7 जनवरी को कॉ. नागेश्वर दास (51 वर्ष), जो पटना जिले के मोकामा प्रखंड के मरांची गांव में भाकपा(माले) के एक जुझारू कार्यकर्ता थे, की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. उन्होंने 1994 में पार्टी से जुड़ने के बाद से जीवन के अंतिम समय तक इलाके में सामंती दबदबा के खिलाफ दलित-गरीबों को संगठित कर जुझारू जनांदोलनों की अगुआई करते रहे और इस दौरान कई बार सामंत-अपराधी-पुलिस गडजोड़ के दमन का भी शिकार हुए.
अप्रैल 2025 में जब वे अपने घर में ही थे कि अचानक ब्रेन हेमरेज की वजह से लकवा का शिकर हो गये. परिवार व पार्टी के तरफ से तमाम तरह के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और 26 दिसंबर को उनका निधन हो गया. 27 दिसंबर 2025 को उन्हें अंतिम विदाई दी गई.
जिला कार्यालय सचिव कमलेश कुमार की अध्यक्षता में गांधी टोला में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में जुटे सभी नेताओं -कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि देने के बाद उनकी याद में 2 मिनट का मौन रखा. इस मौके पर उनकी पत्नी व एकमात्र संतान बेटी भी मौजूद थीं. वहां मौजूद पार्टी नेताओं, सदस्यों व शुभचिन्तकों ने अपनी संवेदना जताते हुए कहा कि कॉ. नागेश्वर अधूरे सपने को पूरा किया जाएगा. श्रद्धांजलि सभा में पार्टी की जिला कमेटी के कई सदस्य व प्रखंड सचिव – मोहन (पुनपुन), श्रीकांत दास (नौबतपुर), शैलेंद्र यादव (फतुहा), सत्यानंद पासवान (संपतचक) व आनंदी पासवान तथा राजाराम; मिलन पासवान, महेंद्र साब, अशोक तांती, मुकेश सिंह, नंदलाल दास, आनंद कुमार, बृजी दास, सुदामा दास, रामप्रवेश दास, जीतन पासवान सहित अनेकों कार्यकर्ता व महागठबंधन के नेता-समर्थक भी मौजूद थे.