वर्ष 35 / अंक - 16 / जालन्धर में वाम पार्टियों का युद्ध विरोधी कन्वेंशन...

जालन्धर में वाम पार्टियों का युद्ध विरोधी कन्वेंशन व मार्च

जालन्धर में वाम पार्टियों का युद्ध विरोधी कन्वेंशन व मार्च

-- अजमेर सिंह

ईरान पर साम्राज्यवादी अमेरिका और उसके सहयोगी इजराइल द्वारा युद्ध थोपने के खिलाफ पंजाब में वामपंथी पार्टियों के ‘फासीवाद विरोधी मोर्चा’ की ओर से 15 अप्रैल 2026 को जालन्धर के देश भक्त यादगार हाल में एक ‘युद्ध विरोधी कन्वेंशन’ आयोजित किया गया. 2025 से अस्तित्व में आये इस मोर्चे में इस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा(माले) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (RMPI), भाकपा(माले) न्यू डेमोक्रेसी और एमसीपीआइ(यू) शामिल हैं. कन्वेंशन की अध्यक्षता रतन सिंह रंधावा, अजमेर सिंह समरा, पृथीपाल सिंह मादिमेघा, रुलदू सिंह मानसा और नरंजन सिंह सफीपुर ने की. कुलविंदर सिंह वड़ैच ने मंच संचालक की भूमिका निभाई. कन्वेंशन को मंगत राम पासला, निर्मल धालीवाल, दर्शन खटकर, सुखदर्शन नत्त और जगतार सिंह जनाल ने संबोधित किया.

वक्ताओं ने कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी नेतन्याहू सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और संस्थाओं का खुला उल्लंघन करते हुए ईरान पर युद्ध थोपे हैं. अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर तब हमला किया जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही थी और ईरान ने परमाणु बम न बनाने का अपना वायदा दोहरा दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान समेत मध्य-पूर्व इलाके के देशों के तेल और गैस के भंडार और दूसरे कीमती कुदरती और इंसानी संसाधनों पर कब्जा करने की मंशा रखता है. जबकि नेतन्याहू ने अपने विस्तारवादी मंसूबों को पूरा करने की चाहत में अमेरिका पर दबाव डाल कर यह जंग शुरू की है. वक्ताओं ने कहा कि इस जंग में अमेरिका-इजराइल के नापाक हत्यारे गठजोड़ ने ईरानी नेतृत्व के बड़े हिस्से की हत्या कर वहां के मासूम बच्चों और औरतों समेत हजारों बेगुनाह लोगों की जान ले ली है. इस जंग ने दुनिया की शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर आम लोगों के लिए जरूरी चीजों की भारी कमी, महंगाई और काला बाजारी की स्थिति तैयार कर दी हैं.

वक्ताओं ने जोर देकर मांग की कि बेगुनाहों के कातिल, युद्ध अपराधी ट्रंप और नेतन्याहू को कड़ी और ऐसी सजा दी जानी चाहिए जो मिसाल बन सके. वक्ताओं ने ट्रंप-नेतन्याहू की युद्ध भड़काने वाली साजिशों के खिलाफ इजराइल और अमेरिका समेत दुनिया भर के देशों के लाखों आम लोगों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की जोरदार तारीफ की और भारत के लोगों, खासकर मजदूर वर्ग से इस वैश्विक लामबंदी का मजबूत हिस्सा बनने की जोरदार अपील की. उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देशों, खासकर नए आजाद हुए विकासशील देशों के प्राकृतिक और इंसानी संसाधनों और मेहनतकश लोगों की बेरहमी से हो रही लूट को खत्म करने और दुनिया को जानलेवा युद्धों और लड़ाइयों से बचाने के लिए, दुनिया के हर कोने में इंसानियत के सबसे खतरनाक दुश्मन साम्राज्यवाद से आजाद दुनिया बनाने के लिए, एक जबरदस्त जनयुद्ध छेड़ना आज के दौर की पहली और सबसे बड़ी जरूरत बन गई है.

इस दिशा में, शांति पसंद लोगों और इंसाफ पसंद पार्टियों को ईरान और इजराइली-अमेरिकी साम्राज्य के बीच एक स्थाई युद्धविराम और दुनिया में शांति कायम करने की कोशिशें तेज करनी होंगी. सभी वक्ताओं ने इन युद्ध सरदारों के खिलाफ एक मजबूत जन प्रतिरोध बनाने के लिए ईरान के लोगों की तारीफ की. वक्ताओं ने मोदी सरकार की भी कड़ी निंदा की है, जो हर मुश्किल घड़ी में भारत का साथ देने वाले पीड़ित ईरान के बजाय हमलावरों के साथ खड़ी होकर देश का सम्मान कम कर रही है और भारत को दुनिया की कम्युनिटी से अलग-थलग कर रही है. वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार को ईरान पर थोपे गए इस एकतरफा युद्ध के खिलाफ अपनी चुप्पी और बेपरवाही छोड़ इजराइल जैसे जन हत्यारे और नस्लभेदी देश के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते खत्म कर देने चाहिए. फासीवाद विरोधी मोर्चा ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई समेत युद्धविराम के लिए ईरान की सभी मांगों का पूरा समर्थन किया.

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान समेत दुनिया के हर देश को अपनी आजादी और आजादी की रक्षा करने का पूरा अधिकार है. साथ ही, हर देश के लोग खुद तय करेंगे कि वहां कैसा शासन और कैसी सरकार होगी. अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप या उनके जैसा कोई और सनकी तानाशाह किसी भी देश पर दबाव नहीं डाल सकता और न ही किसी को दूसरे देश के अंदरूनी मामलों में दखल देने का कोई अधिकार होना चाहिए. एक अलग प्रस्ताव के जरिए, नोएडा, मानेसर, पानीपत आदि औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की सही मांग के लिए लड़ रहे मजदूरों पर मोदी-योगी सरकारों द्वारा ढाए जा रहे बेरहम दमन की कड़ी निंदा की गई है. कन्वेंशन में मांग की गई है कि न्यूनतम वेतन को मौजूदा जरूरतों के हिसाब से तय किया जाए. चार लेबर कोड खत्म करके लेबर कानूनों को फिर से लागू किया जाए और गिरफ्तार किए गए मजदूरों को तुरंत रिहा किया जाए. साथ ही, भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में पंजाब की स्थाई सदस्यता खत्म करने की निंदा करते हुए केंद्र सरकार द्वारा इस बारे में जारी किए गए नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की गई है. कन्वेंशन खत्म होने के बाद, शहर में लाल झंडों और युद्ध की भयावहता दिखाते हुए तख्तियों के साथ एक रोषपूर्ण प्रदर्शन किया गया.


18 April, 2026