वर्ष 35 / अंक - 44 / जामिया में छात्र संघ बहाली आंदोलन की ऐतिहासिक जीत

जामिया में छात्र संघ बहाली आंदोलन की ऐतिहासिक जीत

जामिया में छात्र संघ बहाली आंदोलन की ऐतिहासिक जीत

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ (जेएमआइएसयू) चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर 18 दिनों से चल रहे आंदोलन की ऐतिहासिक जीत हुई है.

20 वर्ष बाद, पुनः छात्र संघ चुनाव कराने की छात्रों की सर्वप्रमुख मांग को विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है. तीन दिनों तक चली बातचीत के बाद केरल के सांसद हरीस बीरन के हस्तक्षेप से अंततः सहमति बनी.

छात्रों ने इसे अपनी एकजुटता, लोकतांत्रिक अधिकारों और लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया है. 12 अक्टूबर से 18 दिन तक चले आंदोलन के बाद गतिरोध भंग हुआ और छात्र आंदोलन की ऐतिहासिक जीत हुई.

छात्रों की प्रमुख मांग थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव कराने के लिए स्पष्ट समयसीमा घोषित करे, जिससे करीब दो दशक से बंद छात्रसंघ व्यवस्था फिर से शुरू हो सके. इस मांग को लेकर छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. आंदोलन आगे बढ़ने के साथ दो छात्र एबिन बेसिल और रेहान खान भूख हड़ताल पर बैठ गए.

छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से आंदोलन को रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं थी. छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच पिछले तीन दिनों से लगातार बातचीत चल रही थी. हालांकि, कई दौर की चर्चा के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा था.

आइसा ने बताया कि सांसद हरीस बीरन ने छात्रों की मांगों को कुलपति के सामने रखा. इसके बाद वह विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार के साथ छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के लिए पहुंचे. लंबी चर्चा के बाद प्रशासन की ओर से छात्रों की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने की घोषणा की गई.

विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बातचीत में अलग-अलग छात्रा संगठनों और स्वतंत्र छात्रों का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ. प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की मांगों और आंदोलन के दौरान सामने आए मुद्दों को प्रशासन के सामने रखा.

छात्रों का कहना था कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की दिशा में ठोस निर्णय और स्पष्ट समयसीमा जरूरी है. हजारों छात्रों ने डराने-धमकाने और प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया. छात्रों की एकजुटता ने आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशों को नाकाम कर दिया.

आंदोलन को दबाने के लिए दिल्ली पुलिस और आइटीबीपी की तैनाती की गई, विश्वविद्यालय परिसर बंद किया गया और ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गईं. इसके बावजूद छात्र छात्रसंघ चुनाव की मांग से पीछे नहीं हटे. अंततः अपनी चट्टानी एकता और संघर्ष के बल पर छात्रों ने जीत दर्ज की.

प्रशासन के लिखित आदेश के अनुसार, 15 मई 2027 तक छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने और लागू करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके बाद, 16 जुलाई 2027 से शुरू होने वाले आगामी शैक्षणिक सत्र के 6 सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएंगे.


31 October, 2026