वर्ष 34 / अंक-23 / बिहार में ऐपवा के बैनर तले आयोजित हुआ कर्ज मुक्ति...

बिहार में ऐपवा के बैनर तले आयोजित हुआ कर्ज मुक्ति मार्च

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बिहार में जगह-जगह लगातार हो रही बारिश भी कर्ज से त्रस्त महिलाओं की कर्ज मुक्ति के लिए उठी आवाज व कर्ज वसूली के विरोध के जज्बे को नहीं रोक पायी.

विदित हो कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों समेत तमाम कर्जों की मुक्ति के सवाल पर ऐपवा ने 13 अगस्त 2025 को पूरे राज्य में कर्ज मुक्ति मार्च निकालने की घोषणा की थी. ऐपवा की मुख्य मांगें थीं –

1. माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के अत्याचार पर रोक लगाओ.
2. माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के लिए नियामक संस्था बनाओ.
3. जीविका समूह की सभी महिलाओं को रोजगार दो.
4. माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और महाजनों की मनमानी सूदखोरी और अत्याचार के कारण मारी गई महिलाओं व बच्चों को 20 लाख रुपए मुआवजा दो.
5. सहारा में जमा महिलाओं की बचत राशि का अभिलंब भुगतान करो.
6. हर पंचायत में सरकारी बैंक को खोलो और दो प्रतिशत सालाना ब्याज पर 2,00,000 रु. तक का कर्ज महिलाओं  को उपलब्ध कराओ.


ऐपवा के बैनर तले महिलाओं ने जहानाबाद में कर्ज मुक्ति मार्च निकाला तथा अरवल मोड़ पर जाकर सभा आयोजित की. यह मार्च भाकपा(माले) के जहानाबाद जिला कार्यालय से निकल कर गया-पटना मुख्य मार्ग से होते हुए अरवल मोड़ पहुंचा. इस सैकड़ों महिलाएं हाथों में झंडा लिए अपनी मांगों के समर्थन में नारा लगा रही थी.

अरवल मोड़ पर सभा को ऐपवा की जिला सचिव रेणु देवी, जिला कमेटी सदस्य सोनफी देवी, महिला नेत्री संगीता देवी व मालो देवी ने संबोधित किया. कहा कि, ‘महिलाएं माइक्रोफाइनेंस कंपनियों, महाजनी कर्ज एवं जीविका के माध्यम से कर्ज के जाल में फंस चुकी है. कई महिलाएं अपने दूध मुंहे बच्चों को बेच कर भी कर्ज की फांस से बाहर निकलने की कोशिश कर चुकी हैं. कई महिलाओं ने आत्महत्या कर ली, तो कईयों के बच्चे बच्चे भूख व कुपोषण से बिलबिला कर मर गए. जिले के धर्मपुर, गौरापुर, पिंजोरा आदि सहित सैकड़ों गांवों की महिलाएं उक्त कर्ज देनदारों व संस्थाओं के जाल में फंस गयीं और कर्ज वसूली के लिए उनके उत्पीड़न के भय से गांव से पलायन कर गयीं. दूसरी तरफ वैसी महिलायें भी हैं जिनके पास जो कुछ थोड़ी-बहुत जमा-पूंजी थी, उसे सहारा इंडिया जैसे चिट फंड बैंकों के लोग लेकर फरार हो गये. सभा के माध्यम से महिलाओं ने सरकार से यह मांग की कि वह सभी महिलाओं को कर्ज से मुक्त कराए और पंचायत में सरकारी बैंक की शाखायें खोल कर दो प्रतिशत ब्याज पर दो लाख रुपए तक का कर्ज दे. सहारा इंडिया में जमा राशि का सरकार अपने स्तर से अविलंब भुगतान सुनिश्चित करे.

राज्य स्तरीय कर्ज मुक्ति मार्च के तहत समस्तीपुर में भाकपा(माले) जिला कार्यालय,से प्रतिरोध मार्च निकाला गया. पूर्णिया जिले के रूपौली में खादी भंडार प्रांगण से कर्ज मुक्ति मार्च निकाला गया, जो रुपौली बाजार होते हुए, थाना चौक पर पहुंचा. वहां एक सभा आयोजित की गई. मार्च का नेतृत्व ऐपवा नेत्रियों – सुलेखा देवी, सीता देव व संगीता देवी ने किया. दर्जनों महिलाओं ने इस मार्च में शिरकत की.

सभा को संबोधित करते हुए एपवा नेताओं ने कहा कि बिहार में गरीब और जरूरतमंद महिलाएं माइक्रोफाइनेंस संस्थानों व महाजनों, आदि से कर्ज लेती हैं, लेकिन यह उनका आर्थिक रूप से सशक्तिकरण करने और उनको गरीबी से मुक्ति दिलाने के बजाय उनके गले की फांस बन जाता है. एक कम्पनी का कर्ज चुकाने के लिए उन्हें एक दूसरी कंपनी से कर्ज लेना पड़ता है.

बढ़ती मंहगाई, घटती आय, रोजगार का अभाव और घर की जरूरतों के कारण महिलाएं कर्ज लेने के लिए मजबूर हो जाती हैं. कर्ज की किस्त समय पर नहीं चुकाने की वजह से महिलाएं भारी मानसिक तनाव में रहती हैं और कंपनियों के द्वारा कई तरह से उत्पीड़न झेलने से विवश होकर आत्महत्या तथा पलायान का रास्ता चुन रही हैं. सरकार कंपनियों का उत्पीड़न रोकने में पूरी तरह से विफल है.

कर्ज मुक्ति मार्च के माध्यम से मांग किया गया कि सहायता समूह के सभी महिलाओं के 2 लाख रुपये तक के कर्ज माफ करे, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के अत्याचार पर रोक लगाए, जीविका समूह से जुड़ी कैडरों को मानदेय दे तथा सभी गरीब महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए बिना ब्याज  का कर्ज दे.

इस सवाल पर नवादा व गया,में भी ऐपवा के बैरर तले  कर्ज मुथ्कत मार्च निकला गया. इससे पहले पिछले दिनों 23 जुलाई 2025 को राज्यव्यापी अभियान चला कर ऐपवा के बैनर तले राजधानी पटना के आइएमए हॉल में कर्ज मुक्ति सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था.


16 August, 2025