परिवर्तन संकल्प पत्र
बिहार में बदलाव के लिए भाकपा (माले) के संकल्प का दस्तावेज
बीते दो दशकों से राज्य की सत्ता में बैठी भाजपा-जदयू सरकार से राज्य को मुक्त करने का समय आ गया है. विकास के नाम पर विनाश, सुशासन के नाम पर अपराध, लूट व अराजकता, चौपट हो चुकी शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था, गरीबी का दुष्चक्र, ऐतिहासिक पिछड़ापन व पलायन, दलितों, अल्पसंख्यकों व महिलाओं के खिलाफ हिंसा, चरम बेरोजगारी - आज के बिहार का यही सच है. छात्र-नौजवान रोजगार और भविष्य की तलाश में पलायन कर रहे हैं, किसान कर्ज और लागत के बोझ तले दबे हैं और महिलाएं कर्जदारी व असुरक्षा के दोहरे संकट में जी रही हैं. अब यह साफ है कि यह सरकार बिहार को विनाश की ओर धकेल चुकी है.
2020 में कोरोना काल के बीच हुए विधानसभा चुनाव में ही बिहार की जनता ने भाजपा-जदयू से मुक्ति की मंशा जाहिर कर दी थी और बिहार को लगभग बदलाव के मुहाने पर ला खड़ा किया था. लेकिन तब महागठबंधन बहुत मामूली अंतर से सरकार बनाने से चूक गया था. भाकपा(माले) ने बदलाव की इस जनभावना से नयी ऊर्जा ग्रहण की और पिछले 5 बरसो में संघर्षकारी ताकतों की व्यापक एकजुटता कायम करते हुए, बिहार में बदलाव की मुहिम आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास करती रही.
2020 में हमारे जीते हुए सभी 12 विधायकों ने सदन से लेकर सड़क तक हर दमन-उत्पीड़न के खिलाफ मुखर आवाज उठाई. विधानसभा के अंदर हर जरूरी सवाल पर हस्तक्षेप किया और सरकार को कटघरे में खड़ा किया. जब नीतीश कुमार महागठबंधन में आए तो उस 17 महीने की अल्पावधि में भी सरकार व जनता के बीच माले विधायकों ने एक पुल के रूप में काम किया. जनता की आवाज को सदन तक और सदन के निर्णयों को जनता तक पहुंचाने की जो जिम्मेदारी लोकतांत्रिक राजनीति में होनी चाहिए, उसे हमने बखूबी निभाया है.
महागठबंधन की सरकार के दौरान हुए सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण ने बिहार की भयावह स्थिति उजागर की. तकरीबन 95 लाख परिवार महागरीबी रेखा के नीचे पाए गए. इन परिवारों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2-2 लाख रु. सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन शायद ही आज तक किसी एक आदमी को भी यह पूरी राशि मिली हो. 2 लाख रु. सहायता राशि, आरक्षण का दायरा 65 प्रतिशत करने, सामंती हिंसा पर रोक लगाने, गरीबों के वास-आवास आदि सवालों पर माले ने ‘हक दो-वादा निभाओ’ अभियान की शुरूआत की और राज्य के प्रखंड मुख्यालयों पर धारावाहिक आंदोलन चलाए.
विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने पर माले के विधायकों ने अपने पांच साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा. यह बिहार की राजनीति में एक नयी तरह की बात जरूर है, लेकिन यह राजनीतिक पारदर्शिता, सुचिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. जनता के प्रति जवाबदेही हमारी राजनीति की मूल पहचान है और यही हमारी ताकत भी है.
बिहार के बदलाव की आकांक्षा को आकार देने के लिए ‘बदलो बिहार अभियान’ के तहत पदयात्राओं से लेकर महाजुटान तक तमाम आन्दोलनात्मक पहलकदमियां ली गईं. इस अभियान के जरिए हमने बिहार के कोने-कोने में जाकर मजदूरों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं, दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों, स्कीम वर्करों की आवाज को एक साझा स्वर में पिरोया. बिहार में चल रहे तमाम जनांदोलनों को एक साझा मंच पर लाने का काम भी किया ताकि सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक व्यापक संघर्ष खड़ा किया जा सके.
