उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटा जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे यह कहा है और यह जाति जनगणना के बाद किया जायेगा. वैसे तो राजभर की विश्वसनीयता बहुत कम है.
अधिक संभावना यह है कि राजनीतिक संकटों से घिरे राजभर ने अपने समर्थकों को उत्साहित करने के लिए पूर्वांचल में राजभर मुख्यमंत्री का यह सुर्रा छोड़ा हो. वैसे मायावती पूर्ण बहुमत से मुख्यमंत्री बनने के बाद इसका बाकायदा विधानसभा से प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेज चुकी हैं जो इस पर अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत है. उन्होंने प्रदेश को चार राज्यों पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड और पश्चिमांचल में बांटने का प्रस्ताव रखा था जिनमें क्रमशः 23,17,7,28 जिले होने थे. हर क्षेत्र में दलितों की पर्याप्त संख्या 16 % से 28%होने के कारण तब वे चार राज्यों में सरकार बनाने का सपना देखती थीं. राष्ट्रीय लोकदल के नेता चौधरी अजित सिंह भी जाट बहुल क्षेत्र के मद्देनजर पश्चिमांचल में हरित प्रदेश की मांग उठाते रहते थे. लेकिन कांग्रेस, भाजपा या समाजवादी पार्टी ने कभी इस मांग का समर्थन नहीं किया. इसके पीछे संभवतः कारण यह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सरकार होना अलग ही रुतबा दे देता है. आजादी मिलने के बाद तमाम विघटनकारी ताकतों के समांतर एक गुरुत्व केंद्र के बतौर उत्तर प्रदेश को देखा गया इसलिए उसके विभाजन का प्रश्न ही नहीं उठा. सपा का भी यादव आधार वोट मुख्यतः दो हिस्सों में केंद्रित है. एक तो पश्चिम में एटा, मैनपुरी, इटावा पट्टी और पूर्वांचल में आजमगढ़ जौनपुर, गाजीपुर, मऊ पट्टी. पिछले लोकसभा चुनाव की भारी सफलता के बाद अब जाहिर है समाजवादी पार्टी के लिए इस तरह के किसी प्रस्ताव पर सहमत होने का सवाल ही नहीं उठता.
दरअसल अतीत में जो नए राज्य बने हैं, वे बड़े जनांदोलनों की उपज रहे हैं – वह उत्तराखंड हो, झारखंड हो या तेलंगाना. उत्तरप्रदेश में उत्तराखंड के लिए बड़ा आंदोलन हुआ था जिसकी बदौलत वह अलग राज्य बन भी गया. लेकिन उसके बाद से शेष उत्तर प्रदेश के किसी हिस्से को अलग राज्य बनाने के लिए कोई तीखा आंदोलन नहीं हुआ.
बेशक बुंदेलखंड, पूर्वांचल और हरित प्रदेश को लेकर कभी-कभार कुछ आवाज उठती रही है, लेकिन कोई प्रभावी आंदोलन नहीं हुआ. साफ है कि ऐसी कोई वस्तुगत जरूरत नहीं है. जाहिर है भाजपा भी ऐसे किसी प्रस्ताव में रुचि नहीं लेगी जिसकी देश के सबसे बड़े राज्य में सरकार है और जो उसकी केंद्रीय सत्ता का आधार है. इसलिए यह राजभर का ख्याली पुलाव अधिक लगता है जो अपने समर्थकों को खुश करने के लिए उछाला गया है.
– लाल बहादुर सिंह