वर्ष 35 / अंक - 14 / नूरसराय की घटना भाजपा-नीतीश के सुशासन पर काला धब्ब...

नूरसराय की घटना भाजपा-नीतीश के सुशासन पर काला धब्बा

नूरसराय की घटना भाजपा-नीतीश के सुशासन पर काला धब्बा

नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के अजयपुर गांव में 26 मार्च 2026 को एक युवा महिला के साथ सरेआम छेड़छाड़ और सामूहिक दुष्कर्म की कोशिश की गंभीर घटना सामने आई है. जानकारी के अनुसार, गांव के ही कुछ दबंगों ने महिला को पकड़कर जबरन ले जाने का प्रयास किया और इस दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार व गाली-गलौज की. महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे, तब जाकर वह उनके चंगुल से छूट सकी.

घटना के बाद नुरसराय थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने अब तक अशोक ऊर्फ पूना यादव और मतरु राउत सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है. पीड़िता अपने पति के बाहर रहने के कारण गांव में अपनी वृद्ध सास के साथ रहती है और सामाजिक रूप से कमजोर तबके से आती है.

घटना का वीडियो 31 मार्च को वायरल होने के बाद मामला व्यापक रूप से सामने आया. इसके बाद 1 अप्रैल को भाकपा(माले) और ऐपवा की पांच सदस्यीय जांच टीम गांव में पहुंची. टीम ने पाया कि पीड़िता बेहद भयभीत है और खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है. उसने बार-बार पुलिस जांच का हवाला दिया, जिससे यह आशंका और गहरी होती है कि उस पर किसी न किसी रूप में दबाव है. गांव में दबंगों का खौफ इतना है कि आसपास के कई लोग भी पीड़िता के खिलाफ ही बोलते नजर आए.

इस जांच टीम में शामिल सदस्य थे : श्रीनिवास शर्मा, कामरेड मकसुदन शर्मा (प्रखंड सचिव, नुरसराय), कामरेड गिरिजा देवी (जिलाध्यक्ष, ऐपवा), कामरेड रेणू देवी (ऐपवा नेत्री) और कामरेड वीरेश कुमार (जिलाध्यक्ष, इनौस).

टीम के गांव में रहने के दौरान ही पुलिस पहुंची. पीड़िता को थाना ले जाया गया. पत्रकारों और नेताओं की मौजूदगी के बावजूद किसी को भी उससे मिलने नहीं दिया गया. इससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

भाकपा(माले) और ऐपवा ने इस घटना को नीतीश सरकार के तथाकथित “सुशासन” की पोल खोलने वाली घटना बताया है.

बिहार में कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है. भाजपा द्वारा सत्ता पर पूर्ण कब्जा जमाने की कोशिशों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच ऐसी आपराधिक घटनाएं और बढ़ी हैं, जिससे साफ है कि शासन-प्रशासन का ध्यान जनता की सुरक्षा से हटकर सत्ता के खेल में उलझ गया है.

जांच दल ने मांग की है कि सभी आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी हो, स्पीडी ट्रायल चलाकर कड़ी सजा दी जाए और पीड़िता व उसके परिवार की सुरक्षा की पुख्ता गारंटी की जाए.

इसी मुद्दे को लेकर 2 अप्रैल को बिहारशरीफ जिला मुख्यालय में प्रतिवाद मार्च आयोजित किया गया, जबकि 5 अप्रैल को भाकपा(माले) और ऐपवा द्वारा राज्यव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. यदि न्याय में देरी हुई तो आंदोलन को और व्यापक व तेज किया जाएगा.


04 April, 2026