देश के पैमाने पर बने इंडिया गठबंधन को आकार देने और धरातल पर मजबूत करने के अभियान को भाकपा (माले) ने पूरी ताकत से चलाया है क्योंकि हम मानते हैं कि भाजपा-आरएसएस के फासीवादी निजाम को हराना, लोकतंत्र और संविधान को बचाने की सबसे पहली शर्त है.
विधानसभा का यह चुनाव न केवल बिहार के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि देश में लोकतंत्र और संविधान के अस्तित्व के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. विशेष गहन पुनर्रीक्षण (एसआईआर) के जरिये अपनी मनमाफिक मतदाता सूची बनाने की कोशिशों को भाकपा (माले), महागठबंधन और बिहार की जनता ने काफी हद तक पीछे धकेल दिया है. सत्ता कब्जा करने के लिए वोट चोरी का यह लोकतंत्र विरोधी प्रयोग, भाजपा पूरे देश में आजमाने की तैयारी में है.
संविधान और लोकतंत्र पर खुले हमले का यह नमूना भर है. जब आरएसएस जैसा फासीवादी संगठन अपना सौवां वर्ष मना रहा है और देश की राजसत्ता पर उसका कब्जा है तो लोकतंत्र, संविधान और देश की गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षा तथा कॉरपोरेट लूट व बुलडोजर राज को शिकस्त देने के अभियान को मज़बूत करने की जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है.
भाकपा (माले) विधानसभा के इस चुनाव में बहुत कम - केवल 20 सीटों पर - लेकिन पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ चुनाव लड़ रही है. इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हुए हमारा दृढ़ संकल्प है कि बिहार के गरीबों, दलितों, वंचितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और युवाओं के हक-अधिकार के लिए पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे. हम जानते हैं कि हमारे संघर्ष का केंद्र न सिर्फ विधानसभा की सीटें हैं, बल्कि बिहार की जनता की आवाज, उम्मीद और उनके अधिकार हैं.
इंडिया गठबंधन के साझा संकल्प पत्र के साथ अपने को संबद्ध करते हुए, भाकपा (माले) का यह परिवर्तन संकल्प पत्र हम आपके हाथों में सौंप रहे हैं, जो तमाम संघर्षशील, मेहनतकश तबकों के बेहतर भविष्य के लिए, बिहार के परिवर्तन के संकल्प का दृष्टिपत्र है. यह संकल्प पत्र एक नये बिहार की परिकल्पना है - ऐसा बिहार जो समानता, शिक्षा, रोजगार, न्याय और मानवीय गरिमा पर टिका हो, ऐसा बिहार जो अपनी युवा शक्ति के बल पर आगे बढ़े.
भाकपा (माले) का यह संकल्प है कि हम गरीबों, महिलाओं, दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों, छात्रों और नौजवानों की आवाज बनकर, सत्ता की हर अन्यायपूर्ण दीवार को चुनौती देंगे. यह चुनाव हमारे लिए सिर्फ सत्ता बदलने का अवसर नहीं, बल्कि बिहार की दिशा और दशा बदलने का ऐतिहासिक मौका है.
यह संकल्प पत्र बिहार के मेहनतकश, भूमिहीन, किसान, मजदूर, महिला, युवा, दलित, वंचित, अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की गारंटी का दस्तावेज है.
