नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध के खिलाफ 8 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन में कम से कम 19 युवा प्रदर्शनकारियों के मारे जाने और भीषण राज्य दमन से हम अत्याधिक व्यथित और दुखी हैं. नेपाल में लोकतंत्र की हालिया यात्रा के इतिहास में ये हत्याएं, काले अध्याय की प्रतीक हैं.
व्हाट्स ऐप, यूट्यूब और एक्स समेत 26 सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का कदम, लोगों के स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार पर हमला है. फर्जी खबरों और झूठी सूचनाओं का प्रसार रोकने के नाम पर सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना, एक बेहद गड़बड़ रास्ते की ओर बढ़ना है जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर करता है. नेपाल के युवा भ्रष्टाचार के मसले पर भी गोलबंद हुए हैं क्योंकि भ्रष्टाचार ने देश की संस्थाओं को जर्जर कर दिया है और जनता में अविश्वास को गहरा कर दिया है.
नेपाल ने राजतंत्र से लेकर गणतांत्रिक लोकतंत्र तक लंबी यात्रा तय की है पर इस तरह की दमनात्मक कार्यवाहियां उस लोकतांत्रिक भावना के लिए खतरा, जिसने राजाओं और तानाशाहों को गद्दी से बेदखल कर दिया था. जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान और उनका विस्तार करना ही वह एकमात्र रास्ता है, जो नेपाल में लोकतंत्र को मजबूत कर सकता है और यह देश में लोकतंत्र की लंबी लड़ाई के दौरान की गयी कुर्बानियों का भी सम्मान होगा.
लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की सभी कोशिशों को खारिज करने के मामले में, हम संपूर्ण क्षेत्र की प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों के साथ हैं. हम तत्काल दमन को खत्म करने और पीड़ितों के न्याय तथा इन घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने का आह्वान करते हैं.
-- केंद्रीय कमेटी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी- लेनिनवादी) लिबरेशन.