वर्ष 35 / अंक - 39 / रायगडा में इंडिया गठबंधन की परिवर्तन रैली

रायगडा में इंडिया गठबंधन की परिवर्तन रैली

रायगडा में इंडिया गठबंधन की परिवर्तन रैली

21 सितंबर 2026 को इंडिया गठबंधन के आह्वान पर रायगडा (ओडिशा) जिला मुख्यालय में एक विशाल संयुक्त जनसभा आयोजित की गई. खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम-2026 (MMDR) को रद्द करने की मांग करते हुए और इसे ‘ओडिशा को लूटने का मोदी का ब्लूप्रिंट’ बताते हुए, कांग्रेस, भाकपा, माकपा, भाकपा(माले) लिबरेशन और समाजवादी पार्टी ने सर्वसम्मति से यह संयुक्त मांग उठाई और 29 सितंबर को विधानसभा के सामने एक बड़े संयुक्त विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया.

सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई, 2024 के आदेश के आधार पर, राज्य सरकारें खनिज संसाधनों पर टैक्स और राजस्व वसूल सकती हैं. वे 2005 से 2024 तक का बकाया टैक्स भी वसूल सकती हैं. इस आदेश को बेअसर करने के लिए – जिससे ओडिशा को पिछले समय का 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व और 2024 से हर साल कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता – नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026 लागू किया. नतीजतन, खनिज संसाधनों पर राजस्व वसूलने का ओडिशा का अधिकार छीन लिया गया है और पिछला राजस्व पाने का अधिकार भी खत्म कर दिया गया है. इतना ही नहीं, खनिज क्षेत्रों में जमीन के अधिकार भी राज्य से छीन लिए गए हैं. इसलिए भाजपा ने ओडिशा के आर्थिक अधिकारों को कम करने, संघीय व्यवस्था में राज्य की शक्ति को घटाने और ओडिशा के खनिज क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और किसान समुदायों को उनकी पुश्तैनी जमीन, जीवन और आजीविका से हमेशा के लिए बेदखल करने की साजिश रची है. भाजपा सरकार इन नीतियों की वजह से एक ओर जहां स्थानीय लोग जहां खनन से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण का शिकार होंगे, वहीं दूसरी ओर भाजपा के करीबी पूंजीपति मुनाफा कमाएंगे और भाजपा उनसे चंदा इकट्टा करेगी. इंडिया गठबंधन के नेताओं ने ओडिशा के लोगों से इस साजिश के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया है.

इस जनसैलाब में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी लालजी देसाई, सह प्रभारी जीटी कुसुम, पूर्व अध्यक्ष निरंजन पटनायक, जयदेव जेना और शरत पटनायक, कोरापुट के सांसद सप्तगिरि उलाका, कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम, भाकपा के राज्य सचिव डाॅ. प्रशांत कुमार मिश्रा, संयुक्त सचिव जयंत दास व राज्य सचिवालय सदस्य दामोदर बेहरा, माकपा के नेता अली किशोर पटनायक, विधायक लक्ष्मण मुंडा, भाकपा(माले) लिबरेशन के पूर्व विधायक राधाकांत सेठी व नेता तिरुपति गोमांगो, समाजवादी पार्टी की शिवा हाती सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया.

  1. एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026 को तुरंत रद्द किया जाए. राज्य सरकार को ओडिशा-विरोधी इस कानून को वापस लेने के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए और केंद्र के सामने इस संशोधन अधिनियम को रद्द करने की ओडिशा की मांग रखनी चाहिए.
  2. ओडिशा में गलत पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, राज्य के जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को इस्तीफा देना चाहिए.
  3. स्कूल और काॅलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय, अत्याचार और विसंगतियों को खत्म किया जाए और उनकी सभी मांगें पूरी की जायें.
  4. बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित किया जाए.
  5. आदिवासियों, दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बुद्धिजीवियों पर हमलों और उन्हें अंधाधुंध विस्थापित करने की घटनाओं को रोका जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए.

ओडिशा की मौजूदा स्थिति और व्यवस्था को बदलने के लिए, पूरे राज्य की जनता 29 सितंबर को ओडिशा विधानसभा की ओर मार्च करेगी और उसका घेराव करेगी.

कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास और इंडिया गठबंधन की पार्टियों ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि विधानसभा घेराव के बाद, ओडिशा बंद सहित और भी तीव्र आंदोलन कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी.

इस जनसभा में, वक्ताओं ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 का विरोध करने के निम्नलिखित कारणों के बारे में जानकारी दी:

  1. एमएमडीआर-2026 को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा 25 जुलाई, 2024 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले को रद्द करने के इरादे से लागू किया गया है.
  2. इसका असली मकसद देश के संघीय ढांचे के भीतर राज्यों की शक्तियों और अधिकारों को कम करना है.
  3. यह पेसा अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश है.
  4. इसका उद्देश्य खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और किसान समुदायों को उनके घरों, कृषि भूमि और आजीविका से पूरी तरह बेदखल करना है.
  5. इसका मकसद खनिज-समृद्ध राज्यों के लोगों को प्रदूषण की जहरीली चपेट में लाकर सामूहिक मौत की ओर धकेलना है.
  6. जबकि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026 को ओडिशा सहित 15 से अधिक राज्यों की खदानों, भूमि, जल, वनों, घरों और आजीविका को कमजोर करने के लिए पेश किया गया था, ओडिशा से भाजपा के 20 लोकसभा और 5 राज्यसभा सांसदों ने इस साजिशपूर्ण संशोधन अधिनियम का समर्थन किया, जो राज्य के हितों के खिलाफ काम करता है. राज्य और उसके लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय, उन्होंने मोदी-शाह सरकार द्वारा ओडिशा की लूट का समर्थन किया. नेताओं ने सर्वसम्मति से घोषणा की कि जब तक इस एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026 को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, तब तक राज्यव्यापी प्रतिरोध आंदोलन जारी रहेगा.

इस दौरान, कोरापुट से ओडिशा के एकमात्र कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका को संसद में इस अधिनियम का पुरजोर विरोध करने के लिए इस जनसभा में बधाई दी गई. इसके अलावा, राज्य भर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों से भाजपा और संघ परिवार की साजिश के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया गया; जिनका मकसद राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आड़ में कक्षा 1 से 8 तक जान-बूझकर गलत पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित करके सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करना जिससे छात्रों के 8 बैचों का भविष्य दांव पर लग गया और शिक्षा को निजी व्यापारियों को सौंपने के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, काॅलेजों और स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण के जरूरी पदों को खाली रखना है; साथ ही यह मांग की गई कि राज्य के जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. इस कार्यक्रम से पहले, अलग-अलग जिलों के कांग्रेस कमेटी के नेताओं, वामपंथी पार्टी भाकपा के कालाहांडी जिला सचिव जगदीश दुर्गा, कोरापुट जिले के पूर्व सचिव युधिष्ठिर राउल और मलकानगिरी जिले के सचिव हलधर पुजारी ने भाकपा(माले) लिबरेशन के प्रकाश माझी, अनासिम साबर, वृंदावन बिडिका, रामचंद्र प्रास्का, अनिरुद्ध निशिका, गोपीनाथ निमाला और त्रिपाठी मुटुका के साथ मिलकर वामपंथी कार्यकर्ताओं की अगुवाई की. वे अलग-अलग पार्टियों के सैकड़ों सदस्यों और समर्थकों के साथ जनसभा स्थल पर पहुंचे.


26 September, 2026