हम संकल्प लेते हैं कि :
बिहार को न्याय, समानता और लोकतंत्र की सशक्त नींव पर खड़ा करेंगे, ताकि विकास का लाभ वंचित समुदाय तक पहुंचे
परिवर्तन संकल्प पत्र
बिहार में बदलाव के लिए भाकपा (माले) के संकल्प का दस्तावेज
बीते दो दशकों से राज्य की सत्ता में बैठी भाजपा-जदयू सरकार से राज्य को मुक्त करने का समय आ गया है. विकास के नाम पर विनाश, सुशासन के नाम पर अपराध, लूट व अराजकता, चौपट हो चुकी शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था, गरीबी का दुष्चक्र, ऐतिहासिक पिछड़ापन व पलायन, दलितों, अल्पसंख्यकों व महिलाओं के खिलाफ हिंसा, चरम बेरोजगारी - आज के बिहार का यही सच है. छात्र-नौजवान रोजगार और भविष्य की तलाश में पलायन कर रहे हैं, किसान कर्ज और लागत के बोझ तले दबे हैं और महिलाएं कर्जदारी व असुरक्षा के दोहरे संकट में जी रही हैं. अब यह साफ है कि यह सरकार बिहार को विनाश की ओर धकेल चुकी है.
2020 में कोरोना काल के बीच हुए विधानसभा चुनाव में ही बिहार की जनता ने भाजपा-जदयू से मुक्ति की मंशा जाहिर कर दी थी और बिहार को लगभग बदलाव के मुहाने पर ला खड़ा किया था. लेकिन तब महागठबंधन बहुत मामूली अंतर से सरकार बनाने से चूक गया था. भाकपा(माले) ने बदलाव की इस जनभावना से नयी ऊर्जा ग्रहण की और पिछले 5 बरसो में संघर्षकारी ताकतों की व्यापक एकजुटता कायम करते हुए, बिहार में बदलाव की मुहिम आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास करती रही.
2020 में हमारे जीते हुए सभी 12 विधायकों ने सदन से लेकर सड़क तक हर दमन-उत्पीड़न के खिलाफ मुखर आवाज उठाई. विधानसभा के अंदर हर जरूरी सवाल पर हस्तक्षेप किया और सरकार को कटघरे में खड़ा किया. जब नीतीश कुमार महागठबंधन में आए तो उस 17 महीने की अल्पावधि में भी सरकार व जनता के बीच माले विधायकों ने एक पुल के रूप में काम किया. जनता की आवाज को सदन तक और सदन के निर्णयों को जनता तक पहुंचाने की जो जिम्मेदारी लोकतांत्रिक राजनीति में होनी चाहिए, उसे हमने बखूबी निभाया है.
महागठबंधन की सरकार के दौरान हुए सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण ने बिहार की भयावह स्थिति उजागर की. तकरीबन 95 लाख परिवार महागरीबी रेखा के नीचे पाए गए. इन परिवारों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2-2 लाख रु. सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन शायद ही आज तक किसी एक आदमी को भी यह पूरी राशि मिली हो. 2 लाख रु. सहायता राशि, आरक्षण का दायरा 65 प्रतिशत करने, सामंती हिंसा पर रोक लगाने, गरीबों के वास-आवास आदि सवालों पर माले ने ‘हक दो-वादा निभाओ’ अभियान की शुरूआत की और राज्य के प्रखंड मुख्यालयों पर धारावाहिक आंदोलन चलाए.
विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने पर माले के विधायकों ने अपने पांच साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा. यह बिहार की राजनीति में एक नयी तरह की बात जरूर है, लेकिन यह राजनीतिक पारदर्शिता, सुचिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. जनता के प्रति जवाबदेही हमारी राजनीति की मूल पहचान है और यही हमारी ताकत भी है.
बिहार के बदलाव की आकांक्षा को आकार देने के लिए ‘बदलो बिहार अभियान’ के तहत पदयात्राओं से लेकर महाजुटान तक तमाम आन्दोलनात्मक पहलकदमियां ली गईं. इस अभियान के जरिए हमने बिहार के कोने-कोने में जाकर मजदूरों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं, दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों, स्कीम वर्करों की आवाज को एक साझा स्वर में पिरोया. बिहार में चल रहे तमाम जनांदोलनों को एक साझा मंच पर लाने का काम भी किया ताकि सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक व्यापक संघर्ष खड़ा किया जा सके.
