वर्ष 35 / अंक - 07 / अखिल भारतीय मजदूर हड़ताल में भाकपा(माले) की उत्साहप...

अखिल भारतीय मजदूर हड़ताल में भाकपा(माले) की उत्साहपूर्ण भागीदारी

अखिल भारतीय मजदूर हड़ताल में भाकपा(माले) की उत्साहपूर्ण भागीदारी

उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) ने 12 फरवरी को मजदूर हड़ताल को सफल बनाने और सरकार को कड़ा संदेश देने के लिए मजदूरों व किसानों को धन्यवाद दिया है. पार्टी और जनसंगठनों के कार्यकर्ता खुद भी सड़कों पर उतरे और मार्च निकाल कर प्रदेश भर में हड़ताल में भाग लिया. अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस), एक्टू और उससे सम्बद्ध उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की.

चार लेबर कोड, विकसित भारत ग्राम जी कानून सहित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय श्रम संगठनों द्वारा बुलाई गई हड़ताल का समर्थन संयुक्त किसान मोर्चा ने भी किया था. मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान व देश के हितों के खिलाफ बताकर हड़ताल में भाग लिया.

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने मिर्जापुर में लालगंज तहसील मुख्यालय पर मार्च के बाद सभा को संबोधित किया. गरीबों को उजाड़ने की बुलडोजर नीति के खिलाफ संघर्ष करने के कारण हाल ही में भाकपा(माले) राज्य सचिव, जिला सचिव और ग्रामीणों को लालगंज थाने में फर्जी एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया गया था. रिहाई के बाद उनकी लालगंज में पहली सभा थी.

राजधानी लखनऊ में बख्शी का तालाब तहसील मुख्यालय पर भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने मार्च के बाद सभा की. प्रयागराज, बनारस, कानपुर, गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, देवरिया, महाराजगंज, बस्ती, मऊ, चंदौली, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, जालौन, मथुरा, मुरादाबाद आदि जिलों में भी भाकपा(माले) ने मार्च निकाला, सभा की और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा.

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों के एक दिन में ‘काम के आठ घंटे’ का अधिकार, संगठित होने, यूनियन बनाने और अपनी लोकतांत्रिक मांगों के लिए हड़ताल करने जैसे ढेरों कानूनी अधिकारों पर ये चार लेबर कोड कुठाराघात करते हैं. दूसरी ओर, मालिकों और उद्योगपतियों को बहुतेरी मजदूर-विरोधी रियायतें देते हैं. मजदूर वर्ग के ऐतिहासिक संघर्षों, बलिदानों और शहादतों से हासिल पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर लाई गई चारों श्रम संहिताएं दरअसल मजदूरों को फिर से गुलाम बनाने के कानूनी दस्तावेज हैं.

नेताओं ने कहा कि मनरेगा कानून, जो सामाजिक कल्याण की दिशा में मील का पत्थर था, को एक झटके में समाप्त कर ‘विकसित भारत ग्राम जी’ कानून लाया गया है. मनरेगा में काम मांगने और पाने का गरीबों को कानूनी अधिकार था, जबकि नए कानून में यह केंद्र सरकार की मर्जी पर छोड़ दिया गया है. रोजगार गारंटी का नया कानून साल में व्यस्त खेती के सीजन में 60 दिन ‘काम नहीं देने’ की गारंटी करता है. भुगतान में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी भी घटा दी गई है. सौ के बजाय सवा सौ दिन काम देने का झांसा दिया गया है. यह मनरेगा कानून ही था, जो कोरोना काल में गरीबों की ढाल बना था. उसे और मजबूत बनाने और कृषि कार्यों से भी जोड़ने की जगह उसे समाप्त करना निहायत जन विरोधी कदम है.

सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में बुलडोजर राज चल रहा है और गरीब उजाड़े जा रहे हैं. आदिवासी-वनवासी जल-जंगल-जमीन से वंचित किये जा रहे हैं. कई गांवों व किसानों पर बेदखली की तलवार लटक रही है और अल्पसंख्यकों की इबादतगाहों को निशाना बनाया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद बुलडोजर नीति असंवैधानिक रुप से जारी है.

राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें प्रमुख थीं : चार लेबर कोड समाप्त कर पुराने श्रम कानून बहाल किये जाएं. विकसित भारत ग्राम जी कानून वापस लेकर मनरेगा कानून को बहाल किया जाए. मनरेगा में 200 दिन काम, 600 रु. प्रतिदिन मजदूरी और बकाया मजदूरी का भुगतान की गारंटी की जाए. बुलडोजर नीति पर रोक लगाई जाए. गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल बंद हो. वास-आवास, आजिविका, जमीन, जंगल व वनोपज पर आदिवासियों, गरीबों के अधिकारों की गारंटी हो. बिजली सेक्टर सहित सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगे. प्रति माह 200 यूनिट फ्री बिजली दी जाए. किसान व देश विरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द किया जाए.

(झारखंड की राजधानी रांची में आम हड़ताल के समर्थन में उतरे भाकपा(माले) समेत अन्य दलों व जनसंगठनों के कार्यकर्ता)

14 February, 2026