड माइनॉरिटीज लिखा, तो उन्होंने उस संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसे वे वास्तव में भारत के लिए बनाना चाहते थे लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा नहीं कर पाए. जिसमें सभी उत्पादक शक्तियों और भूमि संसाधनों के पूर्ण राष्ट्रीयकरण की परिकल्पना थी. आज नरेंद्र मोदी जिस राष्ट्रवाद को थोपना चाहते हैं, वह वास्तव में राष्ट्रविरोधी है – निजीकरण और कॉरपोरेट एकाधिकार का मॉडल, जिसमें सब कुछ अडानी-अंबानी के लिए है. यही भाजपा का छिपा हुआ अति-राष्ट्रवाद है.

असंवैधानिक एसआईआर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह सार्वभौमिक मताधिकार से इनकार है. भारत का चुनावी लोकतंत्र दो स्तंभों पर टिका है, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव. एसआईआर पहले स्तंभ को नष्ट कर रहा है और दूसरा स्तंभ भी एक पक्षपाती, सरकार-समर्थित चुनाव आयोग के कारण कमजोर हो रहा है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र और बिहार के अनुभवों के आधार पर तमिलनाडु की जनता भाजपा को पराजित करने में सफल होगी.

डीएमके मंत्री गीता जीवन ने सम्मेलन को शुभकामनाएं देते हुए भाजपा की उस साजिश के खिलाफ संघर्ष का आह्वान किया, जिसके तहत धर्मनिरपेक्ष तमिलनाडु को उत्तर प्रदेश की तरह सांप्रदायिक तनाव का केंद्र बनाया जा रहा है. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु की जनकल्याण योजनाओं के लिए धान रोके जाने की भी आलोचना की.

कॉमरेड तिरुमावलवन ने एसआईआर 2.0 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव आयोग संविधान का उल्लंघन करते हुए जनता को मताधिकार से वंचित कर रहा है. उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक मताधिकार और धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल स्तंभ हैं, जिन्हें भाजपा नष्ट करना चाहती है. उन्होंने कहा कि अंबेडकर की प्रतिमाएं लगाई जा रही हैं, लेकिन उनके सबसे बड़े योगदान, संविधान की आत्मा को खत्म किया जा रहा है. उन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन और दलित आंदोलन के बीच अधिक घनिष्ठ संवाद की जरूरत पर जोर दिया.

सीपीआई(एम) के राज्य सचिव कॉमरेड शणमुगम ने देश में वाम, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील शक्तियों की एकता की जरूरत पर जोर दिया और नवउदारवादी नीतियों व सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया.

सीपीआई के राज्य सचिव कॉमरेड एम. वीरपांडियन ने विस्तार से बताया कि किस प्रकार हिंदुत्व धार्मिक आस्था को नफरत की राजनीति में बदल रहा है और अंततः समाजवाद, मानवतावाद, विज्ञान और भारतीय जनता की एकता विजयी होगी.

मक्कल अधिकारम के राज्य सचिव कॉमरेड चेझियन ने कहा कि एसआईआर 2.0 सामूहिक मताधिकार का हनन है और भाजपा सरकार कॉरपोरेट हितों, विशेषकर अडानी-अंबानी के पक्ष में शासन कर रही है.

खुले सत्र वी.ओ. चिदंबरनार (वीओसी) के नाम पर समर्पित किया गया तथा वेदांता की स्टरलाइट कंपनी के खिलाफ प्रदूषण विरोधी आंदोलन में शहीद हुए 13 लोगों की स्मृति को भी नमन किया गया.

सम्मेलन ने वी.ओ.सी. तथा अन्य स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा प्रतिनिधित्व की गई इस शहर की औपनिवेशिक-विरोधी संघर्ष की विरासत और स्टरलाइट आंदोलन के 13 शहीदों की संघर्षशील भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. सम्मेलन ने एसआईआर 2.0 की कड़ी निंदा की, जिसे भाजपा के पक्ष में लागू किया जा रहा है और जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों, दलितों, गरीबों और वंचित तबकों को मताधिकार से वंचित करना है. सम्मेलन ने स्वतंत्र रूप से तथा समान विचारधारा वाली अन्य ताकतों के साथ संयुक्त रूप से व्यापक जनसंघर्ष छेड़ने का निर्णय लिया.

खुले सत्र ने गुलामी थोपने वाली श्रम संहिताओं को वापस लेने के लिए समझौताहीन संघर्ष छेड़ने का संकल्प लिया. सम्मेलन ने मदुरै (तिरुपरंकुन्द्रम पहाड़ियों, भगवान मुरुगन की पावन भूमि) को दक्षिण भारत की अयोध्या में बदलने की आरएसएस की सांप्रदायिक साजिश को पराजित करने का निर्णय लिया, जो सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काकर की जा रही है. सम्मेलन ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के न्यायाधीश स्वामीनाथन के विरुद्ध संसद में इंडिया गठबंधन द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का स्वागत किया, जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सांप्रदायिक ताकतों को लाभ पहुंचाया.

सम्मेलन ने किसान-विरोधी बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए तथा स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग की. सम्मेलन ने स्टरलाइट शहीद स्मारक की स्थापना, सभी झूठे मामलों की वापसी तथा वेदांता के पक्ष में हुई पुलिस फायरिंग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अरुणा जगदीशन आयोग द्वारा अनुशंसित कड़ी कार्रवाई की भी मांग की.