देश के पैमाने पर बने इंडिया गठबंधन को आकार देने और धरातल पर मजबूत करने के अभियान को भाकपा (माले) ने पूरी ताकत से चलाया है क्योंकि हम मानते हैं कि भाजपा-आरएसएस के फासीवादी निजाम को हराना, लोकतंत्र और संविधान को बचाने की सबसे पहली शर्त है.
विधानसभा का यह चुनाव न केवल बिहार के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि देश में लोकतंत्र और संविधान के अस्तित्व के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. विशेष गहन पुनर्रीक्षण (एसआईआर) के जरिये अपनी मनमाफिक मतदाता सूची बनाने की कोशिशों को भाकपा (माले), महागठबंधन और बिहार की जनता ने काफी हद तक पीछे धकेल दिया है. सत्ता कब्जा करने के लिए वोट चोरी का यह लोकतंत्र विरोधी प्रयोग, भाजपा पूरे देश में आजमाने की तैयारी में है.
संविधान और लोकतंत्र पर खुले हमले का यह नमूना भर है. जब आरएसएस जैसा फासीवादी संगठन अपना सौवां वर्ष मना रहा है और देश की राजसत्ता पर उसका कब्जा है तो लोकतंत्र, संविधान और देश की गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षा तथा कॉरपोरेट लूट व बुलडोजर राज को शिकस्त देने के अभियान को मज़बूत करने की जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है.
भाकपा (माले) विधानसभा के इस चुनाव में बहुत कम - केवल 20 सीटों पर - लेकिन पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ चुनाव लड़ रही है. इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हुए हमारा दृढ़ संकल्प है कि बिहार के गरीबों, दलितों, वंचितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और युवाओं के हक-अधिकार के लिए पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे. हम जानते हैं कि हमारे संघर्ष का केंद्र न सिर्फ विधानसभा की सीटें हैं, बल्कि बिहार की जनता की आवाज, उम्मीद और उनके अधिकार हैं.
इंडिया गठबंधन के साझा संकल्प पत्र के साथ अपने को संबद्ध करते हुए, भाकपा (माले) का यह परिवर्तन संकल्प पत्र हम आपके हाथों में सौंप रहे हैं, जो तमाम संघर्षशील, मेहनतकश तबकों के बेहतर भविष्य के लिए, बिहार के परिवर्तन के संकल्प का दृष्टिपत्र है. यह संकल्प पत्र एक नये बिहार की परिकल्पना है - ऐसा बिहार जो समानता, शिक्षा, रोजगार, न्याय और मानवीय गरिमा पर टिका हो, ऐसा बिहार जो अपनी युवा शक्ति के बल पर आगे बढ़े.
भाकपा (माले) का यह संकल्प है कि हम गरीबों, महिलाओं, दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों, छात्रों और नौजवानों की आवाज बनकर, सत्ता की हर अन्यायपूर्ण दीवार को चुनौती देंगे. यह चुनाव हमारे लिए सिर्फ सत्ता बदलने का अवसर नहीं, बल्कि बिहार की दिशा और दशा बदलने का ऐतिहासिक मौका है.
यह संकल्प पत्र बिहार के मेहनतकश, भूमिहीन, किसान, मजदूर, महिला, युवा, दलित, वंचित, अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की गारंटी का दस्तावेज है.
