का. एनामुल हक (84 वर्ष) अब हमारे बीच नहीं रहे. 29 मार्च 2026 की सुबह करीब 6 बजे पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित रुबन अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. पिछले चार दिनों से उनके फेफड़े में संक्रमण का इलाज हो रहा था. आखिर समय में वेंटिलेटर पर रखा गया, परंतु उनकी वापसी सम्भव नहीं हो सकी.
का. एनामुल हक के पूर्वज नगरनौसा (नालंदा) के एरइ ग्राम निवासी थे जहां से वे वर्ष 1890 के करीब पटना शहर के सब्जीबाग आकर स्थायी रूप से बस गये. उनकी शुरूआती शिक्षा पटना ही हुई.
पटना शहर में पार्टी निर्माण के शुरुआती दिनों में ही वे पार्टी में शामिल हुए और अनेकों उतार-चढावों के बावजूद हमेशा पार्टी से जुड़े रहे. पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ रहने के आद भी वे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे.
पार्टी संगठन और कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रति उनके अंदर गजब का उत्साह था. देश-दुनिया की हर घटना पर वे पैनी नजर तो रखते ही थे, कामरेडों के सुख-दुख के बारे में भी हमेशा सोचते रहते थे और हर किसी से इस बाबत बात किया करते थे. पार्टी का विकास और विस्तार हो, यह हमेशा उनकी चिंता में शामिल रहता है. हमेशा कुछ करने की उनकी भूख कभी खत्म नहीं होती थी.
उनके परिवार में पत्नी रकीबा खातून समेत 3 बेटों व 3 बेटियां हैं. उनके निधन से पार्टी ने एक सच्चा कम्युनिस्ट खो दिया है तथा पार्टी व परिजनों को भारी क्षति पहुंची है. उनका जीवन हम सबों को आजीवन कम्युनिस्ट बने रहने; पार्टी के विकास-विस्तार के बारे में सोचते रहने और अपने साथियों के प्रति चिंतित रहने की प्रेरणा देता रहेगा.