जगह-जगह आशा नेताओं को उनके घरों में कैद करने और डराने-धमकाने की प्रशासनिक कोशिशों और सरकार के दमनकारी रवैए का सामना करते हुए हजारों की संख्या में आशा कर्मियों ने 23 दिसंबर 2025 को हजारों की तादाद में लखनऊ पहुंचकर विधानसभा के समक्ष अपनी मांगो को दृढ़तापूर्वक बुलंद किया. यह कार्यक्रम 15 दिसंबर से जारी हड़ताल के नौवें दिन उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर आयोजित हुआ. जिला प्रशासन द्वारा जबरन रोक दिए जाने के बाद आशा कर्मियों ने चारबाग रेलवे स्टेशन पर ही एक सभा आयोजित की.
सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने कहा कि हड़ताल से डरी सरकार दमन-उत्पीड़न पर उतारू है. पूरा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सेवा से बाहर करने की धमकी देकर आशा कर्मियों के आंदोलन को तोड़ने और कमजोर करने में लगा हुआ है. आज के कार्यक्रम को रोकने के लिए पुलिस बल का प्रयोग सरकार के वास्तविक चेहरे को उजागर करता है.
उन्होंने कहा कि दमन और उत्पीड़न से आंदोलन नहीं खत्म होते. उनके सवालों के हल के जरिए स्थिति को सामान्य बनाया जा सकता हैं लेकिन जब सरकार वार्ता तक करने को तैयार नहीं हुई तब आशा कर्मियों को हड़ताल में जाने के लिए बाध्य हुई. सरकार को दमनात्मक तरीके अपनाकर हड़ताल को तोड़ देने के बजाय समस्याओं के समाधान की पहल करनी चाहिए.
राज्य सचिव अनीता वर्मा ने कहा कि यह लड़ाई वर्षों से सरकार द्वारा अनसुना करने और अपमान जनक नौकरशाहाना और शोषणकारी व्यवहार से उपजी हैं. बिना सवालों को हल किए सरकार कितने ही दमन के तरीके निकाले, बच नहीं सकती, उसे प्रदेश की 2 लाख आशा संगीनियों के सवाल सुनने होंगे. जौली वैश्य ने कहा कि 50 -75 रुपये में दुनिया में कोई मजदूर कहीं भी मिलेगा क्या? पर हम आशा कर्मी इस जानलेवा मंहगाई के दौर में इसी मजदूरी पर लगभग मुफ्त की बेगार करने के लिए पिछले 20 वर्षों से विवश हैं. अगर काम के बदले जिंदा रहने भर पारिश्रमिक की मांग नाजायज है, तो सरकार खुद बताए कि 2000 रुपए में किस बाजार में जाकर हम महीने भर का राशन खरीदें, जिसे खाकर हम स्वास्थ्य विभाग के 72 कामां का टोकरा लेकर घूमती रहें.
भाकपा(माले) केंद्रीय कमेटी सदस्य और ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव आया और 7 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल से मुख्यमंत्री के विशेष सचिव के साथ वार्ता हुई. वार्ता के बाद उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी ने बताया कि आज वार्ता के जरिए एक शुरुआत हुई है. समस्याओं के निराकरण के लिए अगले चरण की वार्ता की तारीख तय की जाएगी. आज की बातचीत में मांगपत्र की सभी मांगों को प्रथम दृष्टया पूर्ण होने लायक मानते हुए सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि समाधान की तरफ बढ़ा जाएगा. उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य सचिव ने कार्यक्रम का समापन करते हुए हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया और कहा कि जब तक अगले चरण की बातचीत नहीं होती और कोई निष्कर्ष नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
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पूर्व संध्या पर आशा नेत्रियां हाउस अरेस्ट
विधानसभा मार्च की पूर्व संध्या पर रायबरेली जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा को हाउस अरेस्ट करने की प्रशासनिक कार्यवाही से प्रदेश की सरकार का असली दमनकारी चेहरा उजागर हो गया. उनके अलावा मुरादाबाद जिलाध्यक्ष निर्मला को भी गृह कैद किया गया और पूरे प्रदेश के रेलवे स्टेशनों ,बस अड्डों पर भारी पुलिस बल लगाकर लोगों को लखनऊ पहुंचने से रोका गया लेकिन सरकार का मंसूबा कामयाब नहीं हुआ. प्रदेश की आशा कर्मियों ने हजारों की तादाद में लखनऊ पहुंच कर साबित कर दिया. उनकी अनुपस्थित में नेतृत्व की बागडोर ममता पाल ने संभाली और साहिरा बानो व राधा राजपूत के साथ सैकड़ों आशा कर्मियों के साथ विधान सभा मार्च में शामिल हुई.
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