वर्ष 35 / अंक - 42 / बेहरावां-चकिया की महिलाओं की रिहाई के लिए ऐपवा का...

बेहरावां-चकिया की महिलाओं की रिहाई के लिए ऐपवा का प्रदर्शन

बेहरावां-चकिया की महिलाओं की रिहाई के लिए ऐपवा का प्रदर्शन

पटना जिले के पिपरा थाना अंतर्गत बेहरावां चकिया गांव की 32 महिलाओं समेत 39 लोगों की बेऊर जेल से रिहाई और तीन महादलितों की मृत्यु की जवाबदेही तय कर पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने 12 अक्टूबर 2026  को पटना में प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में पीड़ित परिवार एवं सैकड़ों महिलाएं शामिल हुई.

महिलाएं गेट पब्लिक लाइब्रेरी से मार्च निकालते हुए गर्दनीबाग धरनास्थल तक पहुंची जहां प्रशासन ने गेट बंद कर दिया था. महिलाएं धरनास्थल पर ही जमी रही और नारेबाजी करती रहीं. वहां आयोजित सभा को ऐपवा महासचिव मीना तिवारी, विधान परिषद सदस्य शशि यादव, पूर्व विधायक गोपाल रविदास आदि ने संबोधित किया .

सभा में बेहरावां की पीड़ित महिलाओं – ससीमा देवी, खुशबू कुमारी व प्रीति कुमारी ने अपनी आपबीती सुनाई एवं कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शन में ऐपवा की पटना नगर सचिव अनुराधा,  ऐपवा नेत्री अफ्शां जबीं, राखी मेहता, रेखा देवी, नीलम देवी, विभा गुप्ता सहित सैकड़ों महिलाएं शामिल थीं.

महिला नेताओं ने कहा कि बिहार में दलितों-महादलितों पर पुलिसिया उत्पीड़न चरम पर है. महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा है. आज पूरे बिहार में कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. पुलिस और अपराधी दोनों महिलाओं का उत्पीड़न कर रहे हैं, भाजपा की सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है और महिलाओं को फर्जी मुकदमों में जेल भेज  रही हैं.

ऐपवा ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. जेल में बंद 32 महिलाओं  तथा 7 पुरुष बंदियों को भी रिहा किया जाए.
  2. राजू मांझी, अशोक मांझी और राजा बाबू की मौत के जिम्मेदार पिपरा थाना प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित किया जाए और पूरे मामले की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए.
  3. महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की जाए
  4. रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था या सरकारी नौकरी के बिना मुसहर समुदाय के लोगों को शराब के नाम पर उजाड़ना व प्रताड़ित करना बंद किया जाए
  5. हर मुसहर टोली में वैकल्पिक रोजगार का इंतजाम और सभी परिवारों के लिए मुआवजे का इंतजाम किया जाए.

17 October, 2026