वर्ष 35 / अंक - 01 / रामगढ़ में शहीद जीतराम बेदिया की 223वीं जयंती

रामगढ़ में शहीद जीतराम बेदिया की 223वीं जयंती

रामगढ़ में शहीद जीतराम बेदिया की 223वीं जयंती: जल-जंगल-जमीन, संविधान और  लोकतंत्र बचाने का संकल्प

जल-जंगल-जमीन, संविधान और  लोकतंत्र बचाने का संकल्प

30 दिसंबर 2025 को दोपहर 12 बजे, घुटूवा सेकेंड गेट चैक, रामगढ़ (झारखंड) में स्वतंत्रता सेनानी शहीद जीतराम बेदिया की 223वीं जयंती आदिवासी संघर्ष मोर्चा एवं झारखड जन संस्कृति मंच के संयुक्त बैनर तले संघर्ष और संकल्प के साथ मनाई गई. कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोग, मजदूर, महिलाएं, युवा और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए. विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया.

कार्यक्रम की शुरुआत शहीद जीतराम बेदिया के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. इसके बाद उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में जल-जंगल-जमीन, संविधान, लोकतंत्र और पर्यावरण की रक्षा से जुड़े नारे बुलंद किए. और काॅरपोरेट केंद्रित विकास माॅडल, अंधाधुंध खनन और पर्यावरण विनाश के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया गया.

इसके पश्चात आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने शहीद जीतराम बेदिया के ऐतिहासिक संघर्ष को आज के आदिवासी आंदोलन से जोड़ते हुए अपने विचार रखे.

आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सहसंयोजक देवकीनन्दन बेदिया ने कहा कि शहीद जीतराम बेदिया का संघर्ष आज भी जल, जंगल, जमीन और संविधान की रक्षा के आंदोलन में जीवित है. उन्होंने कहा कि शहीद जीतराम बेदिया केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज के आदिवासी प्रतिरोध की जीवित चेतना हैं. अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनका संघर्ष आज काॅरपोरेट लूट और राज्य-काॅरपोरेट गठजोड़ के खिलाफ संघर्ष का रूप ले चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संविधान को कमजोर कर देश को काॅरपोरेट घरानों – अडानी व अंबानी के हवाले किया जा रहा है और तानाशाही व हिंदू राष्ट्र की दिशा में धकेला जा रहा है. ऐसे में दूसरी आजादी की लड़ाई को तेज करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार आदिवासियों का है. सीएनटी व एसपीटी ऐक्ट, विल्किंसन रूल और पांचवीं अनुसूची संविधान की आत्मा हैं, लेकिन इन्हें जान-बूझकर कमजोर किया जा रहा है. अरावली से लेकर झारखंड और छत्तीसगढ़ तक जंगलों की कटाई और पहाड़ों को जमींदोज करना विकास नहीं, बल्कि विनाश है.

नागेश्वर मुंडा ने पेसा कानून का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून आदिवासी स्वशासन की बुनियाद है और ग्राम सभा को असली मालिक बनाता है. उन्होंने मांग की कि रामगढ़ सहित झारखंड के सभी आदिवासी बहुल जिलों, प्रखंडों और पंचायतों को अविलंब अनुसूचित क्षेत्र (शिडयूल्ड एरिया) घोषित किया जाए.

झारखंड जन संस्कृति मंच के सुरेन्द्र कुमार बेदिया ने कहा कि शहीद जीतराम बेदिया जैसे आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को जानबूझकर इतिहास के हाशिये पर रखा गया. उन्होंने मांग की कि शहीद जीतराम बेदिया की जीवनी को स्कूली और उच्च शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने वास्तविक इतिहास से परिचित हो सके. उन्होंने कहा कि आज सत्ता और काॅरपोरेट के दबाव में इतिहास लिखा जा रहा है, जबकि इतिहास जनता के संघर्षों के आधार पर लिखा जाना चाहिए. उन्होंने हसदेव अरण्य, सारंडा जंगल और 670 किलोमीटर तक फैली अरावली पर्वतमाला की कटाई व खनन का मुद्दा उठाते हुए इसके खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया.

मजदूर नेता अमल घोषाल ने कहा कि काॅरपोरेट केंद्रित विकास माॅडल देश, मजदूर वर्ग और प्रकृति – तीनों के लिए घातक है. उन्होंने कहा कि 44 श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड लागू किए गए हैं, जिससे मजदूरों को फिर से गुलामी की ओर धकेला जा रहा है. मनरेगा जैसे रोजगार अधिकार कानूनों को कमजोर किया गया है, जिसका देशव्यापी विरोध जरूरी है.

ऐपवा नेत्री नीता बेदिया ने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ केवल नारा बनकर रह गया है. महिलाओं-बेटियों के खिलाफ हिंसा, बलात्कार और हत्याओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है. आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं पर दोहरा अत्याचार हो रहा है, जिसके खिलाफ संगठित प्रतिरोध जरूरी है.

मदन प्रजापति ने शहीद जीतराम बेदिया के जीवन और उनके विचारों को  आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए आह्वान किया कि जल-जंगल-जमीन व स्वाभिमान की रक्षा के लिए जिस रास्ते को शहीद जीतराम बेदिया ने दिखाया, उसी रास्ते पर समाज को आगे बढ़ना होगा.

कार्यक्रम में तृतियाल बेदिया, बृजनारायण मुंडा, भरत बेदिया, प्रयाग बेदिया, पंचम करमाली, धनमती देवी, रघु मुंडा, अमर मुंडा, दिनेश करमाली, बटेश्वर मुंडा, प्यारे लाल बेदिया, महादेव बेदिया, सीता देवी, धनीराम प्रजापति, तुलसी बेदिया,सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे.

उसी दिन चपरी-बुमरी मैदान में आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों आदिवासी एकत्रित हुए. यहां शहीद जीतराम बेदिया की तस्वीर पर माल्यार्पण व नारेबाजी के बाद आयोजित संकल्प सभा को भुनेश्वर बेदिया, सुभाष बेदिया, लालचंद बेदिया और रामबृक्ष बेदिया ने संबोधित किया.

भुनेश्वर बेदिया ने कहा कि भाजपा सरकार के दौर में हर तबके पर हमले तेज हुए हैं, इसलिए संगठित संघर्ष जरूरी है. सुभाष बेदिया ने अरगड्डा खुली कोयला खदान के लिए आदिवासी रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया. लालचंद बेदिया ने लोकल सेल बंद होने से ग्रामीण मजदूरों के रोजगार छिनने की बात कही. रामबृक्ष बेदिया ने जीतराम बेदिया की जीवनी को स्कूल-काॅलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग दोहराई.

आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले ग्राम हेसला में सरयू बेदिया और लाल कुमार बेदिया ने शहीद जीतराम बेदिया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की. सरयू बेदिया ने कहा कि जिस तरह शहीद जीतराम बेदिया ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया था, उसी तरह आज काॅरपोरेट गुलामी के खिलाफ दूसरी आजादी की लड़ाई लड़नी होगी.

वहीं कोडी गांव में आयोजित जयंती कार्यक्रम में मोर्चा नेता नरेश बडाईक ने आमसभा को संबोधित कर शहीद जीतराम बेदिया के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया. कार्यक्रम के अंत में सभी स्थानों पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में संविधान, लोकतंत्र, आदिवासी अधिकार, जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करने तथा शहीद जीतराम बेदिया के सपनों के अनुरूप आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. 


03 January, 2026