हम संकल्प लेते हैं कि :
बिहार को न्याय, समानता और लोकतंत्र की सशक्त नींव पर खड़ा करेंगे, ताकि विकास का लाभ वंचित समुदाय तक पहुंचे
1. भूमिहीनों और बेघरों को न्याय :
- हर भूमिहीन और बेघर परिवार को ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डिसमिल, शहरी इलाकों में 3 डिसमिल जमीन और पक्का मकान
- बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशें लागू कर 21 लाख एकड़ जमीन का वितरण
- गैर-मजरूआ और सरकारी जमीनों पर बसे गरीबों को पर्चा और दखल-दिहानी की गारंटी
- बिना पुनर्वास के किसी भी गरीब को उजाड़ने पर कानूनन रोक
- बेतिया राज की जमीन पर बसे लोगों को कानूनी अधिकार और बेदखली पर रोक
2. किसान, बटाईदार और कृषि समृद्धि :
· सभी फसलों की सरकारी खरीद और उचित दाम (एम.एस.पी.) की गारंटी
- किसानों और ग्रामीण मजदूरों के कर्ज माफ
- बटाईदारों को पहचान-पत्र, तमाम सरकारी सुविधाएँ, सिकमी बटाईदारों को पुश्तैनी हक और बेदखली पर रोक
- एपीएमसी एक्ट की बहाली, कृषि बाजार समितियों को पुनः सक्रिय किया जाएगा
- कृषि आधारित उद्योग-धंधों पर जोर दिया जाएगा, लघु व मध्यम उद्योगों को सशक्त बनाने पर जोर
- बाढ़-सुखाड़ नियंत्रण और सुसंगत समाधान
- सोन सहित सभी नहरों का आधुनिकीकरण, अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा और इंद्रपुरी जलाशय का निर्माण
- अंधाधुंध व अविवेकपूर्ण भूमि अधिग्रहण पर रोक, 2013 के कानून के अनुसार उचित मुआवजे की गारंटी
3. सामाजिक समानता और न्याय :
- वंचित समुदायों को कुल 65 प्रतिशत आरक्षण और इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में दर्ज कराने की पहल
- राशन और पेंशन जैसी बुनियादी जरूरतों की गारंटी
- दलित-गरीबों पर हिंसा, पुलिसिया ज्यादती और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई
- 1500 रु. वृद्धावस्था पेंशन, 2 लाख रुपए तक के सभी कर्जो की माफी
- अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति उप घटक योजना (एस.सी./एस.टी. सब प्लान) के लिए कानून बनाया जाएगा ताकि इस प्लान की धनराशि सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की बेहतरी के लिए खर्च हो
- प्रमोशन में आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा
4. जनकल्याण की योजनाओं को मजबूत बनाना :
- हर गांव में शुद्ध पेयजल और सफाई व्यवस्था
- जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) को कारगर बनाने पर जोर तथा चावल, तेल, मसाला, चीनी सहित रोजमर्रे की अन्य जरूरतों की पूर्ति
- गैस सिलेंडर का दाम 500 रु. तक नियंत्रित करना
- महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय
- शराब बंदी कानून की समीक्षा और न्यायपूर्ण नीति
- गरीबों पर थोपे गए खून-चूसक स्मार्ट मीटर पर रोक और सभी गरीब परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली
5. महिलाओं के अधिकार और सम्मान:
- सभी महिलाओं को 2500 रु. मासिक सम्मान राशि
- हिंसा, उत्पीड़न और ऑनर क्राइम पर सख्त रोक
- माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा मनमाने सूद पर रोक, किस्त वसूली की उत्पीड़नकारी प्रक्रिया पर रोक के लिए नियामक कानून व संस्था का निर्माण और 2 लाख रु. तक की कर्जमाफी, स्वरोजगार के लिए ब्याज मुक्त ऋण
- संगठित व असंगठित क्षेत्रों में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव और उत्पीड़न रोकने की व्यवस्था और कानून का पालन
- मातृत्व अवकाश के साथ महवारी अवकाश की गारंटी
6. श्रमिकों और स्कीम वर्करों को सम्मान :
- जीविका की महिलाओं के लिए रोजगार की गारंटी
