नेपाल में हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री के.पी. ओली के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार का पतन कर दिया है. कल राज्य द्वारा छेड़ी गयी हिंसा में कई लोग मारे गए और कई घायल हुए, उसके बाद आज नेपाल में व्यापक भीड़ की हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुई, संसद भवन को भी आग के हवाले कर दिया गया, विभिन्न पार्टियों के कई नेताओं व उनके परिवारों को निशाना बनाया गया, इन सब घटनाओं ने नेपाल को दहला दिया है.
प्रदर्शनकारियों के कई हिस्सों ने इस बात पर जोर देना जारी रखा है कि आंदोलन का उद्देश्य शांतिपूर्ण बदलाव है, उन्होंने "बाहरी आंदोलनकारियों " को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है और सेना से अपील की है कि शांति कायम करने व सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए, वह कर्फ्यू लागू करे.
नेपाल के युवाओं, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और नेपाल का भविष्य तय करने के जनता के अधिकार का सम्मान करते हुए भी हम निरंतर बढ़ती हिंसा और लगातार लोगों के जान गंवाने की घटनाओं से अत्याधिक चिंतित हैं. हम उम्मीद करते हैं कि नेपाल की जनता शांति कायम करने में सफल होगी और वार्ता द्वारा संक्रमण की ऐसी राह निकलेगी, जो नेपाल के गणतंत्रात्मक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देगी.
नेपाल ने राजतंत्र को खत्म करके, संसदीय लोकतंत्र की तरफ संक्रमण की राह, मुख्यतया कम्युनिस्टों के नेतृत्व में ली थी, लेकिन यह विडंबना है कि आज भ्रष्टाचार, परिवारवाद और निरंकुशता के खिलाफ युवाओं के विक्षोभ के निशाने पर तात्कालिक रूप से कम्युनिस्ट ही प्रतीत हो रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि नेपाल के लोग राजतंत्र की पुनर्बहाली के खिलाफ तथा इस हिमालयी गणतंत्र की संप्रभुता को कमतर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ, डट कर खड़े रहेंगे और नेपाल के कम्युनिस्ट इस परिस्थिति से उबर जाएंगे और लोकतंत्र, प्रगति व जनहित की सर्वाधिक विश्वसनीय ताकत के रूप में अपनी भूमिका को पुनर्बहाल करने में कामयाब होंगे.
-- केंद्रीय कमेटी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी- लेनिनवादी) लिबरेशन (9 सितंबर 2025)