चार वामपंथी पार्टियों – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, और अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक – के राज्य नेतृत्व ने ओडिशा के रायगड़ा जिले के काशीपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सिजिमाली क्षेत्र में 7 अप्रैल की सुबह हुई पुलिस दमन की घटना से प्रभावित गांवों का दौरा किया.
चारों पार्टियों के राज्य सचिवों – डॉ. प्रशांत कुमार मिश्रा, सुरेश चंद्र पाणिग्रही, युधिष्ठिर महापात्र और पूर्णचंद्र पाढ़ी – ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसकी कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि यह घटना अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी लोगों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर एक खुला हमला है.
रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 3 बजे सुबह, सशस्त्र पुलिस बलों ने कांतमाल गांव को घेर लिया, बिजली की आपूर्ति काट दी, आंसू गैस का इस्तेमाल किया, घरों में जबरन घुस गए, और ग्रामीणों को डराने के लिए हवाई फायरिंग का सहारा लिया. इस कार्रवाई के दौरान पुरुषों और महिलाओं – दोनों के साथ मारपीट की गई. आंसू गैस के इस्तेमाल से एक पालतू जानवर की मौत हो गई. यह मानवाधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन है.
पार्टियों ने कहा कि ‘डबल इंजन सरकार’ ओडिशा के लिए दोहरी मुसीबत लेकर आई है. एक आदिवासी राष्ट्रपति और एक आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद, आदिवासी समुदायों पर इस तरह का राज्य-प्रायोजित दमन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. पार्टियों ने चेतावनी दी कि अंधाधुंध खनन, जबरन भूमि अधिग्रहण, क्रूर दमन और अमानवीय विस्थापन के खिलाफ विरोध और तेज होगा.
उन्होंने यह भी बताया कि वेदांता कंपनी के लिए सड़क निर्माण की सुविधा देने के उद्देश्य से काशीपुर ब्लॉक की सुंगर ग्राम पंचायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू कर दी गई है और इस आदेश के तहत सड़क के 100 मीटर के दायरे में चार से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. आदिवासी आबादी की समुदाय-आधारित जीवनशैली को देखते हुए, इस तरह के प्रतिबंध उनके दैनिक जीवन, कृषि, वन-आधारित आजीविका और सामाजिक अस्तित्व पर गंभीर प्रभाव डालते हैं. ग्राम सभा की सहमति के बिना ऐसी परियोजनाओं को थोपना संवैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है.
चारों वामपंथी दलों ने संयुक्त रूप से ये मांगें की हैं :
1. भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा को तत्काल वापस लिया जाए.
2. ग्राम सभा की सहमति के बिना सभी खनन गतिविधियों और परियोजनाओं पर रोक लगाई जाए.
3. वेदांता के लिए सड़क निर्माण का काम तत्काल रोका जाए.
4. सिजीमाली से पुलिस की तैनाती हटाई जाए और दमन-चक्र समाप्त किया जाए.
5. पेसा और वन अधिकार अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए.
6. अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए ओडिशा के राज्यपाल तत्काल हस्तक्षेप करें.
चारों वामपंथी दलों ने आगे घोषणा की कि स्थिति का जायजा लेने के लिए एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल जल्द ही सिजीमाली और आसपास के क्षेत्रों का दौरा करेगा. प्रभावित निवासियों के साथ कांतमाल गांव में एक जनसभा आयोजित की जाएगी और प्रशासन से संपर्क किया जाएगा.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल, जंगल, जमीन और आजीविका पर आदिवासियों के अधिकारों पर हमले जारी रहे, तो पूरे राज्य में एक विशाल जन-आंदोलन खड़ा हो जाएगा, जिसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार होगी.
इस दौरे के दौरान, भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रशांत कुमार मिश्रा, जयंत दास, दामोदर बेहरा, दुष्यंत कुमार दास और माकपा के बद्री नारायण दास और भाकपा(माले) के महेंद्र परिदा व अशोक प्रधान के साथ ही त्रिपाठी गमांग, वृंदावन बिदिका, मूर्ति मिनियाका, प्रकाश हिक्का, विजय माझी, कृष्ण ताडिंगी और अन्य नेताओं ने भी प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत की.