वर्ष 35 / अंक - 02 / भाकपा(माले) का पहला महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन

भाकपा(माले) का पहला महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन

भाकपा(माले) का पहला महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन

भाकपा(माले) का पहला महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन 20 और 21 दिसंबर को कोल्हापुर में संपन्न हुआ. साम्राज्यवाद-विरोधी संघर्षों की विरासत और सामाजिक न्याय आंदोलनों से गहरे रिश्ते रखने वाली कम्युनिस्ट आंदोलन की दो धाराओं के ऐतिहासिक एकता सम्मेलन के छह महीने बाद आयोजित इस सम्मेलन ने भारत में फासीवादी हमले से उत्पन्न चुनौतियों के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान किया. सम्मेलन में राज्य में वामपंथी उभार को संगठित करने तथा एक वास्तविक वाम, लोकतांत्रिक राजनीतिक संयुक्त मोर्चा के निर्माण के प्रयासों पर बल दिया गया.

सम्मेलन की पूर्व संध्या पर पार्टी महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य के साथ 80 बुद्धिजीवियों, सामाजिक, पेशेवर एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की एक खुली चर्चा आयोजित की गई. यह बैठक चिंतित और सजग कार्यकर्ताओं तथा नागरिकों के बीच एक स्पष्ट, सौहार्दपूर्ण विचार-विमर्श का मंच बनी. बैठक का समापन निकट भविष्य में एक सामाजिक कार्रवाई मंच के गठन के संकल्प के साथ हुआ.

20 दिसंबर की दोपहर 17 जिलों से प्रतिनिधियों के आगमन के साथ कोल्हापुर एवं आसपास के क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं और सदस्यों की भागीदारी में लाल झंडों की एक रैली दशहरा चौक से प्रारंभ हुई. रैली के दौरान डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, शिवाजी महाराज और शाहूजी महाराज की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. रैली खुले सत्र के आयोजन स्थल पर जाकर संपन्न हुई. पार्टी ध्वज फहराने और शहीदों को सलामी देने के उपरांत कॉमरेड दीपंकर ने सम्मेलन का उद्घाटन किया. उद्घाटन सत्र को सीपीआई के राज्य सचिव सुभाष लांडे, सीपीआई(एम) के पूर्व राज्य सचिव उदय नारकर, पीडब्ल्यूपी के भाई भाऊसाहेब देवकर, सत्यशोधक कम्युनिस्ट पार्टी के किशोर धामाले, श्रमिक मुक्ति दल (डेमोक्रेटिक) के संपत देसाई तथा धनाजी गुरव ने संबोधित किया. भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य और सांसद कॉमरेड राजाराम सिंह भी सम्मेलन में उपस्थित रहे. सभी नेताओं ने पहले राज्य सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं दीं और फासीवाद के दौर में संघर्ष की एकता तथा कम्युनिस्ट एकता की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही समकालीन राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी के प्रयासों और योगदानों की सराहना की.

खुले सत्र के पश्चात प्रतिनिधि कॉमरेड संताराम पाटिल हॉल में एकत्र हुए. कॉमरेड मुक्ता मनोहर, उद्धव शिंदे, वंदना मेश्राम, विजय कुलकर्णी और बालासाहेब सुरुडे की अध्यक्षमंडली ने डी. एस. कुलकर्णी-अशोक मनोहर मंच से सम्मेलन की कार्यवाही का संचालन किया. शहीदों को श्रद्धांजलि देने और कॉमरेड विनोद मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कॉमरेड उदय भट्ट ने प्रतिनिधियों के समक्ष राज्य पार्टी की रिपोर्ट प्रस्तुत की. विभिन्न जिलों से आए 25 प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लेते हुए रिपोर्ट पर अपने सुझाव, चिंताएं दिए और उसमें जरूरी बातें जुड़वाईं. रिपोर्ट को प्रतिनिधियों द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया. इसके उपरांत 47 सदस्यों एवं 7 आमंत्रितों वाली नई राज्य कमेटी का सर्वसम्मत रूप से चुनाव किया गया. कमेटी द्वारा कॉमरेड उदय भट्ट को राज्य सचिव चुना गया.

प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने प्रेरक भाषण में कम्युनिस्ट आंदोलन की दो महत्वपूर्ण धाराओं की ऐतिहासिक समीक्षा की, समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण किया तथा राज्य इकाई द्वारा की गई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और बिहार चुनावों के बाद फासीवादी-कॉरपोरेट-हिंदुत्व गठजोड़ द्वारा तेज किए गए संगठित हमलों के मद्देनजर सभी मोर्चों पर मौजूद चुनौतियों के प्रति प्रतिनिधियों को सचेत किया. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में पार्टी स्वयं को मजबूत करने, संयुक्त वाम के निर्माण और एक फासीवाद-विरोधी राजनीतिक गठबंधन खड़ा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

सम्मेलन के केंद्रीय पर्यवेक्षक कॉमरेड प्रभात कुमार ने समापन सत्र में सम्मेलन को सफल बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए राज्य में मजदूर आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. कॉमरेड राजाराम सिंह ने कोल्हापुर और महाराष्ट्र की प्रगतिशील सामाजिक-राजनीतिक विरासत को रेखांकित किया तथा सभी मोर्चों पर बढ़ती चुनौतियों की ओर प्रतिनिधियों का ध्यान दिलाया, जिनका सामना करने के लिए पूरी पार्टी को निरंतर, सुसंगत और अथक प्रयास करने होंगे. सम्मेलन का समापन ‘कम्युनिस्ट इंटरनेशनल’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ.


10 January, 2026