- आशा, ममता, रसोइया, आंगनबाड़ी, जीविका, सफाईकर्मी और सभी संविदाकर्मियों को न्यूनतम मानदेय व सरकारी कर्मी का दर्जा
- मनरेगा में 200 दिन काम, 600 रु. दैनिक मजदूरी और शहरी गरीबों के लिए रोजगार गारंटी योजना
- पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल की जाएगी
- प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए निदेशालय व राज्यवार सहायता केंद्र की स्थापना
- समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी
7. शिक्षा व रोजगार :
- सभी रिक्त पदों पर तत्काल बहाली
- बेरोजगारों को 3000 रु. मासिक भत्ता
- समान शिक्षा प्रणाली पर जोर और निजी शिक्षा पर नियंत्रण
- शिक्षा के निजीकरण और महंगी, असमान शिक्षा को बढ़ावा देने वाली नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के स्थान पर गुणवत्तापूर्ण, समान शिक्षा को बढ़ावा देने वाली वैकल्पिक शिक्षा नीति
- पेपर लीक और परीक्षा अनियमितता पर सख्त कानून और छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि
- हर प्रखंड में महिला कॉलेज और छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा
- पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की पहल
- खेलकूद व प्रगतिशील सांस्कृतिक गतिविधियों और पुस्तकालय निर्माण को प्रोत्साहन
8. स्वास्थ्य, जनसेवा और विकलांग जन :
- स्वास्थ्य सेवाओं में 40 प्रतिशत रिक्तियों की बहाली, सभी के लिए मुफ्त इलाज, जांच और दवा
- हर पंचायत में डॉक्टर और दवा के साथ सुसज्जित स्वास्थ्य केंद्र
- जिला अस्पताल को तमाम आधुनिक सुविधाओं व विशेषज्ञों से लैस करना
- पीएचसी में महिला डाॅक्टरों की अनिवार्य बहाली
- सभी विकलांग जनों को 3000 रु. मासिक पेंशन और मुफ्त राशन
9. आदिवासी समुदाय व पर्यावरण:
- आदिवासियों को वनाधिकार, पेसा कानून के तहत स्वशासन और विस्थापन से सुरक्षा
- अवैध बालू खनन पर रोक, सरकारी नियंत्रण में बालू खनन
- नदियों पर तटबंध के पूर्ववर्ती फैसलों की समीक्षा कर निर्माण पर निर्णय
10. छोटे दुकानदार और स्टार्टअप :
- फुटपाथी दुकानदारों की आजीविका की सुरक्षा और वेंडिंग जोन की गारंटी
- छोटे व्यवसाइयों और स्टार्टअप्स को आसान कर्ज व मार्गदर्शन सहायता
- दुकानदारों/व्यापारियों की हत्या -लूट पर प्रभावी रोक व ऑनलाईन व्यापार / कारोबार को सीमित करना
- व्यावसायी सुरक्षा आयोग का गठन
- सहारा इंडिया में निवेशकों के फंसी जमा राशि को वापस दिलाने का हरसंभव प्रयास
11. संविधान प्रदत्त राजनीतिक - सामाजिक - धार्मिक अधिकारों की रक्षा:
- अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा
- वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर अमल
- सांप्रदायिक हिंसा और हेट स्पीच पर त्वरित कार्रवाई
- सुसंगत शासन और संविधान की सुरक्षा की गारंटी
- संविधान विरोधी या संघीय ढांचे के खिलाफ किसी कानून को बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा
यह संकल्प पत्र न्याय, समानता और लोकतंत्र पर आधारित बिहार के निर्माण की गारंटी का दस्तावेज है.
बिहार विधानसभा में भाकपा (माले) विधायक दल जनहित, जनता की आवाज़ तथा जनांदोलनों की ताकत का प्रतिनिधित्व करेगा और शासन में पारदर्शिता व जवाबदेही स्थापित करने के लिए हर संभव पहल व संघर्ष करेगा.
भाकपा (माले) के 20 प्रत्याशियों को झंडा पर तीन तारा के सामने वाला बटन दबा कर अपना सहयोग और वोट देकर विजयी बनाइये, जनता के हक-अधिकार, संविधान, लोकतंत्र की सबसे मुखर, सबसे प्रतिबद्ध आवाज को मजबूत कीजिये. इंडिया गठबंधन को भारी समर्थन देकर निर्णायक बहुमत के साथ सरकार बनाइये.