सम्मेलन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम. के. स्टालिन से अपील की कि वे चेन्नई के स्वच्छता कर्मियों की समस्याओं के समाधान हेतु व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करें. सम्मेलन ने राज्य भर में स्वच्छता कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन, भोजन योजना के विस्तार, कर्ज के जाल से मुक्ति तथा प्रत्येक राशन कार्डधारी परिवार को 25,000 रुपये दिए जाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के साथ एकजुटता व्यक्त की. खुले सत्र ने पर्यावरण, कृषि और भूजल को नष्ट करने वाली तीन मछली-अपशिष्ट फैक्ट्रियों को तत्काल बंद करने की भी मांग की.

सम्मेलन ने मनगढ़ंत मामलों में दस वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद प्रिकोल मजदूरों; कॉमरेड मणिवन्नन और राममूर्ति की रिहाई के लिए अभियान चलाने का भी संकल्प लिया.

प्रतिनिधि सत्र का उद्घाटन 12 दिसंबर की शाम को कॉमरेड दीपंकर ने किया. निवर्तमान राज्य समिति के सचिव कॉमरेड असैथम्बी ने सम्मेलन की मसौदा रिपोर्ट प्रस्तुत की. वरिष्ठ कॉमरेड सिम्पसन के नेतृत्व में गठित 13 सदस्यीय अध्यक्षमंडल ने प्रतिनिधियों को मसौदे पर अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया.

राज्य की राजनीति के संदर्भ में प्रतिनिधियों ने हिंदुत्व के नाम पर तमिल देवता मुरुगन को इस्तेमाल करते हुए सांप्रदायिक ताकतों के बढ़ते प्रभाव पर चेतावनी दी और भाजपा द्वारा खेले जा रहे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के खेल को रेखांकित किया. सम्मेलन ने तमिलनाडु की धरती से भाजपा और उसकी सांप्रदायिक हिंदुत्व विचारधारा को उखाड़ फेंकने पर अपना राजनीतिक फोकस केंद्रित करने का संकल्प लिया. सांप्रदायिक ताकतों को पराजित करने को केंद्रीय राजनीतिक कार्यभार मानने की रणनीति पर अधिकांश प्रतिनिधियों ने सहमति जताई और फासीवाद-विरोधी राजनीतिक लाइन के अनुरूप विभिन्न कदम सुझाए.

सम्मेलन ने अभिनेता विजय के नेतृत्व में उभर रही टीवीके के संदर्भ में भी चर्चा की और यह नोट किया कि भाजपा विरोधी होने के दावों के बावजूद उसमें डीएमके विरोध की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है. सम्मेलन ने डीएमके और भाजपा गठबंधनों से समान दूरी की घोषणाओं में निहित अवसरवाद के प्रति भी आगाह किया, विशेषकर तब जब जनता, संविधान और लोकतंत्र के लिए भाजपा गठबंधन को मुख्य खतरे के रूप में चिह्नित नहीं किया जाता. सम्मेलन ने यह सुझाव दिया कि टीवीके अभी प्रारंभिक अवस्था में है और समग्र राजनीतिक ढांचा सामने आना शेष है, इसलिए ‘प्रतीक्षा और अवलोकन’ का दृष्टिकोण अपनाया जाए.

सम्मेलन ने राज्य के अधिकारों, सामाजिक न्याय, तमिल जनता के हितों तथा भाजपा द्वारा प्रतिनिधित्व की जा रही हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ संघर्ष में डीएमके गठबंधन के योगदान को विधिवत स्वीकार किया. साथ ही, तमिलनाडु को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के नाम पर मजदूरों, कृषि मजदूरों और किसानों के खिलाफ डीएमके सरकार की कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों की आलोचना भी की. सम्मेलन ने दलितों और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों तथा ऑनर किलिंग की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की और वर्ग संघर्ष को राजनीतिक धरातल पर बिना समझौते के आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

कुल 369 प्रतिनिधियों में से 70 से अधकि प्रतिनिधियों ने चर्चाओं में भाग लिया. कॉमरेड असैथम्बी ने बहसों का सार प्रस्तुत किया और कुछ संशोधनों के साथ मसौदा रिपोर्ट को सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया.

तमिलनाडु में पार्टी मामलों के प्रभारी कॉमरेड वी. शंकर ने सम्मेलन का समापन भाषण दिया.

केंद्रीय पर्यवेक्षक कॉमरेड मैत्रोयी कृष्णन ने पार्टी संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप पूर्णतः लोकतांत्रिक वातावरण में नई राज्य कमेटी के चुनाव संपन्न कराए. सम्मेलन ने 65 सदस्यीय राज्य कमेटी का चुनाव किया और कॉमरेड असैथम्बी को पुनः राज्य सचिव चुना गया.

प्रतिनिधि सत्र को एआईसीसीटीयू के सलाहकार कॉमरेड कुमारस्वामी, एआईसीसीटीयू की राज्य अध्यक्ष कॉमरेड भारती, तमिल श्रमिक पत्रिका सॉलिडैरिटी की संपादक कॉमरेड भुवना, केरल राज्य संयोजक कॉमरेड जॉनसन अंबट्ट, पुदुचेरी राज्य सचिव कॉमरेड पुरुषोत्तमन तथा केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड बालसुब्रमणियन ने संबोधित किया. केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड बालसुंदरम ने मसौदे की मूल राजनीतिक स्थितियों को स्पष्ट किया, जबकि चंद्रमोहन ने प्रस्तावों का पाठ किया. सम्मेलन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी होती रही.


10 January, 2026