इंकलाब जिंदाबाद,
भाकपा (माले), बिहार राज्य कमिटी,
पटना, बिहार
महागठबंधन समर्थित भाकपा - माले उम्मीदवारों की सूची
|
1 |
महबूब आलम |
65-बलरामपुर |
|
2 |
सत्यदेव राम |
107-दरौली |
|
3 |
अमरनाथ यादव |
109-दरौंदा |
|
4 |
अमरजीत कुशवाहा |
106- जीरादेई |
|
5 |
दिव्या गौतम
|
181-दीघा |
|
6 |
धनंजय |
103-भोरे |
|
7 |
मदन सिंह |
196-तरारी |
|
8 |
क्यामुद्दीन अंसारी |
194-आरा |
|
9 |
शिवप्रकाश रंजन |
195-अगिआंव |
|
10 |
अजीत कुमार सिंह |
201-डुमरांव |
|
11 |
गोपाल रविदास |
188-फुलवारी |
|
12 |
संदीप सौरभ |
190-पालीगंज |
|
13 |
फूलबाबु सिंह |
132- वारिसनगर |
|
14 |
रंजीत कुमार राम |
131-कल्याणपुर |
|
15 |
वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता |
09-सिकटा |
|
16 |
विश्वनाथ चौधरी |
173-राजगीर |
|
17 |
अनिल कुमार |
42-पिपरा (सुपौल) |
|
18 |
अरुण सिंह |
213-काराकाट |
|
19 |
महानंद सिंह |
214-अरवल |
|
20 |
रामबली सिंह यादव |
217 - घोसी |
भाकपा(माले), बिहार राज्य कमिटी, पटना, बिहार
यह संकल्प पत्र न्याय, समानता और लोकतंत्र पर आधारित बिहार के निर्माण की गारंटी का दस्तावेज है.
बिहार विधानसभा में भाकपा (माले) विधायक दल जनहित, जनता की आवाज़ तथा जनांदोलनों की ताकत का प्रतिनिधित्व करेगा और शासन में पारदर्शिता व जवाबदेही स्थापित करने के लिए हर संभव पहल व संघर्ष करेगा.
भाकपा (माले) के 20 प्रत्याशियों को झंडा पर तीन तारा के सामने वाला बटन दबा कर अपना सहयोग और वोट देकर विजयी बनाइये, जनता के हक-अधिकार, संविधान, लोकतंत्र की सबसे मुखर, सबसे प्रतिबद्ध आवाज को मजबूत कीजिये. इंडिया गठबंधन को भारी समर्थन देकर निर्णायक बहुमत के साथ सरकार बनाइये.
इंकलाब जिंदाबाद,
भाकपा (माले), बिहार राज्य कमिटी,
पटना, बिहार
महागठबंधन समर्थित भाकपा - माले उम्मीदवारों की सूची
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1 |
महबूब आलम |
65-बलरामपुर |
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2 |
सत्यदेव राम |
107-दरौली |
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3 |
अमरनाथ यादव |
109-दरौंदा |
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4 |
अमरजीत कुशवाहा |
106- जीरादेई |
|
5 |
दिव्या गौतम
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181-दीघा |
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6 |
धनंजय |
103-भोरे |
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7 |
मदन सिंह |
196-तरारी |
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8 |
क्यामुद्दीन अंसारी |
194-आरा |
|
9 |
शिवप्रकाश रंजन |
195-अगिआंव |
|
10 |
अजीत कुमार सिंह |
201-डुमरांव |
|
11 |
गोपाल रविदास |
188-फुलवारी |
|
12 |
संदीप सौरभ |
190-पालीगंज |
|
13 |
फूलबाबु सिंह |
132- वारिसनगर |
|
14 |
रंजीत कुमार राम |
131-कल्याणपुर |
|
15 |
वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता |
09-सिकटा |
|
16 |
विश्वनाथ चौधरी |
173-राजगीर |
|
17 |
अनिल कुमार |
42-पिपरा (सुपौल) |
|
18 |
अरुण सिंह |
213-काराकाट |
|
19 |
महानंद सिंह |
214-अरवल |
|
20 |
रामबली सिंह यादव |
217 - घोसी |
भाकपा(माले), बिहार राज्य कमिटी, पटना, बिहार